Budget 2025: केंद्रीय बजट से आम जनता की वो 5 चिंताएं, जिनके लिए निर्मला सीतारमण से उम्मीद

भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आगामी बजट 2025 पेश करने की तैयारी कर रही हैं और देश की जनता महंगाई, बेरोजगारी और आयकर में राहत की उम्मीद कर रही है। मौजूदा आर्थिक हालात को देखते हुए निवेशकों की चिंताएं बढ़ी हैं, जिससे रोज़गार के अवसर भी प्रभावित हुए हैं। इस स्थिति में आम जनता की पांच प्रमुख चिंताओं पर सरकार से राहत की उम्मीद की जा रही है। आइए इन मुद्दों पर एक नज़र डालते हैं।

1. महंगाई से राहत की उम्मीद

खाद्य पदार्थों, सब्ज़ियों, खाद्य तेलों और दूध की बढ़ती कीमतों ने आम उपभोक्ताओं की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। खराब मौसम और आपूर्ति में बाधाओं के कारण इन वस्तुओं की कीमतों में इजाफा हुआ है। आयात शुल्क और उत्पादन लागत में बढ़ोतरी भी महंगाई का प्रमुख कारण बनी है। सरकार से उम्मीद है कि वह उचित नीतियों के माध्यम से खाद्य और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए कदम उठाएगी।

2. आर्थिक सुस्ती और निवेश में कमी

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के अनुसार, 2024-25 में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 6.4% रहने की संभावना है, जो हाल के वर्षों में सबसे कम है। बुनियादी ढांचे पर सरकारी खर्च में कमी और मांग में गिरावट के कारण उद्योगों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। अर्थशास्त्री मानते हैं कि सरकार को पूंजीगत व्यय (कैपिटल एक्सपेंडिचर) बढ़ाकर आर्थिक गति को पुनर्जीवित करना चाहिए।

3. नौकरियों के घटते अवसर

कोविड-19 महामारी के बाद असंगठित क्षेत्र में रोजगार की स्थिति और खराब हुई है। प्रवासी मज़दूरों की वापसी के बावजूद शहरों में रोजगार की कमी बनी हुई है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि लघु, मध्यम और सूक्ष्म उद्योगों (MSME) को बढ़ावा देकर रोजगार सृजन को गति दी जा सकती है। बजट 2025 में इस क्षेत्र के लिए विशेष योजनाओं की उम्मीद की जा रही है।

4. वेतन वृद्धि में ठहराव

महंगाई के मुकाबले वेतन वृद्धि की धीमी रफ्तार ने मध्यम और निम्न आय वर्ग को प्रभावित किया है। संगठित क्षेत्र में वेतन वृद्धि तो देखी गई है, लेकिन असंगठित क्षेत्र में स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। सरकार से उम्मीद है कि वह छोटे उद्योगों को सहयोग देकर इस समस्या का समाधान निकालने की दिशा में प्रयास करेगी।

5. आयकर में राहत की मांग

मध्य वर्ग के लिए इनकम टैक्स में छूट की मांग लगातार बढ़ रही है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को कर ढांचे में बदलाव कर राहत देनी चाहिए, ताकि लोगों की क्रय शक्ति बढ़े और उपभोग में वृद्धि हो। कुछ विश्लेषकों का सुझाव है कि आयकर छूट सीमा 10 लाख रुपये तक बढ़ाई जाए।

संभावित सरकारी कदम

बजट 2025 में सरकार से उम्मीद की जा रही है कि वह बुनियादी ढांचे पर खर्च बढ़ाएगी। MSME सेक्टर को समर्थन देगी और कर राहत के माध्यम से मध्यम वर्ग को राहत प्रदान करेगी। इन प्रयासों से न केवल महंगाई पर नियंत्रण पाया जा सकेगा बल्कि आर्थिक गति भी बढ़ेगी। अब देखना यह होगा कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आम जनता की इन उम्मीदों को किस हद तक पूरा कर पाती हैं।

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