बजट 2014: शताब्दी में ऑटोमेट‍िक दरवाज़े तो राजधानी में होंगी डिस्पोज़ेबल चादरें!

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नई दिल्ली। देश और देशवासियों की उम्मीदों पर खरा उतर पाएगा नई सरकार का बजट यह तो वक्त के साथ ही पता चलेगा पर कुछ आशंकाओं से परिणाम सुहावने नजर आ रहे हैं। रेल बजट-2014 में राजधानी में डिस्पोजेबल चादर यानि कि यूज़ एंड थ्रो' और शताब्दी ट्रेनों में स्वचालित दरवाजे लगाए जाने की योजना का प्रस्ताव लाया जा सकता है।

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माना जा रहा है कि रेल मंत्री का फोकस ट्रेनों में बेहतर यात्री सुविधाओं और सुरक्षा पर होगा। वहीं, एक कदम और आगे बढ़ाते हुए रेल यात्रियों की सुविधा को और बेहतर बनाने के लिए अब सफाई के लिए बेंगलूर राजधानी में पायलट प्रोजेक्ट के तौर डिस्पोजेबल बेडरोल्स उपलब्ध कराए जाएंगे। यात्रियों के फीडबैक के आधार पर इस सुविधा को अन्य राजधानी ट्रेनों में भी लागू किया जाएगा।

डेयरी उत्पादों और दुग्ध उत्पादों की बढ़ती मांग की वजह से रेलवे उच्च क्षमता के दुग्ध वाहनों को विकसित करने का भी प्रस्ताव कर रहा है। जिसमें 44 हजार 600 लीटर की ढुलाई की जा सके। फिलहाल इसकी क्षमता 40 हजार लीटर की है। इससे दुग्ध वाहन की ढोने की क्षमता बढ़ेगी और नए डिजाइन के दुग्ध वाहन का वजन 37 टन से घटकर 29.7 टन हो जाएगा।

उत्पादन क्षेत्र से बढ़ती मांग की वजह से रेलवे अपने बजेटरी प्लान में उच्च क्षमता के वैगन बनाने को अंतिम रूप दे रहा है। ताकि ज्यादा से ज्यादा स्टील की ढुलाई की जा सके।

योजना के मुताबिक ट्रांसपोर्टरों को ध्यान में रखते हुए तीन हजार 944 टन के क्वॉयल को ढोने के लिए वैगन के निर्माण का प्रस्ताव किया जा रहा है। हालांकि इस तरह की जन-लुभावनी योजनाएं सूत्रों के हवाले से सामने आ रही हैं, असल तस्वीर बजट के खाके में छिपी है, जिसे हम और आप 9, 10 जुलाई को जानेंगे।

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