GST Rejig Proposed: क्या पानी की बोतलों पर घटने वाला है TAX? या बढ़ेगा जूतों पर GST? जानें सबकुछ
GST Rates Rejig Proposed News: गुड्स एंड सर्विस टैक्स (GST) दरों को तर्कसंगत बनाने के लिए मंत्रियों के समूह (जीओएम) ने बड़े बदलाव के सुझाव दिए हैं। इस फैसले का उद्देश्य कुछ आवश्यक वस्तुओं पर टैक्स की दर कम करना और विलासिता की वस्तुओं पर दर बढ़ाना है।
रिपोर्ट के अनुसार, 20 लीटर की पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर बोतलों, साइकिल और एक्सरसाइज नोटबुक जैसी आवश्यक वस्तुओं पर जीएसटी दर 18% से घटाकर 5% करने का प्रस्ताव है। यह उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम होगा, जिससे इन वस्तुओं की कीमतें कम हो सकती हैं।

लग्जरी वस्तुओं पर टक्स में वृद्धि!
वहीं, लग्जरी घड़ियों (25,000 रु. से अधिक कीमत) और जूतों (15,000 रुपये से अधिक कीमत वाले) पर जीएसटी दर को 18% से बढ़ाकर 28% करने का सुझाव दिया गया है। इसका उद्देश्य विलासिता की वस्तुओं पर कर बढ़ाकर राजस्व को बढ़ाना है।
संभावित राजस्व लाभ
बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता वाले मंत्री समूह के अनुसार, इन बदलावों से लगभग 22,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होने की उम्मीद है। जीएसटी युक्तिकरण पर छह सदस्यीय मंत्री समूह में उत्तर प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना, राजस्थान के स्वास्थ्य सेवा मंत्री गजेंद्र सिंह, कर्नाटक के राजस्व मंत्री कृष्ण बायरे गौड़ा और केरल के वित्त मंत्री केएन बालगोपाल भी शामिल थे। शनिवार को अपनी पिछली बैठक में मंत्री समूह ने 100 से अधिक वस्तुओं पर टैक्स की दर में बदलाव पर चर्चा की थी।
अन्य जीएसटी दरों में बदलाव
10,000 रुपये से कम कीमत वाली साइकिलों पर जीएसटी दर को 12% से घटाकर 5% करने का प्रस्ताव है।
सौंदर्य और मेक-अप उत्पादों जैसे हेयर ड्रायर और हेयर कर्लर पर जीएसटी दर 18% से बढ़ाकर 28% की जा सकती है।
वर्तमान जीएसटी स्लैब जानें
वर्तमान में, भारत में जीएसटी की चार स्तरीय कर संरचना 5%, 12%, 18%, और 28% है। आवश्यक वस्तुओं पर सबसे कम कर (5%) लगाया जाता है, जबकि लग्जरी संबंधी वस्तुओं पर 28% कर की दर है।
मंत्रियों के समूह द्वारा प्रस्तावित ये बदलाव देश की जीएसटी प्रणाली को और अधिक तर्कसंगत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। आवश्यक वस्तुओं पर कर की दर घटाकर और विलासिता की वस्तुओं पर बढ़ाकर सरकार ने यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया है कि कर संग्रह संतुलित हो और उपभोक्ताओं पर कर का भार भी सही तरीके से बंटे। हालांकि, यह जानकारी पीटीआई की रिपोर्ट में अज्ञात अधिकारियों के हवाले से दी गई है। वनइंडिया स्वतंत्र रूप से इस जानकारी की पुष्टि नहीं कर सका।












Click it and Unblock the Notifications