Export Duty Hike: सरकार ने पेट्रोल पर-डीजल पर बढ़ाई एक्सपोर्ट ड्यूटी, जानें क्या होगा आप पर असर?
Export Duty Hike: सरकार ने पेट्रोल पर-डीजल पर बढ़ाई एक्सपोर्ट ड्यूटी, जानें क्याआप पर होगा
ऩई दिल्ली। 1 जुलाई को सरकार ने पेट्रोल-डीजल( Petrol-Diesel) पर एक्सपोर्ट ड्यूटी टैक्स बढ़ा दिया है। पेट्रोल डीजल के साथ-साथ केंद्र सरकार ने एविएशन टरबाइन फ्यूल यानी ATF के एक्सपोर्ट पर एक्साइज ड्यूटी बढ़ा दी है। सरकार ने आज पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी 6 रुपए प्रति लीटर तो डीजल पर 13 रुपए प्रति लीटर तक बढ़ा दी है। वहीं एटीएफ के एक्सपोर्ट पर 6 रुपए प्रति लीटर सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी बढ़ाई दी गई है।

पेट्रोल-डीजल पर बढ़ी एक्सपोर्ट ड्यूटी
सरकार ने घरेलू बाजार में डिमांड पूरी करने के लिए और पेट्रोल-डीजल जैसे ईंधनों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए ये फैसला लिया है। सरकार के फैसले की जानकारी वित्त मंत्रालय की ओर से नोटिफिकेशन जारी कर दी गई है, जिसमें वित्त मंत्रालय ने कहा है कि देश में ईंधन की कमी ना हो इसे सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने ये फैसला किया है। वहीं इस फैसले से घरेलू बाजार में कीमतों पर नियंत्रण रखने में भी मदद मिलेगी।

क्या होगा आम आदमी पर असर
सरकार ने स्पष्ट कहा है कि इस फैसले से घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर कोई असर नहीं होगा। दरअसल सरकार द्वारा ईंधन पर एक्सपोर्ट ड्यूटी बढ़ाने की खबर के बाद बहस शुरू हो गई कि क्या इस फैसले से आम आदमी पर महंगाई का बोढ बढ़ेगा। तेल की कीमतों पर असर पड़ेगा? इस सवाल के जवाब में सरकार की ओर से नोटिफिकेशन जारी कर स्पष्ट किया गया कि इस फैसले का असर आम आदमी पर नहीं होगा। घरेलू बाजार में तेल की कीमतों पर इस फैसले का कोई असर नहीं होगा।

नुकसान नहीं आपका फायदा
सरकार का यह फैसला सिर्फ तेल कंपनियों द्वारा देश के बाहर निर्यात होने वाले पेट्रोलियम पदार्थों पर पड़ेगा। यानी इस फैसले से आम आदमी को परेशान होने की जरूरत नहीं है। आपको बता दें कि एक्सपोर्ट ड्यूटी टैक्स बढ़ने से अब पहले की तुलना में देश से बाहर पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स को भेजना और खर्चीला हो जाएगा। ऐसे में अगर एक्सपोर्ट महंगा होगा तो निर्यातक पेट्रोलियम पदार्थों के निर्यात से बचेंगे। यानी इस फैसले से आम आदमी का नुकसान नहीं बल्कि फायदा होता दिख रहा है।

सरकार ने निर्यातकों को दिया निर्देश
सरकार ने निर्यातकों को निर्देश दिया है कि वो अपने 50 फीसदी पेट्रोल को घरेलू बाजार में ही बेचें। वहीं 30 फीसदी डीजल को उन्हें घरेलू बाजार में ही बेचना होगा। सरकार ने कहा कि इस फैसले से भारत को महंगे क्रूड के दौर में फायदा होगा। सरकार ने कहा कि वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी और तेल उत्पादकों को होने वाले फायदे पर कंट्रोल करने के लिए घरेलू स्तर पर उत्पादित कच्चे तेल पर भी 23230 रुपए प्रति टन का अतिरिक्त कर लगाने का फैसला लिया गया है।

इन कंपनियों पर लगेगी लगाम
आपको बता दें कि वर्तमान स्थिति में निजी कंपनियों कच्चा तेल इंपोर्ट कर इसे भारत में रिफाइन करती हैं और फिर उसे विदेशी बाजारों में एक्सपोर्ट कर देती हैं, लेकिन सरकार के इस फैसले से निजी कंपनियों को पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स को विदेशों में बेचना पहले से महंगा हो जाएगा। इसका लाभ आम आदमी को मिलेगा और घरेलू बाजार में पेट्रोलियम पदार्थ की उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी। यानी सरकार के इस फैसले से देश में ईंधन की सप्लाई बढ़ेगी, क्योंकि निजी कंपनियां मुनाफे के चक्कर में एक्पोर्ट पर ज्यादा फोकस कर रही थी। वहीं जानकारों का कहना है कि एक्सपोर्ट पर एक्साइज ड्यूटी बढ़ाने के फैसले से देश में पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों पर नियंत्रण रखने में भी सरकार को मदद मिलेगी और सप्लाई भी बनी रहेगी।
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