कोरोना काल में अच्छी खबर, सितंबर में तेजी से बढ़ी फैक्ट्री गतिविधियां, टूटा इतने सालों का रिकॉर्ड
नई दिल्ली। कोरोना वायरस महामारी को रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन प्रतिबंधों में छूट मिलने का असर अब भारतीय कारखानों में दिखने लगा है। गुरुवार को जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक सितंबर में भारत की फैक्ट्री गतिविधि आठ साल में सबसे तेज गति से बढ़ी, मांग और उत्पादन में भारी उछाल आया। हालांकि इस दौरान कर्मचारियों को भी छटनी भी जारी रही। रिकवरी के संकेत कोरोना काल में एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भारत के लिए एक राहत की खबर है।
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गौरतलब है कि भारत में कोरोना वायरस महामारी ने बहुत तेजी से पैर फैलाए जिस कारण देश को आर्थिक क्षेत्र में काफी बड़ा नुकान झेलना पड़ा। रिपोर्ट के मुताबिक व्यापक रूप से इस साल 1979 के बाद से अपने पहले पूर्ण वर्ष के संकुचन को चिह्नित करने की उम्मीद है। IHS मार्किट द्वारा संकलित निक्केई मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स सितंबर में अगस्त के मुकाबले 52.0 से बढ़कर 56.8 पर पहुंच गया। जून में लॉकडाउन प्रतिबंधों में ढील के बाद से ये सेक्टर की स्थिति में सुधार के संकेत हैं। 50 से ऊपर एक रीडिंग विस्तार को इंगित करता है, जबकि नीचे संकेत संकुचन है।
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आईएचएस मार्किट में अर्थशास्त्र के सहयोगी निदेशक पॉलीन्ना डी लीमा ने बताया कि भारतीय विनिर्माण उद्योग सही दिशा में आगे बढ़ रहा है, सितंबर के लिए पीएमआई डेटा से कई सकारात्मक चीजें सामने आई हैं। ये वृद्धि काफी तेज रही और इस सर्वे के इतिहास में तीसरी सबसे तेज रही। 2012 की शुरुआत से ये बढ़ोतरी की दर सबसे तेज रही। इसी तरह नए कारोबार में बैक-टू-बैक बढ़ोतरी हुई। COVID-19 प्रतिबंधों में मिली छूट के कारण, कारखानों को उत्पादन के लिए पूरी तरह से मदद मिली साथ ही नए काम में वृद्धि का समर्थन किया। ईटी की रिपोर्ट के अनुसार एक सर्वे के मुताबिक निर्माताओं ने सितंबर में प्रतिबंध में ढील और हाई डिमांड के बीच लगातार दूसरे महीने आउटपुट बढ़ाया।












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