Budget 2021: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के सामने ये होंगी 5 चुनौतियां

Budget 2021: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Finance Minister Nirmala Sitharaman) आज ऐसे वक्त में केंद्रीय बजट पेश करने जा रही हैं, जब सेंसेक्स में ऐतिहासिक उछाल से निवेशकों का भारतीय अर्थव्यवस्था में भरोसा और बढ़ा है। यह वह वक्त भी है जब लग रहा है कि देश की इकोनॉमी कोरोना वायरस महामारी के झटके से बाहर निकल रही है। ऐसे में वित्त मंत्री की ओर से बजट में की जाने वाली घोषणाएं अगले वित्त वर्ष में इकोनॉमिक रिकवरी और उसके विकास की दिशा तय करेगी। लेकिन, भले ही चालू वित्त वर्ष की तीसरी और चौथी तिमाही ने भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए उम्मीदों के दीए जलाए हैं, लेकिन केंद्र सरकार के पास चुनौतियों की भी कमी नहीं है। हम यहां उन्हीं 5 चुनौतियों पर फोकस कर रहे हैं, जिनपर वित्त मंत्री को ध्यान देना चाहिए, ताकि कोरोना की वजह से हमने जितना गंवा दिया, आने वाले वर्षों में कम से कम अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर हमें उसकी ज्यादा टीस ना रह जाए।

मांग बढ़ाने पर जोर

मांग बढ़ाने पर जोर

इस बात में कोई दो राय नहीं कि सरकार की ओर से उठाए गए कदमों की वजह से महामारी का अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाला असर थम गया है। देश लगातार दो तिमाही में जीडीपी में गिरावट की वजह से आई मंदी के दौर से धीरे-धीरे निकल रहा है। हालांकि, देश की इकोनॉमी के रिकवरी के कई तरह के संकेत मौजूद हैं, बावजूद इसके मांग (Demands) को लेकर मौजूदा अनिश्चितता अर्थशास्त्रियों को अभी भी परेशान कर रही है। कुछ विशेषज्ञों ने सरकार से कहा है कि वह ऐसे कदम उठाए जिससे मांग बढ़े और खपत में आई कमी को रोकने की कोशिश करे, जिसकी वजह से सरकार के राजस्व को भी नुकसान हो रहा है। हालांकि, पिछले तीन महीने में जीएसटी (GST)के ज्यादा कलेक्शन से यही संकेत मिल रहे हैं कि खपत में इजाफा हुआ है। वैसे संभावना है कि सरकार लोगों के बीच खपत बढ़ाने के लिए कुछ और रियायतों की घोषणा कर सकती है, जिससे लघु और मध्यम-अवधि में इकोनॉमिक रिकवरी में मदद मिल सकती है।

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    रोजगार के मौके पैदा करने होंगे

    रोजगार के मौके पैदा करने होंगे

    अर्थव्यवस्था की स्थिति सुधरने (economic growth) के बावजूद भारत में रोजगार ( employment)का स्तर महामारी के पहले वाले स्तर पर नहीं लौटा है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) के मुताबिक सच तो ये है कि बेरोजगारी (unemployment) का स्तर फिर से बढ़ने लगा है। विशेषज्ञों ने सरकार को सलाह दी है कि रोजगार के मौके बढ़ाने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर (infrastructure), मैन्यूफैक्चरिंग (manufacturing) और रियल एस्टेट (real estate) सेक्टर पर ज्यादा खर्च करे। 2021 में उम्मीद हैं कि बड़ी कंपनियां और लोगों को रोजगार देंगी। लेकिन, छोटे और मध्यम-दर्जे के कई कारोबार अभी भी वित्तीय संकट से जूझ रहे हैं और उनके लिए रोजगार पैदा करना मुमकिन नहीं लग रहा है, जबतक कि उन्हें सरकार से मदद ना मिले। ऐसे में वित्त मंत्री से उम्मीद है कि वह केंद्रीय बजट 2021 (Union Budget 2021) में ऐसे कदम उठाएंगी कि रोजगार के ज्यादा अवसर पैदा हों।

    विकासोन्मुखी निवेश

    विकासोन्मुखी निवेश

    सरकार को ऐसे सेक्टर में निवेश पर फोकस करना होगा, जो देश के विकास के लिए जरूरी हैं। एक्सपर्ट की राय है कि सरकार को पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पर खर्च बढ़ाना चाहिए, जिससे आखिरकार और ज्यादा रोजगार के अवसर पैदा(job creation) होंगे। पूर्व आरबीआई गवर्नर और अर्थशास्त्री रघुराम राजन (economist Raghuram Rajan) ने भी सरकार से कहा है कि पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजक्ट (public infrastructure projects)पर खर्च बढ़ाए, जिससे कि बाद में राजस्व चक्र को तय करने, रोजगार पैदा करने और निजी निवेश में सहायता मिलेगी।

    सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं

    सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं

    राहत की बात है कि देश ने कोरोना वायरस महामारी के दौरान हेल्थकेयर (Healthcare) सिस्टम की चुनौती का सामना किया है। क्योंकि, सस्ती स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता की इस क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों की लंबे समय से मांग रही है। पिछले बजट में ये लोग स्वास्थ्य सेवाओं के लिए रखे गए धन से संतुष्ट नहीं थे और उनके मुताबिक इसे जीडीपी (GDP) के 2.5 फीसदी तक बढ़ाने की आवश्यकता है। वैसे अभी तक यह साफ नहीं है कि सरकार इस दिशा में आने वाले बजट 2021 में क्या कदम उठाने जा रही है, लेकिन विशेषज्ञ चाहते हैं कि सस्ती स्वास्थ्य सेवाओं (affordable healthcare) को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने की दिशा में और कदम उठाए जाने चाहिए। इसके अलावा वो स्वास्थ्य और चिकित्सा खर्चों (health and medical expenses) पर लगने वाले टैक्स (taxation) को भी ज्यादा तार्किक बनाने की मांग कर रहे हैं।

    राजकोषीय घाटा और विनिवेश

    राजकोषीय घाटा और विनिवेश

    बजट 2021 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के सामने राजकोषीय घाटा और विनिवेश (Fiscal deficit & divestments) पर भी फोकस करने की चुनौती होगी। कोरोना महामारी के दौरान अत्यधिक उधारी और खर्च ने भी राजकोषीय घाटा बढ़ा दिया है। माना जा रहा है कि चालू वित्त वर्ष में इसका जो अनुमान लगाया गया था, उससे यह करीब-करीब दोगुना हो सकता है। दूसरी तरफ 2020 में ज्यादातर तिमाही में राजस्व की उगाही पर भी महामारी की भारी मार पड़ी है। ऐसे में सरकार के लिए इकोनॉमिक रिकवरी की गति को बरकरार रखने के लिए विनिवेश एक बहुत ही महत्वपूर्ण रास्ता हो सकता है। सरकार इसके जरिए खर्च के लिए रकम जुटा सकती है।

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