रूस-यूक्रेन युद्ध से भारत में गहरा सकता है रिफाइंड तेल की किल्लत का खतरा? जानिए कैसे
नई दिल्ली, 03 मार्च। यूक्रेन और रूस के बीच युद्ध चल रहा है, जिसका असर दुनियाभर के देशों में देखने को मिल रहा है। भारत पर भी इस युद्ध का असर साफ नजर आ रहा है। एक तरफ जहां भारत पर अंतरराष्ट्रीय दबाव है कि वह रूस के पक्ष में बयान दे या पश्चिमी देशों के। रूस पर जिस तरह से दुनियाभर के देशों ने पाबंदी लगाई है उसके बाद इसका रूसे से निर्यात होने वाले उत्पादों की कमी का खतरा मंडरा रहा है। ना सिर्फ रूस बल्कि यूक्रेन से भी निर्यात होने वाले उत्पादों पर खतरा मंडरा रहा है। भारत में तकरीबन 70 फीसदी सनफ्लार तेल यूक्रेन से आता है, ऐसे में भारत में रिफाइंड तेल की किल्लत का खतरा मंडरा रहा है।

जल्द स्थिति सामान्य होगी
इस बीच अडानी विलमार के सीईओ अंगशू मलिक ने कहा कि देश के 45 दिनों का स्टॉक है जबकि सामान्य तौर पर 60 दिनों का स्टॉक रखा जत है। सामान्य तौर पर ऐसे हालात में पाम ऑयल और सोयाबीन ऑयल की मांग 50 फीसदी की बढ़ोतरी होती है। हमारे पास सप्लाई चेन को सुचारू तौर पर जारी रखने के लिए पर्याप्त तेल है, जबतक हालात सामान्य नहीं हो जाते हैं हम सप्लाई चेन को बनाए रख सकते हैं, हमे उम्मीद है कि अगले 30-60 दिनों में स्थिति सामान्य हो जाएगी।
लोग दूसरे विकल्प की ओर जाते हैं
मलिक ने बताया कि भारत में 23 मिलियन मीट्रिक टन तेल की खबत होती है जबकि सनफ्लावर ऑयल की खपत तीन मिलियन टन है जोकि तकरीबन 12-13 फीसदी है। सामान्य तौर पर ऐसी स्थिति में सोयाबीन और पॉम तेल की मांग में इजाफा होता है, लिहाजा सनफ्लॉवर तेल की कुल मांग तकरीबन 5 फीसदी है। जबतक स्थिति सामान्य नहीं होती है तबतक सप्लाई चेन को हम सुचारू रूप से जारी रख सकते हैं। हम बहुत ज्यादा परेशान हो रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में अगर एक प्रकार के तेल की कीमत बढ़ती है तो दूसरे तरह के तेल की कीमतों में भी इजाफा होता है। पॉम तेल और सोयाबीन तेल की कीमतों में इजाफे का भारत और दुनियाभर में यही ट्रेंड है, तेल की कीमतें सामान्य तौर पर स्थिर रहती हैं।
अर्जेंटीना से भी आने वाला है तेल
अगर 45 दिन का स्टॉक खत्म हो जाए तो क्या होगा, इस सवाल के जवाब में मलिक कहते हैं कि अर्जेंटीना के सप्लायर पहले ही संपर्क करने लगे हैं, भारत भी वहां से तेल आयात कर रहा है। अप्रैल माह में 2-3 पार्सल यहां से आने वाला है। जब भी दाम बढ़ते हैं तो ऐसा ही होता है। उपभोक्ता दूसरे तरह के तेल के विकल्प की ओर चला जाता है. महाराष्ट्र, कर्नाटक सोयाबीन के तेल की खपत करने लगता है। लिहाजा हम मान सकते हैं कि 50 फीसदी मांग दूसरी तरफ शिफ्ट हो जाएगी जबकि 50 फीसदी मांग को मैनेज करना होगा। दाम में जल्द ही बढ़ोतरी और कमी होती है, स्थिति सामान्य होने पर जल्द ही इसके दाम में कमी आएगी।
काफी बड़ा स्टॉक आने वाला है
देश में तेल के स्टॉक की बात करें तो मलिक बताते हैं कि 35-40 दिन की जरूरत का तेल पैक है, जबकि ट्रेड के लिए 10-15 दिन का स्टॉक है, कुल मिलाकर तकरीबन 45 दिन का स्टॉक है। साथ ही फरवरी में ही 1.5 लाख टन तेल यूक्रेन से रवाना हो चुका है जिसे भारत पहुंचना है। वह जल्द ही पहुंचेगा। अर्जेंटीना से भी तेल पहुंचने वाला है। अगर भारत रूबल और रूपए से कुछ ट्रेड रूस से करता है तो रूस से भी काफी तेल आ सकता है। ऐसे में हालात को नियंत्रित किया जा सकता है। भारत में भी सरसो की अच्छी पैदावार हुई है, कई मिलियन टन तेल इससे आने वाला है। लिहाजा फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, हमे परेशान होने की जरूरत नहीं है।












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