7th Pay Commission: केंद्र सराकर ने सैन्यकर्मियों को दिया बड़ा तोहफा, HBA को लेकर बदले नियम
7th Pay Commission, केंद्र सरकार ने भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना के कर्मचारियों को बड़ा तोहफा दिया है। अब 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुसार रक्षा सेवा कर्मी हाउस बिल्डिंग एडवांस (एचबीए) के लिए पात्र होंगे।
सैन्य मामलों के विभाग (डीएमए) ने 19 जून 2023 को एक सर्कुलर जारी कर कहा कि राष्ट्रपति ने निर्णय लिया है कि, रक्षा कर्मियों को गृह निर्माण के लिए हाउस बिल्डिंग एडवांस (एचबीए) प्रदान किया जाएगा।

भारत सरकार के अवर सचिव लक्ष्मी बालासुब्रमण्यम द्वारा हस्ताक्षरित सर्कुलर में कहा गया है कि, राष्ट्रपति ने 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों और अन्य प्रासंगिक कारकों पर विचार करने के बाद एचबीए की मौजूदा योजना को और उदार बनाने का निर्णय लिया।
रक्षा कार्मिकों के लिए क्या होगी एचबीए की लिमिट:
नए घर की खरीद/निर्माण: 34 महीने का मूल वेतन, अधिकतम 7 लाख रुपये या घर/फ्लैट की लागत या री-पेमेंट क्षमता के अनुसार रकम दी जाएगी। जो भी नए घर/फ्लैट के निर्माण/खरीद के लिए सबसे कम हो।
मौजूदा घर का विस्तार: एचबीए की राशि 34 महीने के मूल वेतन तक सीमित होगी जो अधिकतम 6 लाख रुपये या विस्तार की के बराबर होगी।
घर की लागत की लिमिट: बनाए जाने/खरीदे जाने वाले घर की लागत (प्लॉट की लागत को छोड़कर) कर्मचारी के मूल वेतन के 139 गुना से अधिक नहीं होनी चाहिए, अधिकतम 60 लाख रुपये तक दिए जाएंगे।
डीएमए ने कहा कि यदि विभाग प्रमुख (एचओडी) मामले की खूबियों से संतुष्ट हैं, तो लागत सीमा में अधिकतम 25% तक की छूट दी जा सकती है।
री-पेमेंट क्षमता का गणना कैसे होगी:
- 20 साल बाद सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारी के मामले में: मूल वेतन का 40%
- 10 साल के बाद लेकिन 20 साल के बाद सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों के मामले में: मूल वेतन का 40% , डीसीआर ग्रेच्युटी को 65% तक समायोजित किया जा सकता है।
- 10 साल के भीतर सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों के मामले में: मूल वेतन का 50% तक, डीसीआर ग्रेच्युटी को 75% तक समायोजित किया जा सकता है।
कैसे मिलेगी ये धनराशि
- तैयार घर की खरीद के लिए एडवांस रकम का भुगतान एकमुश्त किया जा सकता है।
- नए फ्लैट की खरीद/निर्माण के लिए एडवांस का भुगतान विभाग प्रमुख के विवेक पर एकमुश्त या सुविधाजनक किश्तों में किया जा सकता है।
- हाउसिंग बिल्डिंग एडवांस पर ब्याज 8.50% होगा। वित्त मंत्रालय के परामर्श से इसे अधिसूचित करने के लिए हर तीन साल में इसकी समीक्षा की जाएगी।












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