पति की सैलरी डिटेल के लिए पत्नी ने लगाई RTI...अब होगा पूरा हिसाब!

नई दिल्ली, 03 अक्टूबर। पति पत्नी के बीच रिश्ता को खत्म करने के लिए तलाक प्रक्रिया आसान नहीं होती। खासकर कर तब पत्नी अपने हकों के लिए अड़ जाए। कोर्ट में एक ऐसा ही मामला सामने आया है। तलाक की प्रक्रिया के दौरान अपने बयान का प्रमाण देने के लिए पत्नी ने अब पति की सैलरी के लिए सूचना के अधिकार अधिनियम यानी आरटीआई का प्रयोग किया है।

इनकम पर दावा ठोंकेगी पत्नी

इनकम पर दावा ठोंकेगी पत्नी

कोर्ट में अपने आप में तलाक का ये अनोखा मामला होगा। जिसमें एक पति ने अपनी आय के बारे में जानकारी देने से इनकार कर दिया। जिसके बाद उसकी पत्नी ने आरटीआई अधिनियम का सहारा लेने के लिए मजबूर होना पड़ा। पति की सैलरी की डिटेल कोर्ट के सामने पेश करने और उसमें अपने हक का दावा ठोंकने के लिए पत्नी ने आरटीआई फाइल कर दी है।

फंस रहा कानूनी पेंच

फंस रहा कानूनी पेंच

2014 के एक ऐसे ही मामले में सीआईसी ने कहा था कि एक सार्वजनिक प्राधिकरण आरटीआई अधिनियम के तहत किसी व्यक्ति के वित्त के बारे में उसके पति या पत्नी को भी कोई डिटेल नहीं दे सकता। ये तो वेतन से कटौती और व्यय से संबंधित जानकारी है। जबकि पारदर्शिता कानून के प्रावधानों के तहत प्रकटीकरण के लिए पति या पत्नी का वेतन जानना अनिवार्य है। यह खर्च और अन्य कटौती पर लागू नहीं होता।

पति ने नहीं दी अनुमति

पति ने नहीं दी अनुमति

इस विशेष मामले में अपीलकर्ता संजू गुप्ता ने अपने पति की दो वित्तीय वर्षों की सकल और कर योग्य आय का विवरण हासिल करने के लिए एक आरटीआई का उपयोग किया। दरअसल, इस तरह की डिटेल्स अक्सर गुजारा भत्ता, रखरखाव, आदि तय करने के लिए आवश्यक होते हैं। हालांकि अपीलकर्ता के अनुरोध को आयकर अधिकारी कार्यालय बरेली ने अस्वीकार कर दिया था। कारण था कि पति ने इसके लिए सहमति नहीं दी।

दूसरी बार RTI का प्रयोग

दूसरी बार RTI का प्रयोग

मंजू गुप्ता ने अब केंद्रीय सूचना आयोग के पास दूसरी अपील दायर की है। दरअस, सीआईसी आरटीआई अधिनियम, 2005 के तहत गठित एक निकाय है। जिसका अधिकार क्षेत्र सभी केंद्रीय लोक प्राधिकरणों में फैला हुआ है। आरटीआई अधिनियम के तहत सीआईसी के निर्णय अंतिम होते हैं।

CIC ने दिया निर्देश

CIC ने दिया निर्देश

केंद्रीय सूचना आयोग ने 19 सितंबर मंजू गुप्ता की अपील पर निर्णय दिया है। सीआईसी ने सीपीआईओ को निर्देश दिया कि वह अपीलकर्ता को उसके पति या पत्नी की शुद्ध कर योग्य आय / सार्वजनिक प्राधिकरण के पास उपलब्ध सकल आय का विवरण 15 दिनों की अवधि के भीतर उपलब्ध कराए।

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