मिलिए मोगली गर्ल पार्ट-2 से...यूक्रेन में कुत्तों ने पाला! कच्चा मांस खाकर बचपन गुजारा

आपने टार्जन और मोगली की कहानी तो सुनी ही होगी। जिनका पालन-पोषण जंगलों में इंसानी दुनिया से दूर जंगली जानवरों के बीच हुआ था। हालांकि, ऐसी कहानियां पढ़ने और सुनने में दिलचस्प लगती हैं। लेकिन, वह वास्तविकता से बहुत दूर होती है।

कुछ ऐसा ही मिलता-जुलता मामला यूक्रेन में सामने आया है। जहां यूक्रेनी महिला अक्साना मलाया का दावा है कि उसका बचपन कुत्तों के साथ गुजरा है।

Mowgli Girl Part 2

न्यूयॉर्क पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, उसके जीवन में एक असाधारण मोड़ आया, जब उसके शराबी माता-पिता ने उसे 3 साल की उम्र में ठंड में बाहर छोड़ दिया। गर्मी और आश्रय के लिए बेताब, वह अपने पालतू कुत्ते के साथ केनेल (जहां कुत्तों को रखा जाता है) में चली गई और लगभग पांच साल तक वहां रही।

डॉग के गुणों को अपनाया
इस दौरान, 40 साल की मलाया ने डॉग के गुणों को अपनाया। जिसमें भौंकना, गुर्राना और 4 पैरों पर चलना, चीभ से खुद को चाटकर साफ करना, कच्चा मांस खाना और भोजन के लिए कूड़ेदानों को खंगाला शामिल है। मलाया ने बताया कि मां के बहुत सारे बच्चे थे। हमारे पास पर्याप्त बिस्तर नहीं थे। इसलिए, मैं रेंगकर डॉग के पास गई और उसके साथ रहना शुरू कर दिया। जिंदा रहने के लिए, उसने अपने डॉग के केनेल के अंदर ही अपने लिए एक घर बनाया और अपने बचपन के 5 साल (3 से 9 साल की उम्र तक) वहीं बिताए।

मलाया ने कहा कि मैं उनसे बात करती थी, वे भौंकते थे और मैं इसे दोहराती थी। यह हमारे संचार का तरीका था। वर्तमान में मलाया स्पेशल केयर इंस्टीट्यूट में रहती हैं। यहां के निदेशक अन्ना चालाया ने बताया कि वह एक इंसान के बच्चे की तुलना में एक छोटे डॉग की तरह थी। जब वह पानी देखती थी तो, वह अपनी जीभ दिखाती थी और वह अपने हाथों से नहीं बल्कि अपनी जीभ से खाना खाती थी।

मलाया को 9 साल की उम्र में बचाया गया, जब यूक्रेनी अधिकारियों को उसकी डॉग जैसी स्थिति के बारे में अगाह किया गया। इंसानों की तरह चलना और बातचीत करना सीखने के बावजूद, मलाया ने अभी भी डॉग्स जैसा व्यवहार बरकरार रखा। उसके वयस्क होने पर भी, विशेषज्ञों ने निर्धारित किया कि उसकी मानसिक क्षमता 6 साल के बच्चे जैसी थी।

यूपी के बहराइच में मिली थी पहली मोगली गर्ल
आपको बता दें कि इससे पहले साल 2017 में उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले के कतरनिया घाट के जंगल में मोगली गर्ल को बंदरों के झुंड के साथ देखा था। लोगों ने बच्ची को बंदरों के झुंड से बचाया। उसके बाद बच्ची का लखनऊ की निर्वाण संस्था में 10 महीने इलाज चला था। बच्ची का नाम एहसास है।

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