हावर्ड प्रोफेसर का दावा-2017 में हमारे वायुमंडल में आए थे एलियंस, सिगार जैसी दिखने वाली वस्तु नहीं थी एस्टेरॉय

नई दिल्ली। अक्सर खबरें आती रहती हैं कि, एस्टेरॉयड या उल्कापिंड (Asteroid) धरती की ओर आ रहे हैं या पृथ्वी (Earth) के पास से गजरे हैं। अब इन एस्टेरॉयड या उल्कापिंड को लेकर हार्वर्ड यूनिवर्सिटी (Harvard University) के एक प्रोफेसर बेहद ही चौंकाने वाला दावा किया है। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर (Professor Avi Loeb) का कहना है कि 2017 में दिखा एस्टेरॉयड या उल्कापिंड (Meteors) दरअसल एलियंस (Aliens)की भेजी हुई कोई टेक्नोलॉजी या उनका कचरा (Space Garbage)था।

'हम जिसे एक चमकने वाला पत्थर समझ रहे थे, वह था कचरा'

'हम जिसे एक चमकने वाला पत्थर समझ रहे थे, वह था कचरा'

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोसेफर एवी लोएब ने अपनी किताब एक्स्ट्राटेरेस्ट्रियलः द फर्स्ट साइन ऑफ इंटेलिजेंट लाइफ बेयॉन्ड अर्थ में दावा किया है कि, अंतरिक्ष के इस कचरे ने हमारे सौर मंडल की यात्रा की, जबकि हम उसे एक चमकने वाला पत्थर समझ रहे थे। अंतरिक्ष (Space) से आने वाले चमकदार पत्थर इस बात की ओर इशारा करते हैं कि पृथ्वी से बाहर भी जीवन मौजूद है। पृथ्वी की ओर उल्काओं या क्षुद्रग्रहों का आना सामान्य घटना नहीं है। अंतरिक्ष से आने वाला वह कचरा हैं, जो एलियंस ने हमारे वायुमंडल में फेंका है।

साल 2017 में एलियंस ने अपनी को चीज भेजी थी:प्रोफेसर

साल 2017 में एलियंस ने अपनी को चीज भेजी थी:प्रोफेसर

प्रोफेसर ने दावा किया है कि, साल 2017 में एलियंस ने अपनी को चीज भेजी थी। 6 सितंबर 2017 को एक वस्तु स्टार वेगा से निकला और पृथ्वी के वायुमंडल में आया, फिर 9 सितंबर 2017 को सूर्य के पास चला गया था। वेगा तारा हमारी पृथ्वी से 25 प्रकाशवर्ष की दूरी पर स्थित है। लोएब के मुताबिक यह शुक्र ग्रह के पास से 58900 मील प्रति घंटा की दर से गुजरा था और उसके बाद यह पेगासस नक्षत्र की ओर जाते हुए अंधरे में गायब हो गया। 7 अक्टूबर को यह वापस धरती का चक्कर लगाकर गायब हो गया।

अंतरिक्ष से आई इस वस्तु का नाम है ओउमुआमुआ है

अंतरिक्ष से आई इस वस्तु का नाम है ओउमुआमुआ है

अंतरिक्ष से आई इस वस्तु का नाम है ओउमुआमुआ (Oumuamua) है। यह 300 फीट लंबी सिगार के जैसी दिखने वाली वस्तु है। प्रोफेसर के मुताबिक यह पहला ऐसा स्पेस टूरिस्ट है जो अंतरिक्ष में मौजूद किसी दूसरी दुनिया से आकर हमारे सौरमंडल में चक्कर लगाकर वापस चला गया। प्रोफेसर की बात का समर्थन करते हुए कुछ साइंटिस्टों का मानना है कि इस वस्तु पर हमारे सौर मंडल में आने के बाद सूरज की गुरुत्वाकर्षण शक्ति भी काम नहीं कर पाई।

'चमकता हुए पत्थर साधारण पत्थर से अधिक था'

'चमकता हुए पत्थर साधारण पत्थर से अधिक था'

अवी लोएब (Avi Loeb) कहते हैं कि अगर गुफा में रहने वाले इंसान को सेलफोन दिखा दिया जाए तो वह क्या सोचेगा। मैंने पूरी जिंदगी अंतरिक्ष से आने वाले पत्थरों का अध्ययन किया है, लेकिन इस चमकते हुए पत्थर को देख कर लगता है कि यह साधारण पत्थर से कहीं ज्यादा कुछ और है। लोएब ने यह भी बताया कि खगोलविदों ने यह निष्कर्ष निकाला था कि यह पिंड हर 8 घंटे में सूर्य का प्रकाश प्रतिबिंबित करता है। मतलब वह 8 घंटे में एक चक्कर पूरा कर रहा था।

यह धूमकेतु से मुकाबले रोशनी को 10 गुना ज्यादा रिफ्लेक्ट कर रहा था

यह धूमकेतु से मुकाबले रोशनी को 10 गुना ज्यादा रिफ्लेक्ट कर रहा था

प्रोफेसर के मुताबिक, सबसे खास बात यह थी कि इसे सौरमंडल के बाहर से धक्का मिल रहा था। ओउमुआमुआ समान्य तौर पर दिखने वाले उल्कापिंडों से कहीं अधिक चमकीला था। यह धूमकेतु या क्षुद्रग्रह से मुकाबले सूर्य की रोशनी को 10 गुना ज्यादा रिफ्लेक्ट कर रहा था। ओउमुआमुआअपनी चौड़ाई से दस गुना ज्यादा लंबा है। जियोमेट्री अन्य एस्टेरॉयड्स या उल्कापिंडों से अलग है।

फोटो साभार:Science Photo Library

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+