मशहूर है ब्रिटेन का ब्रेन वेयरहाउस, जहां रखा गया है 10,000 लोगों का दिमाग
डेनमार्क का एक वेयरहाउस ब्रेन वेयरहाउस के नाम से फेमस है। यहां दिमागों को कंटेनर में रखा और संग्रहीत किया गया है।
मानव शरीर का ऐसा कोई भाग नहीं है, जिसपर गहन अध्ययन ना किया जा चुका हो। दिमाग भी उन्हीं भागों में से एक है। इंसान का दिमाग शरीर का वो भाग है, जिससे शरीर का एक-एक हिस्सा संचालित होता है। लेकिन अगर दिमाग ही बीमार हो, तो शरीर भला कैसे स्वस्थ रह सकता है। इसी क्रम में वैज्ञानिकों ने मानसिक बीमारी के इतिहास वाले ऐसे 10000 हजार इंसानी दिमागों को एक यूनिवर्सिटी कैंपस के बेसमेंट में संग्रहीत करके रखा हुआ है। हैरान कर देने वाला ये बेसमेंट कहीं और नहीं बल्कि डेनमार्क में है, जहां इस तरह के बीमार दिमागों को रखा गया है। सबसे बड़ी बात तो ये है कि यहां दिमाग रखने के लिए मृत मरीजों या फिर उनके परिजनों से अनुमति नहीं ली गई। सिर्फ पोस्टमार्टम कर इन मरीजों के शरीर से दिमाग निकालकर यहां ला दिया गया।

लोगों के दिमाग को रखा गया सुरक्षित
डेनमार्क का ये वेयरहाउस ब्रेन वेयरहाउस के नाम से फेमस है। यहां दिमागों को कंटेनर में रखा और संग्रहीत किया जाता है। सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक इस वेयरहाउस में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी बीमारियों जैसे कि सिजोफ्रेनिया और डिप्रेशन के रोगियों के दिमाग को लाया गया था।

नहीं ली गई मरीज की अनुमति
साल 1927 में जन्मे कर्स्टन एडिल्डट्रप नाम के एक मरीज की मेंटल हॉस्टिपल में मौत हो गई थी। इस मरीज की मौत के बाद उसकी सहमति के बगैर ही उसका दिमाग यहां ला दिया गया था। मरीज के परिजनों से भी किसी तरह की कोई सहमति नहीं ली गई।

क्यों रखे गए इतने सारे दिमाग?
उस वक्त मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में समझ काफी सीमित थी। इसलिए दो नए डॉक्टरों एरिक स्ट्रोमग्रेन और लारस एइनर्सन ने बीमार रोगियों के दिमाग को पोस्टमॉर्टम के वक्त निकाल लेने और फिर इन्हें संग्रहीत करने की योजना बनाई। इसके पीछे का कारण भी उन्होंने खुद साफ किया।

1945-1982 में मरने वालों का लाया गया दिमाग
'डेली स्टार' की खबर के मुताबिक, आर्फस विश्वविद्यालय में चिकित्सा विज्ञान के इतिहासकार और अनुसंधान सलाहकार थॉमस एर्सलेव ने अनुमान लगाया कि डेनमार्क में 1945 और 1982 के बीच मरने वाले सभी दिमाग के रोगियों में से लगभग आधे रोगियों का दिमाग यहां लाया गया था। रोगियों या फिर उनके परिवार से इस बारे में कोई अनुमति भी नहीं ली गई।

ब्रेन पैथोलॉजी संस्थान के नाम से हुआ फेमस
धीरे-धीरे ये डिपार्टमेंट बढ़ता गया और फिर इसे ब्रेन पैथोलॉजी संस्थान के तौर पर जाना जाने लगा। ये जेनमार्क के आरहूस में रिसकोव साइकैट्रिक अस्पताल से जुड़ा था। इसके बाद एक नुड एज लोरेंतजेन नाम के पैथोलॉजिस्ट ने इस संस्थान को संभाला।

कुल कितने दिमाग हैं मौजूद?
संस्थान के स्टोर में मौजूद कुल दिमागों की संख्या अब 9,476 है, जो दुनिया में अब तक सबसे बड़ी संख्या है। साल 2018 में इन दिमागों को दूसरी यूनिवर्सिटी में शिफ्ट करना पड़ा और इसका कारण पैसे की कमी था। हर एक दिमाग को अलग से प्रीजर्व किया गया और सारे दिमागों को यूनिवर्सिटी के कैंपस में नए बेसमेंट में ले जाया गया।












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