हथिनी 80 बरस की, चाहिए बर्थ सर्टीफिकेट

वत्सला का जन्म केरल के जंगलों में हुआ था। उसने अपने जीवन के पांच दशक वहीं गुजारे। 1973 में वत्सला मध्यप्रदेश आई थी। उसने लगभग दो दशक होशंगाबाद के जंगलों में बिताए। इसके बाद वह 1993 में पन्ना स्थित राष्ट्रीय उद्यान पहुंची ।
पिछले डेढ़ दशक से पन्ना के राष्ट्रीय उद्यान में चहल कदमी करने वाली जानवरों की इस दादी की काया ढल चुकी है लेकिन उसके पास अपनी उम्र साबित करने के लिए कोई प्रमाण नहीं है।
उल्लेखनीय है कि गिनीज बुक आफ वर्ल्ड रिकार्ड में थाईलैंड की एक हथिनी का नाम दर्ज है जिसकी उम्र 80 वर्ष बताई गई है। वह पांच वर्ष पहले दुनिया छोड़ चुकी है। पन्ना स्थित राष्ट्रीय उद्यान का प्रबंधन वत्सला का नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में दर्ज कराना चाहता है, लेकिन केरल से जन्म प्रमाण पत्र हासिल न हो पाने के कारण ऐसा सम्भव नहीं हो पा रहा है।
राष्ट्रीय उद्यान के निदेशक जी. कृष्णमूर्ति का कहना है कि उन्होंने केरल के वन विभाग से वत्सला का जन्म प्रमाण पत्र हासिल करने के लिए कई बार संपर्क किया है। इसके बावजूद उन्हें वहां से कोई मदद नहीं मिली। उसी का नतीजा है कि वत्सला का नाम गिनीज बुक आफ वर्ल्ड रिकार्ड में दर्ज नहीं हो पाया है।
कृष्णमूर्ति के मुताबिक जानवरों की उम्र तय करने की कोई वैज्ञानिक विधि नहीं है। लिहाजा जन्म प्रमाण पत्र के अभाव में वत्सला की आयु तय नहीं की जा सकती। वह दुनिया की सबसे बुजुर्ग हथिनी है, लेकिन यह प्रमाणित करना मुश्किल हो गया है।
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इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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