चिराग पासवान की वजह से फंसा NDA का ‘गेम’, तेजस्वी यादव के साथ जाएंगे या खेलेंगे पुराना ‘खेल’?
लोकसभा चुनाव होने में अब कुछ ही समय रह गए हैं। भारतीय जनता पार्टी ने बीते शनिवार को उम्मीदवारों की अपनी पहली लिस्ट जारी भी कर दी। मगर इस दौरान बिहार में एक भी सीट पर बीजेपी ने अपने पत्ते नहीं खोले। दरअसल बिहार में एनडीए के अंदर सीट शेयरिंग का कोई फॉर्मूला सेट होता नजर नहीं आ रहा है।
इसकी एक बड़ी वजह चिराग पासवान भी हैं। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान पर अभी भी संशय बरकरार है। वे आगामी लोकसभा चुनाव एनडीए के साथ मिलकर लड़ेंगे या फिर विपक्षी दल के साथ जाएंगे इसका फैसला अभी तक नहीं हो पाया है।

आपको बता दें कि चिराग पासवान ने 2 मार्च को औरंगाबाद और बेगूसराय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनसभा में हिस्सा नहीं लिया था। इसके बाद से सियासी गलियारों में चर्चा तेज हो गई कि क्या चिराग पासवान नाराज हैं और पाला बदलकर महागठबंधन के साथ जाने वाले हैं?
मंगलवार को तेजस्वी यादव के द्वारा इशारों-इशारों में चिराग पासवान को बुलावा भेजा था, जिससे इस चर्चा को और बल मिल गया। हालांकि आज यानी कि 6 मार्च को बेतिया में प्रधानमंत्री की जनसभा होने वाली है जहां पर चिराग पासवान के होने की उम्मीद जताई जा रही है। माना जा रहा है कि यहां पर चिराग पासवान की मौजूदगी/गैरमौजूदगी कई सारे सवालों के जवाब खुद ही दे देगी।
बढ़ी चिराग की नाराजगी
इस बीच ऐसा भी कहा जा रहा है कि एनडीए में नीतीश कुमार की एंट्री से चिराग पासवान नाराज बताए जा रहे हैं। दअसल नीतीश कुमार की एनडीए में वापसी के बाद से गठबंधन का सियासी समीकरण बदल गया है।
नीतीश जब एनडीए में नहीं थे तब चिराग पासवान गठबंधन के दूसरे सबसे ताकतवर पिलर थे। लेकिन अब नीतीश की एनडीए में एंट्री के बाद स्थिति बदल चुकी है। पहले तो ये माना जा रहा था कि चिराग अपनी शर्तों पर बीजेपी से डील करेंगे, लेकिन नीतीश की एंट्री ने खेल खराब कर दिया है।

चिराग की मांग क्या है?
ऐसा कहा जा रहा है कि चिराग पासवान लोकसभा चुनाव 2019 के फार्मूले पर ही इस बार भी 6 सीटों की मांग कर रहे हैं। 5 साल पहले एनडीए में 3 प्रमुख दल थे। इस बार एनडीए में 6 दल हो जाने से चिराग की ये मांग असंभव लग रही है। दिलचस्प बात ये है कि चाचा पशुपति पारस की पार्टी की तरफ से भी 6 सीटों पर दावेदारी की जा रही है।
इतना ही नहीं, चिराग पासवान हाजीपुर सीट को भी लेकर अड़े हुए हैं। चिराग और पशुपति पारस दोनों ने ही इस सीट को अपनी प्रतिष्ठा का विषय बना लिया है। हाजीपुर सीट दिवंगत नेता रामविलास पासवान की परंपरागत सीट रही है। इस बीच पशुपति पारस भी इस सीट से चुनाव लड़ने का मन बना चुके हैं।
जीतन राम मांझी-उपेंद्र कुशवाहा का क्या होगा?
बीजेपी और जदयू ने 2019 में 17-17 सीटों पर चुनाव लड़ा था। इसके अलावा बाकी 6 सीटों पर रामविलास पासवान की पार्टी लोजपा को मिली थी। लेकिन अब लोजपा टूट चुकी है और पशुपति पारस और चिराग पासवान दोनों की अपनी-अपनी डिमांड हैं। दूसरी तरफ जीतनराम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा भी एनडीए में आ चुके हैं। उनकी अपनी अलग मांग है। इससे गठबंधन में सीटों का बंटवारे का फॉर्मूला ही बदल गया है।
विधानसभा की ट्रिक दोहराएंगे चिराग?
अगर चिराग पासवान गठबंधन से अलग हो जाते हैं तो उनके पास महागठबंधन में जाने का विकल्प है। लेकिन अगर वे महागठबंधन में जाने का फैसला नहीं करते हैं तो उनके पास विधानसभा वाला फॉर्मूला अपनाने का ऑपशन भी है।
अकेले लड़ने का भी विकल्प
लोकसभा चुनाव में चिराग पासवान की पार्टी पिछली बार के विधानसभा चुनाव की तरह अकेली उतर सकती है। पुराने फॉर्मूले के तहत चिराग उन सीटों पर उम्मीदवार खड़े कर सकते हैं, जहां बीजेपी नहीं लड़ रही है। यानी कि जहां पर भी जनता दल यूनाइटेड चुनाव लड़ेंगे वहां उन सीटों पर चिराग पासवान अपने उम्मीदवार खड़े कर सकते हैं।
इस फॉर्मूले से पिछली बार चिराग पासवान ने नीतीश कुमार को गंभीर चोट पहुंचाई थी। वो चिराग ही थे जिसकी वजह से नीतीश कुमार की पार्टी विधानसभा में तीसरे नंबर की पार्टी बन गई। इसका नुकसान एनडीए गठबंधन को हो सकता है। यही वजह है कि चिराग पासवान के मान-मनौव्वल की पूरी कोशिशें की जा रही हैं।












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