Bihar Weather News: बाढ़ का गहराया संकट, 49 साल पुराना रिकॉर्ड टूटने की कगार पर, बढ़ रहा गंगा का जलस्तर
Bihar Weather News: बिहार में लगातार हो रही अति भारी बारिश ने बाढ़ का खतरा और गहरा दिया है। गंगा नदी का जलस्तर कई जिलों में खतरे के निशान से ऊपर है और पटना में 1976 का 49 साल पुराना रिकॉर्ड टूटने की कगार पर है। प्रशासन ने कई जिलों में स्कूल बंद करने, राहत कार्य तेज करने और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है।
गंगा का जलस्तर ऐतिहासिक स्तर के करीब: ताजा आंकड़ों के मुताबिक बक्सर, मनेर, दीघा घाट, गांधी घाट, हाथीदह और मुंगेर में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर है।

मनेर: 1976 में दर्ज उच्चतम जलस्तर 53.79 मीटर था, फिलहाल 53.31 मीटर दर्ज-सिर्फ 48 सेंटीमीटर कम।
गांधी घाट: 2016 के रिकॉर्ड से महज़ 49 सेंटीमीटर कम। जलस्तर में तेजी से हो रही वृद्धि यह संकेत देती है कि अगले 24 घंटों में पुराने रिकॉर्ड टूट सकते हैं।
स्कूलों पर भी बाढ़ का असर
खगड़िया: 32 स्कूल 14 अगस्त तक बंद।
वैशाली (राघोपुर): 80 स्कूल बंद।
पटना के दियारा क्षेत्र: सभी स्कूल अगले आदेश तक बंद।
प्रशासन ने कहा है कि निचले इलाकों में रहने वाले लोग सतर्क रहें और किसी भी स्थिति में नाव या असुरक्षित रास्तों का प्रयोग न करें।
आज कहां सबसे ज्यादा बारिश
उत्तर बिहार के लगभग सभी जिलों में मूसलाधार बारिश जारी है।
अति भारी बारिश: अररिया, किशनगंज, पूर्णिया, कटिहार।
भारी बारिश: मधेपुरा, सहरसा, सुपौल, पूर्वी चंपारण, पश्चिम चंपारण, भभुआ, बक्सर।
बाकी जिलों में रुक-रुक कर झमाझम बारिश हो रही है।
मौसम विभाग की चेतावनी: मौसम विभाग ने अगले 48 घंटों तक बिहार में बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना जताई है। इससे गंगा और उसकी सहायक नदियों में जलस्तर और बढ़ सकता है।
बाढ़ और बारिश के बीच चुनौतियां: बिहार में बाढ़ कोई नई आपदा नहीं, लेकिन इस बार चुनौती यह है कि जलस्तर अचानक और ऐतिहासिक स्तर के करीब पहुंच गया है। 1976 के बाद यह पहली बार है जब गंगा का जलस्तर पटना और आसपास के जिलों में इतने खतरनाक स्तर पर पहुंचा है।
शहरी इलाकों में जलभराव से यातायात और जनजीवन प्रभावित हो रही हैं। ग्रामीण और दियारा क्षेत्रों में फसल और मवेशियों को भी भारी नुकसान का खतरा बना हुआ है। शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रहा हैं, सैकड़ों स्कूल बंद किए गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बारिश का यही सिलसिला जारी रहा तो बिहार के कई हिस्सों में राहत और बचाव कार्यों पर दबाव बढ़ जाएगा।












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