Voter Adhikar Yatra: तेजस्वी ने संभाली ‘वोटर अधिकार यात्रा’ की कमान, अचानक राहुल गांधी कहां गए, जानिए

Voter Adhikar Yatra: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले महागठबंधन द्वारा शुरू की गई 'वोटर अधिकार यात्रा' गुरुवार को अपने पाँचवें दिन में शेखपुरा से मुंगेर की ओर बढ़ी। लेकिन आज इस यात्रा में कांग्रेस नेता राहुल गांधी नजर नहीं आए।

राहुल गांधी की अचानक अनुपस्थिति ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी और लोगों के बीच सवाल उठने लगे कि आखिर इतने अहम अभियान से राहुल गांधी क्यों गायब हो गए। दरअसल, राहुल गांधी उपराष्ट्रपति चुनाव से जुड़े कार्यक्रमों में व्यस्त होने की वजह से सुबह की यात्रा में शामिल नहीं हो पाए।

Voter Adhikar Yatra

कांग्रेस नेतृत्व ने साफ किया है कि यह केवल "चुनावी और संवैधानिक व्यस्तता" का मामला है। पार्टी ने यह भी स्पष्ट किया कि राहुल गांधी गुरुवार शाम से यात्रा में दोबारा जुड़ेंगे और मुंगेर में पड़ाव के दौरान कार्यकर्ताओं एवं जनता से सीधा संवाद करेंगे।

इस बीच, यात्रा की कमान राजद नेता तेजस्वी यादव ने संभाली। उन्होंने जनता के बीच जाकर महागठबंधन की नीतियों और चुनावी वादों को रखा। यात्रा के दौरान वितरित किए जा रहे पर्चों में राहुल गांधी, तेजस्वी यादव, भाकपा-माले महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य, वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी और भाकपा महासचिव डी. राजा की तस्वीरें छपी हैं।

पर्चे में चार मुख्य बिंदु, कमाई (बेहतर रोजगार), दवाई (सुदृढ़ स्वास्थ्य सेवाएं), पढ़ाई (गुणवत्तापूर्ण शिक्षा) और सामाजिक न्याय-को गठबंधन की चुनावी रणनीति का आधार बताया गया है। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए कहा, "राहुल गांधी शाम को यात्रा में शामिल हो जाएंगे।

28 अगस्त को समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव भी इस अभियान का हिस्सा बनेंगे, जिससे वोट चोरी के खिलाफ जन आंदोलन को और ताकत मिलेगी।" गौरतलब है कि बुधवार को यात्रा को एक दिन के लिए विराम दिया गया था। ऐसे में गुरुवार को इसके दोबारा शुरू होने के मौके पर राहुल गांधी की अनुपस्थिति स्वाभाविक रूप से सुर्खियों में रही। विपक्षी दल इसे चुनावी ढिलाई करार देकर सवाल उठा सकते हैं।

हालांकि, कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया है कि राहुल गांधी केवल उपराष्ट्रपति चुनाव की व्यस्तताओं की वजह से सुबह यात्रा में शामिल नहीं हो सके। उनकी शाम की मौजूदगी से न सिर्फ कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि जनता को भी यह संदेश जाएगा कि गठबंधन का शीर्ष नेतृत्व एकजुट है और चुनाव को लेकर पूरी तरह गंभीर है। अब सबकी नजरें मुंगेर में होने वाले उनके संबोधन पर टिकी हैं, जो महागठबंधन की चुनावी रणनीति को नया बल दे सकता है।

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