Mukesh Sahani: बिहार चुनाव के 'कुरुक्षेत्र' में खिलाड़ी नहीं, 'खेल' बने सहनी! बार-बार क्यों रद्द हुई PC?
Bihar Chunav 2025: बिहार की राजनीति अक्सर बयानों से नहीं, इशारों और घटनाओं से समझी जाती है। विकासशील इंसान पार्टी (VIP) प्रमुख एवं पूर्व मंत्री मुकेश सहनी की प्रेस वार्ता को लेकर 16 अक्टूबर 2025 को जो घटनाक्रम हुआ, उसने पूरे राजनीतिक माहौल को हिला दिया।
एक ही प्रेस कॉन्फ्रेंस के समय को पहले 12 बजे से बदलकर 4 बजे किया गया, फिर 4 बजे से 6 बजे किया गया और अंत में कार्यक्रम पूरी तरह रद्द कर दिया गया। यह केवल आयोजकीय असमंजस नहीं था, बल्कि बिहार की राजनीति में किसी गहरे 'खेल' का संकेत था।

समय के बदलाव ने बढ़ाए राजनीतिक सवाल
सवाल यह उठने लगा कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि इतनी बार समय बदला गया और फिर प्रेस वार्ता ही टाल दी गई? एक सामान्य प्रेस वार्ता का समय बार-बार बदला जाना असामान्य है। सूचना आई कि "अपरिहार्य कारणों से कार्यक्रम रद्द।" राजनीति में 'टाइमिंग' बहुत मायने रखती है। जब एक नेता का कार्यक्रम तीन बार बदले और चौथी बार रद्द हो जाए, तो यह साफ हो जाता है कि अंदरखाने कुछ ऐसा हुआ है जिसकी जानकारी जनता के सामने आने से रोकी गई।
सहनी के बदले सुर और छिपे संकेत
दिल्ली जाने से पहले मुकेश सहनी ने कहा था कि "महागठबंधन अस्वस्थ है।" लेकिन दिल्ली से लौटते ही बयान बदल गया, "महागठबंधन स्वस्थ है।" यह अचानक बदलाव दर्शाता है कि दिल्ली में कुछ राजनीतिक बातचीत हुई थी। संभवतः प्रेस वार्ता में वे उस बातचीत का नतीजा सार्वजनिक करने वाले थे। लेकिन जैसे-जैसे समय बदलता रहा, यह स्पष्ट हुआ कि उनकी लाइन तय नहीं हो पा रही थी या किसी "ऊपरी दबाव" ने उन्हें बोलने से रोक दिया।
प्रेस वार्ता सिर्फ कार्यक्रम नहीं, राजनीतिक 'स्टैंड' थी
इस प्रेस वार्ता को लेकर पार्टी के प्रवक्ता ने लगातार निमंत्रण भेजे और अपडेट दिए। इसका मतलब था कि यह औपचारिक नहीं, बल्कि बेहद महत्वपूर्ण राजनीतिक घोषणा होने वाली थी। हो सकता है सहनी सीट बंटवारे पर अपनी शर्तें रखने वाले थे, गठबंधन को चेतावनी देने वाले थे या किसी नए मोर्चे का संकेत देने वाले थे। लेकिन ठीक समय से पहले कार्यक्रम रद्द होना बताता है कि कोई बड़ी ताकत नहीं चाहती थी कि सहनी उस समय बोलें। यह परिस्थिति दर्शाती है कि सहनी पर नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश की गई।
VIP की स्थिति और घटती राजनीतिक ताकत
मुकेश सहनी हमेशा खुद को किंगमेकर की भूमिका में रखते रहे हैं। 2020 में NDA में शामिल होकर मंत्री बने, फिर BJP से टकराकर बाहर हुए, उसके बाद महागठबंधन में शामिल होकर अपनी राजनीतिक जमीन बचाने की कोशिश की। हर चुनाव से पहले वे मोलभाव की राजनीति करते रहे। लेकिन हाल के वर्षों में उनकी पार्टी की सीटें और प्रभाव कम हुए हैं, जिससे उनकी 'बचाव क्षमता' भी कमजोर हो गई है। यही कारण है कि इस बार वे खुद राजनीतिक दबाव में नजर आए और प्रेस वार्ता भी उनके हाथ से निकल गई।
क्या सहनी के साथ 'खेल' खेला गया?
बिहार की राजनीति में यह चर्चा आम हो गई कि इस बार सहनी अपनी राजनीतिक चाल नहीं चल पाए, बल्कि उन पर चाल चली गई। ऐसा लगता है कि या तो गठबंधन के भीतर किसी ने उन्हें रोक दिया, या किसी बड़े नेता ने हस्तक्षेप कर उनका कार्यक्रम टलवा दिया। यह भी संभव है कि बातचीत आखिरी समय पर बिगड़ गई और सहनी को मजबूरी में प्रेस वार्ता रद्द करनी पड़ी। यह पहली बार नहीं कि राजनीति में किसी नेता की आवाज दबाई गई हो, लेकिन इस बार तरीका बहुत खुला और सार्वजनिक था।
आने वाले दिन होंगे निर्णायक
अब बड़ा सवाल यह है कि मुकेश सहनी इस घटना के बाद क्या रुख अपनाएंगे। क्या वे चुप रहकर नया मौका तलाशेंगे? क्या अचानक किसी नई प्रेस कॉन्फ्रेंस में धमाका करेंगे? या फिर तीसरे मोर्चे का रास्ता अपनाएंगे? उनके राजनीतिक इतिहास को देखें तो वे लंबे समय तक चुप नहीं बैठते। लेकिन इस बार स्थिति अलग है-क्योंकि पहली बार उन्हें बोलने ही नहीं दिया गया।
इस बार खिलाड़ी नहीं, 'शिकार' बन गए सहनी
जो नेता दूसरों पर दबाव बनाते थे, जो कहते थे "महागठबंधन अस्वस्थ," फिर कहते थे "महागठबंधन स्वस्थ," अब लग रहा है कि उनकी अपनी राजनीतिक स्थिति अस्वस्थ कर दी गई है। प्रेस वार्ता का रद्द होना केवल एक कार्यक्रम का रद्द होना नहीं था, यह संकेत था कि अब सहनी की राजनीतिक आज़ादी सीमित की जा रही है। बिहार की 2025 की राजनीति का बड़ा खेल शुरू हो चुका है-और इस बार खिलाड़ी वही है जो सामने दिखाई नहीं दे रहा।
कई सवाल लेकिन जवाब नहीं
सबसे बड़ा सवाल यह नहीं कि मुकेश सहनी क्या बोलना चाहते थे...
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या उन्हें बोलने दिया भी जाएगा?
अगर अगली प्रेस वार्ता बिना रुकावट के होती है तो सच सामने आएगा, लेकिन अगर फिर टल गई, तो समझ लीजिए, इस बार खेल VIP के नहीं, VIP नेता के खिलाफ खेला जा चुका है।












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