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Vehicles On Loan:'फ़ाइनेंस कंपनी की मनमानी नहीं चलेगी' किस्त पर आप ने भी लिया है वाहन? ज़रूर पढ़ें ये ख़बर

Vehicles Loan News: किस्त पर वाहन लेना बहुत ही आसान लगता है, लेकिन वक्त पर भुगतान नहीं करने पर आपकी परेशानियां बढ़ने लगती है। अब किस्त फेल होने पर आपको फ़ाइनेंस कंपनियों की प्रताड़ना नहीं झेलनी पड़ेगी।

Vehicles on Loan These Important Points you Must Read Before Finance Vehicle Check Here

Loan के ज़रिए लोगों की राहें आसान ज़रूर हुईं हैं, लेकिन किस्त फेल होने पर मुश्किलें बढ़ने भी लगती हैं। पटना हाइकोर्ट का आम लोगों के हक में एक फैसला आया है। पहले आप लोन पर वाहन खरीदते थे, और किस्त फेल हो जाने पर बैंक और प्राइवेट फाइनेंस कंपनियों द्वारा प्रताड़ित किया जाता था।

बैंक और फाइनेंस कंपनिया द्वारा एजेंट को भेजकर बीच रास्ते से गाड़ी उठा ली जाती थी, अब कंपनियां ऐसा नहीं कर सकेंगी। अगर कंपनियों ने ऐसा किया तो आप इसके खिलाफ मामला भी दर्ज करवा सकेंगे। फाइनेंस कंपनियों की रिकवरी टीम अगर ऐसा करती है, तो इसे हाइकोर्ट के आदेश के खिलाफ माना जाएगा।

फाइनेंस कंपनियों की मनमानी अब नहीं चलने वाली है, क्योंकि जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद की सिंगल बेंच ने 19 मई को धनंजय सेठ बनाम भारत सरकार और अन्य संलग्न याचिकाओं के खिलाफ अपना आदेश जारी किया है। दरअसल फाइनेंस कंपनियों के खिलाफ उनके पास 2020 में एक मामला आया था।

लीगल मामलों के जानकारों ने बताया कि बैंक या फाइनेंस कंपनी किसी भी आधार पर वाहन कि रिकवरी के लिए ग्राहक को प्रताड़ित नहीं कर सकती है। गाड़ियों की रिकवरी टीम या फिर दबंगों के सहारे जबरदस्ती गाड़ी नहीं उठवाई जा सकती है। अगर पहले भी इस तरह की कार्रवाई को अंजाम दिया गया तो तो सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट के आदेश की अवमानना मानते हुए फाइनेंसर्स के खिलाफ मुकदमा दर्ज हो सकता है।

गौरतलब है कि आदेश में यह साफ कहा गया है कि लोन पर ली गई गाड़ी को जब्त की गई है, तो उस तारीख से लेकर जब्ती अवधी तक फाइनेंस कंपनिया किसी तरह का सूद और ब्याज नहीं वसूल सकती है। इतना ही नहीं कोरोना काल में जारी आदेशों के खिलाफ भी कोई क़दम नहीं उठा सकती है।

पटना हाई कोर्ट के आदेश में साफ किया गया है कि जबरदस्ती गाड़ी उठाने वाले के खिलाफ गाड़ी कानून मुकदमा दर्ज करवा सकता है। हाई कोर्ट के आदेश की बिहार सरकार, DGP और प्रदेश के सभी ज़िलों के SSP और SP को भेजने की बात भी कही गई है।

लीगल मामले के जानकार बताते हैं कि ऐसे मामले में बैंक और फाइनेंस कंपनियों को SURFACIA ACT के तहत कार्रवाई करनी होगी। सरफेसी अधिनियम (SURFACIA ACT) के तहत फाइनेंसर को यह अधिकार होता है कि कोर्ट के बिना हस्तक्षेप के क्रेडिट डिफॉल्टर्स की प्रॉपर्टी नीलाम कर सकते हैं।

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