बाबा राम रहीम को सजा से बिहार के गांव में 2000 परिवारों पर संकट, जानिए वजह?

भागलपुर के घरों में चूल्हा क्यों नहीं जला? हम आपको बताते दें कि यह सभी लोग बाबा की भक्ति के कारण भूखे नहीं सोए बल्कि अपनी रोजी-रोटी की चिंता ने इन्हें भूखा सुला दिया।

पटना। धर्म का चोला पहनकर महिलाओं और लड़कियों से दुष्कर्म जैसी घिनौनी घटना को अंजाम देने वाले डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को सजा सुनाए जाने के बाद बिहार के एक गांव में इसका असर देखने को मिला, जहां 2000 घरों में चूल्हे नहीं जले। यह सभी लोग बाबा की भक्ति के कारण भूखे नहीं सोए बल्कि अपनी रोजी-रोटी की चिंता ने इन्हें भूखा सुला दिया। कोर्ट के द्वारा सजा सुनाए जाने के बाद हरियाणा स्थित डेरा की संपत्ति सीज किए जाने का आदेश जारी कर दिया गया जिसमें बिहार के भागलपुर के लगभग 2000 लोग नौकरी कर रहे थे। ये सभी भागलपुर के नाथनगर प्रखंड के गोसाईंदासपुर गांव के रहने वाले थे और सभी डेरा के सिरसा व हिसार स्थित बाबा के आश्रम में नौकरी करते थे। जैसे ही उनके परिजनों ने बाबा की सजा और संपत्ति सीज होने की बात सुनी उन्हें आगे की चिंता सताने लगी जिसके वजह से किसी ने की रात का खाना नहीं खाया।

एक युवक की नौकरी ने दिलाया 2000 घरों को आसरा

एक युवक की नौकरी ने दिलाया 2000 घरों को आसरा

भागलपुर के गोसाईंदासपुर गांव के रहने वाले मलय पासवान आज से कई वर्ष पहले गरीबी से परेशान होकर हरियाणा चला गया जहां मजदूरी कर अपना जीवन यापन करने लगा। इसी दौरान उसकी मुलाकात डेरा के लोगों से हुई और सत्संग सुनने के लिए बाबा राम रहीम के आश्रम में जाने लगा। देखते ही देखते उसकी नजदीकियां बढ़ीं और वह हरियाणा के हिसार स्थित आश्रम में ही नौकरी करने लगा। उस वक्त उसे 8000 रुपया वेतन के साथ खाना-पीना और रहने की सुविधा मिलती थी। नौकरी मिलने के बाद वह गांव आया और गांव से भी धीरे-धीरे लोगों को हरियाणा ले जाना शुरू किया। फिर गांव के सभी लोग राम रहीम के संपर्क में आए तथा उनके भक्त हो गए।

भक्ति के साथ मिला रोजगार

भक्ति के साथ मिला रोजगार

उनकी भक्ति के साथ-साथ उनके यहां नौकरी कर यह पूरा गांव अपना और अपने परिवार का पेट पाल रहा था। गोसाईंदासपुर के लोग सिरसा व हिसार स्थित आश्रम में खेती-बाड़ी का काम करते थे। काम के साथ-साथ सभी बाबा राम रहीम का भक्त पूरा गांव हो गया और उन्हीं के कहने पर इस गांव के लोगों ने दारू और मांस दोनों छोड़ दिए लेकिन कल जब कोर्ट के द्वारा उन्हें सजा सुनाई गई तो बिहार के भागलपुर में दुख की लहर दौड़ गई और परिजनों को अपने बेटे की चिंता सताने लगी।

बाबा को सजा से पूरा गांव परेशान

बाबा को सजा से पूरा गांव परेशान

आपको बताते चलें कि जब गोसाईंदासपुर के यादव टोला गांव के रहने वाले डोमी यादव की पत्नी उर्मिला देवी से बातचीत की गई तो उन्होंने कहा कि हमारा बेटा विनोद 5 वर्षों से हरियाणा में बाबा राम रहीम के यहां नौकरी कर रहा था। वह वहां उनकी गायों का सेवा करता था लेकिन कोर्ट के द्वारा बाबा की सारी संपत्ति सीज करने का आदेश जारी किया गया है, अब ऐसे में हमारे परिवार का क्या होगा? हम लोगों के परिवार पर आने वाली आर्थिक संकट की परेशानी हमें सताने लगी है तो दूसरी तरफ उससे बातचीत नहीं होने के कारण हमारा मन और भी परेशान हो रहा है। सजा सुनाए जाने से पहले उससे हमारी बात हुई थी तो वह काफी परेशान दिख रहा था। यह समस्या सिर्फ हमारी ही नहीं बल्कि हमारे गांव के अधिकतर परिवार का है।

गांववालों को समझाने में लगे बाबा के भक्त

गांववालों को समझाने में लगे बाबा के भक्त

लोग अपने बच्चों की चिंता में ना तो ठीक से खा-पी पा रहे हैं और ना ही सो पा रहे हैं। भागलपुर गांव में बाबा राम रहीम के उपदेशों को सुनाकर भक्तों का नेतृत्व करने वाला मंटू का कहना है कि हमारे बाबा निर्दोष हैं, उन्हें बहुत जल्द सभी आरोपों से मुक्ति मिल जाएगी और हम बहुत जल्द हरियाणा जा रहे हैं, वहां अपने गांव के रहने वाले लोगों को समझाएंगे। कई लोगों का कहना है कि जैसे ही बाबा पर कानून का शिकंजा कसना शुरू हुआ कुछ लोग वहां से अपने गांव आने के लिए निकले लेकिन अब तक वह घर नहीं पहुंचे हैं, जिस कारण चिंता और भी बढ़ गई है।

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