तीसरे चरण की आंखों-देखी: जोश तो ठीक है लेकिन दुआ करें कि मतदान बाद कोरोना का कहर न टूटे

तीसरे चरण की आंखों-देखी: जोश तो ठीक है लेकिन दुआ करें कि मतदान बाद कोरोना का कहर न टूटे

तीसरे चरण के मतदान में जोश दिखा। वोटरों की लंबी लाइन देख कर राजनीतिक दल और हाकिम लोग खुश हैं। जोश-वोश तो ठीक है लेकिन दुआ करें कि वोटरों पर कोरोना का कहर न टूटे। ऐसी रेलमरेल के बीच भगवान भरोसे वोटिंग। मतदान केन्दों पर जो नजारा दिखा वो बहुत डराने वाला था। लोकतंत्र की दुहाई देने वाले को क्या इन दृश्यों को देख कर कुछ विचलित हुए ? भीड़ ना जुटे इसलिए सारे त्योहार बेरौनक गुजर गये। लेकिन लोकतंत्र के त्योहार में भीड़ जुटी और किसी को कई एतराज भी न हुआ। चुनाव आयोग ने हर बूथ पर गोले घेरे में सामाजिक दूरी बना कर वोटरों के खड़ा होने की बात कही थी। शहरी और सड़क के किनारे वाले बूथों पर तो ऐसा इंतजाम दिखा लेकिन दूर-दराज के गांवों में नियम-कानून ताक पर रख दिये गये।

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    वाह भीड़ या आह भीड़ !

    वाह भीड़ या आह भीड़ !

    बूथ नम्बर 71, कपरौल, सीतामढ़ी। सुबह के साढ़े बजे हैं। हल्का कुहासा है। थोड़ी ठंड भी है। लोग चादर-शॉल ओढ़े मतदान केन्द्र के बाह खड़े हैं। स्कूल का कैंपस छोटा है फिर भी पांच बूथ बने हुए हैं। सुबह से लोगों के आने का सिल सिलसिला शुरू हुआ तो पांच लाइनें बन गयीं। ग्रामीण क्षेत्र के इस बूथ में कहीं कोई गोल घेरा नहीं दिखा। इतनी भीड़ के लिए गोल घेरा बनाना आसान भी न था। लोग ऐसे खड़े थे जैसे ये जानते ही न हों कि कोरोना किस बला का नाम है। मजे से एक दूसरे से सट कर अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। सर्दी है इसलिए किसी को कोई एतराज भी नही। सुरक्षा में तैनात जवान सब देख कर भी बेपरवाह है। अधिकतर लोगों ने मास्क नहीं पहना हुआ है। कुछ ने गमछे को मुंह में लपेट रखा है। हां, कुछ फिक्रमंद ऐसे भी दिखे जिन्होंने मास्क पहनने की जहमत उठायी है। सोशल डिस्टेंसिंग की ऐसी की तैसी। सबको वोट देने की जल्दी है। खतरों के इन खिलाड़ी को देख कर नेता और अफसर लोग खुश हैं। चलो, बम्पर वोटिंग हो रही है।

    नियम बताया तो मारपीट पर उतारू

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    पूर्णिया का धमदाहा विधानसभा क्षेत्र। अलीनगर बूथ नम्बर 282 पर बवाल। अचानक बूथ पर बहुत भीड़ जुट गयी। ज्यादा भीड़ होने से कुछ लोग लाइन में इधर-उधर करने लगे। कुछ लोगों ने कतार तोड़ने की कोशिश की। बूथ पर सीआरपीएफ के पांच जवान तैनात थे। नियम के पाबंद जवानों ने वोटरों को सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने को कहा। कुछ लोगों को ये सलाह रास नहीं आयी और वे जवानों से ही भिड़ गये। अफरा-तफऱी मच गयी। जवानों ने हथियार निकाल कर हवाई फायरिंग की तब जा कर बेकाबू लोग वहां से हटे। ये तो हद हो गयी। अगर वोट आपका है तो जान भी आपकी ही है। कोरोना दिखायी नहीं देने वाला दुश्मन है। इस दुश्मन से होशियार रहने की सलाह क्यों बुरी लग गयी पता नहीं ? क्या खुद की जान के लिए किसी दूसरे को फिक्रमंद होना पड़ेगा ?

    न अपनी चिंता न बच्चे की चिंता

    न अपनी चिंता न बच्चे की चिंता

    इस बार महिलाएं बढ़-चढ़ कर वोटिंग में हिस्सा ले रही हैं। पूर्णिया का कसबा विधानसभा क्षेत्र। एक बूथ पर महिलाओं की लंबी कतार। कुछ की गोद में बच्चे भी हैं। सब एक दूसरे को छूती हुई खड़ी हैं। न खुद मास्क पहना है न बच्चे को पहनाया है। कभी कभार पल्लू से मुंह ढकने की कोशिश करती हैं। अपना और अपने बच्चे की जान को जोखिम में डाल कर इस तरह वोट देने का जज्बा ही कुछ और है। मधेपुरा के पुरैनी हाईस्कूल के बूथ का यही हाल है। सामाजिक दूरी का नामोनिशान नहीं है। पूर्णिया के कमरगामा बूथ का हाल तो और भी डराने वाला। स्कूल के औसत कैंपस में करीब पांच लाइनें लगीं है। ठसाठस भीड़। लोग ऐसे खड़े जैसे वे दशहरा का मेला देखने निकले हों। अररिया के नरपतगंज बूथ पर महिलाओं की लंबी कतार तो दिखी लेकिन गिनती की महिलाओं ने ही मास्क पहन रखा था। क्या ऐसे वोटरों के लिए दुआ की जरूरत नहीं ? चुनाव आयोग ने तो इनकी फिक्र नहीं की अब ईश्वर ही इनकी फिक्र करें।

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