Bihar Chunav: ‘रोजगार योजना’ बनी सियासत का केंद्र,टूट रही है आचार संहिता की मर्यादा? RJD ने की आयोग से शिकायत
Bihar Chunav 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 अब अपने निर्णायक दौर में पहुंच चुका है। जैसे-जैसे मतदान की तारीख नजदीक आ रही है, राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। एक ओर जहां महागठबंधन और एनडीए दोनों अपने घोषणा पत्र और वादों के जरिए जनता को लुभाने की कोशिश में हैं, वहीं अब एक सरकारी योजना को लेकर सियासी बवाल मच गया है।
राजद की शिकायत: 'आचार संहिता का उल्लंघन'
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना को लेकर चुनाव आयोग में औपचारिक शिकायत दर्ज करवाई है। पार्टी का आरोप है कि आचार संहिता लागू होने के बाद भी सरकार ने इस योजना के तहत महिलाओं के खातों में पैसे ट्रांसफर किए हैं, जो सीधे तौर पर चुनावी लाभ हासिल करने की कोशिश है।

राजद की ओर से दायर पत्र में कहा गया है कि 17, 24 और 31 अक्टूबर को महिलाओं को ₹10,000 की पहली किस्त दी गई, जबकि दूसरी किस्त 3 नवंबर को ट्रांसफर की जाएगी, जो कि दूसरे चरण की वोटिंग से सिर्फ तीन दिन पहले की तारीख है।
मनोज झा बोले- 'यह लोकतंत्र के लिए खतरा'
राजद प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद मनोज झा ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि "6 अक्टूबर से मॉडल आचार संहिता लागू हो चुकी है, ऐसे में किसी भी सरकारी योजना के तहत लाभ बांटना कानूनन गलत है। यह कदम वोटरों को प्रभावित करने की कोशिश है और इससे चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं।"
राजद प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद मनोज झा ने चुनाव आयोग से मांग की कि इस योजना पर तुरंत रोक लगाई जाए और मुख्यमंत्री समेत संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।
राज्य सरकार का पक्ष और राजनीतिक निहितार्थ
हालांकि सरकार की ओर से अभी इस पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन सत्ता पक्ष का तर्क है कि मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना एक पूर्व-स्वीकृत कार्यक्रम है, जिसका बजट विधानसभा से पहले ही पारित हो चुका था। ऐसे में इसे चुनावी लाभ का साधन बताना राजनीतिक आरोप है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह योजना ग्रामीण इलाकों की महिलाओं को सीधे आर्थिक राहत देने का काम करती है, और चुनाव से पहले ऐसी योजनाओं का असर वोटिंग पैटर्न पर पड़ सकता है, खासकर उन वर्गों में जो महिला मतदाताओं की बड़ी संख्या बनाते हैं।
दो चरणों में होगा मतदान, 14 नवंबर को आएंगे नतीजे
बिहार में इस बार विधानसभा चुनाव दो चरणों में संपन्न होंगे - पहला चरण 6 नवंबर को और दूसरा चरण 9 नवंबर को। नतीजे 14 नवंबर को घोषित किए जाएंगे। इस बीच, महिला रोजगार योजना को लेकर छिड़े इस नए विवाद ने चुनावी माहौल को और गर्म कर दिया है। अब देखना होगा कि चुनाव आयोग इस मामले में क्या रुख अपनाता है, क्या योजना पर रोक लगेगी या सरकार अपने फैसले पर कायम रहेगी।
चुनावी समीकरणों में 'महिला मत' का बढ़ता महत्व
राजद की यह शिकायत केवल एक प्रशासनिक मुद्दा नहीं, बल्कि एक रणनीतिक कदम भी माना जा रहा है। बिहार में महिला मतदाताओं की संख्या पुरुषों के बराबर है और पिछले चुनावों में उन्होंने निर्णायक भूमिका निभाई थी। ऐसे में "महिला रोजगार योजना" को लेकर उठे विवाद का सीधा असर चुनावी परिणामों पर पड़ सकता है। यही कारण है कि अब यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से भी अत्यंत संवेदनशील हो गया है।












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