Motivational Story: बिहार के युवाओं के लिए प्रेरणा बने हैं संदीप, हर दिन बहा रहे हैं घंटों पसीना

Motivational Story: संदीप कुमार, आज केवल एक नाम भर नहीं रह गया है। वह अपनी लगन और मेहनत से बिहार के युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुका है। प्रो कबड्डी में पटना पाइराइट्स का संदीप कुमार हर दिन कम से कम छह घंटे तक पसीना बहाता है। निम्न आर्थिक आय वर्ग परिवार से संबंध रखने के बावजूद संदीप ने घर की माली हालत को कभी भी अपने तयशुदा लक्ष्य के बीच आड़े नहीं आने दिया।

बिहार का मिथिला क्षेत्र खेल से अधिक पढ़ाई के क्षेत्र में आगे रहा है। कई प्रशासनिक अधिकारी इस क्षेत्र से देश में अपना नाम कमा चुका है। उसी मिथिला परिक्षेत्र के समस्तीपुर जिला के विद्यापति नगर के चम्था गांव से संदीप का संबंध है। संदीप के पिता ऑटो चलाते हैं। गांव और आसपास के शहर में रोजगार नहीं मिला तो पलायन का दंश संदीप के परिवार को भी झेलना पड़ा।

bihar success story of Sandeep kumar become an inspiration for the youth

पिता ने भले ही ऑटो चलाया, लेकिन अपने बेटे के मंजिल के लिए हरसंभव रास्ता तैयार किया। अब संदीप अपने परिवार के साथ ही पूरे जिला और बिहार का नाम रोशन कर रहा है। प्रो कबड्डी में पटना पाइराइट्स से जुड़ने के बाद संदीप कबड्डी के मैदान में रेडर की भूमिका निभाता है। अपने खेल को बारीकी देने के उद्देश्य से संदीप ने अपने जिले से निकलकर पाटलीपुत्रा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में चलने वाले एकेडमी में प्रशिक्षण लिया था। उपलब्धियों की बात करें, तो वह जूनियर नेशनल चैंपियनशिप, जूनियर फेडरेशन कप के अलावा लगातार तीन वर्षों से युवा कबड्डी सीरीज में बिहार का प्रतिनिधित्व करते आ रहे हैं। बता दें कि युवा कबड्डी में अंडर-22 के प्लेयर्स को खेलने का मौका मिलता है।

एक सवाल के जवाब में संदीप कुमार ने बताया कि जब सातवीं कक्षा में था तब मैंने कबड्डी खेलना शुरू किया। हम एक स्टेडियम में क्रिकेट खेलने गए। वहां मुझे एक कबडडी का मैदान दिखा. इसलिए, मैंने अपने दोस्तों से कहा कि चलो कबड्डी खेलते हैं। मेरा भाई भी हमारे साथ कबडडी खेलने लगा।

धीरे-धीरे बाकी सब चले गए, लेकिन मेरी रुचि कबड्डी में थी। मैंने खेलना जारी रखा। मेरे परिवार ने मेरे कबड्डी करियर का समर्थन करना बंद कर दिया क्योंकि वे चाहते थे कि मैं पढ़ूं और नौकरी करूं। मेरे परिवार ने सोचा कि कबड्डी मुझे कहीं नहीं ले जाएगी और मैं घायल हो जाऊंगा।

हमारी आर्थिक स्थिति इतनी अच्छी नहीं थी। इसलिए, मेरे परिवार ने मेरा समर्थन नहीं किया, लेकिन मैंने कबड्डी खेलना जारी रखा। फिर, मुझे जूनियर नेशनल के लिए चुना गया और इसके बाद, मैंने जूनियर फेडरेशन कप के साथ-साथ वाईकेएस में भी खेला। इसके बाद, पटना पाइरेट्स ने मुझे पीकेएल नीलामी में साइन किया और मैं अब यहां खेल रहा हूं।

परिवार को लेकर बात आगे हुई तो संदीप कुमार ने बताया कि स्थानीय कबड्डी टूर्नामेंट में खेलता और अगर मैं वहां जीत जाता तो मुझे इनाम मिलता, जिसका इस्तेमाल करके मैंने अपनी डाइट पूरी की। यदि मैं नहीं जीता तो मैं उचित आहार के बिना ही रहा। मुझे टूर्नामेंट खेलने के लिए पैसे मांगने पड़ते थे, लेकिन कई बार वे मना भी कर देते थे। वे कहते थे कि कबड्डी में मेरा भविष्य उज्ज्वल नहीं है और मैं हर बार हार जाता हूं। सफर ऐसे ही चलता रहा। जीवन के कई वर्षों के उतार-चढ़ाव के बाद आज पटना पाइराइट्स का हिस्सा हूं।

सचिन तंवर आपकी टीम के सीनियर रेडर हैं। क्या आपकी उनसे कोई बातचीत हुई है? उनसे कितना साथ मिलता है ? जवाब में संदीप का कहना है कि सचिन भाईसाहब बहुत अच्छे रेडर हैं। वह मुझसे सिर्फ इतना कहता है कि मैं चीता हूं और मुझे कोई नहीं पकड़ सकता। वह मुझसे अपना स्वाभाविक खेल खेलने के लिए कहते हैं और मैच के दौरान भी वह अपनी अंतर्दृष्टि साझा करते हैं। मैं वास्तव में उनकी कंपनी का आनंद लेता हूं।

पटना पाइरेट्स ने पहले 2 मैच जीते लेकिन फिर अगले 3 गेम हार गए। क्या गलत हो गया? संदीप का कहना है कि शुरुआत में, हमने विपक्षी टीमों को तब ऑल-आउट किया जब वे दो या तीन खिलाड़ियों से कम थीं। लेकिन, हाल ही में, जब ऑल-आउट संभव हो तो हम रेडर्स को टच पॉइंट दे रहे हैं। तो, यही वह चीज़ है जो मैं महसूस करता हूँ। यदि हम उस पर नियंत्रण कर सकें तो हम बेहतर कर सकते हैं।

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