IPS डॉ. एहतिशाम वकारिब ने सर सैयद अहमद खान की शिक्षा को लेकर नज़रिया पर की चर्चा, कही ये बात
Sir Syed Ahmed Khan: सर सैयद अहमद खान की शिक्षा और उनके योगदान पर आधारित फातिमा एजुकेशन सोसाइटी ने (फातिमा गर्ल्स हाई स्कूल, पुरैनी, भागलपुर) एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया। इस कार्यक्रम में उनके शिक्षा, मिशन, दृष्टिकोण और आधुनिक भारत में उनकी प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला गया।
डॉ. एहतिशाम वकारिब, आईपीएस (पुलिस अधीक्षक, जामतारा) ने सर सैयद की शैक्षिक क्रांति पर ज़ोर दिया। वहीं उन्होंने बताया कि कैसे उनकी दृष्टि ने वंचित वर्गों को आधुनिक शिक्षा से सशक्त किया। डॉ. वकारिब ने यह भी रेखांकित किया कि आज की युवा पीढ़ी के लिए धार्मिक और आधुनिक शिक्षा के बीच संतुलन बनाए रखना कितना महत्वपूर्ण है।

शिक्षा के सशक्तिकरण के महत्व पर जोर दिया और कहा कि आधुनिक शिक्षा पर सर सैयद की शिक्षाए आज के तकनीकी युग में भी उतनी ही प्रासंगिक हैं। वहीं शशांक भूषण, आईईएस ( निदेशक, केंद्रीय जल आयोग) ने भी सामाजिक सुधारक के रूप में सर सैयद की भूमिका पर चर्चा की।
शशांक भूषण ने कहा कि सर सैयद की शिक्षा केवल शैक्षिक सुधार तक सीमित नहीं थीं, बल्कि उन्होंने सामुदायिक एकता और तार्किक सोच को भी बढ़ावा दिया। कुलश्रेष्ठ ने कहा कि सर सैयद का दृष्टिकोण आज भी नीति निर्माताओं और समाज में प्रगति की दिशा में प्रेरणा का स्रोत है।
सैयद के सामाजिक न्याय और एकता के दृष्टिकोण पर विचार साझा किए और बताया कि उनके द्वारा सुझाए गए सहिष्णुता और समावेशिता के सिद्धांत आज भी सरकार और समाज में महत्वपूर्ण हैं। आपको बता दें कि भागलपुर के प्रतिष्ठित उद्यमी और शिक्षाविद में शुमार शिबली मंज़ूर द्वारा कार्यक्रम का आयोजन किया किया गया।
शिबली मंज़ूर ने कहा कि सर सैयद अहमद खान का शिक्षा के प्रति जो दृष्टिकोण था, वह न केवल उस समय की आवश्यकता थी, बल्कि आज भी उसका महत्व कम नहीं हुआ है। उन्होंने हमें सिखाया कि ज्ञान केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज की उन्नति का सबसे बड़ा साधन है।
शिबली मंज़ूर ने शिक्षा के क्षेत्र में प्रगति को समाज की प्रगति से जोड़ते हुए सर सैयद के आदर्शों पर चलने का आह्वान किया। उन्होंने सर सैयद के आदर्शों को सामाजिक प्रगति का आधार बताते हुए उनके योगदान की महत्ता को रेखांकित किया।












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