Sanjay Saraogi Education: कितने पढ़े-लिखे हैं बिहार बीजेपी के नए अध्यक्ष? संजय सरावगी के पास हैं कितनी डिग्री?
Sanjay Saraogi Education: बिहार की सियासत में चहल पहल तेज है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने एक ऐसा रणनीतिक और सुविचारित फैसला लिया है जिसने राज्य की राजनीतिक फिजां में गरमाहट ला दी है। दशकों के अनुभव, संगठन के प्रति समर्पण और ज़मीनी पकड़ का ईनाम देते हुए, दरभंगा शहरी से लगातार चार बार जीत दर्ज कर रहे अनुभवी विधायक, संजय सरावगी को बिहार भाजपा की कमान सौंपी गई है।
15 दिसंबर को हुई यह घोषणा पार्टी के अंदर एक नई ऊर्जा का संचार कर रही है। साथ ही यह भी स्पष्ट संकेत दे रही है कि आगामी चुनावों के लिए बीजेपी की रणनीति अब अनुभव, सामाजिक संतुलन और संगठनात्मक मज़बूती के तीन स्तंभों पर टिकी होगी। संजय सरावगी अब बिहार बीजेपी के नए अध्यक्ष बन गए हैं।

एक साफ़-सुथरी छवि और वैश्य समाज में गहरी पैठ रखने वाले संजय सरावगी अब राज्य में पार्टी के सबसे अहम और निर्णायक चेहरे के तौर पर उभरते दिख रहे हैं। उनकी यह ताजपोशी बिहार की राजनीति को किस ओर मोड़ती है, और संगठन को कैसे नई दिशा देती है, यह जानना अब सबसे महत्वपूर्ण है।
कौन हैं संजय सरावगी (Who is Sanjay Saraogi)
संजय सरावगी का जन्म वर्ष 1969 में हुआ था। वे शुरू से ही भारतीय जनता पार्टी से जुड़े रहे हैं। जमीनी राजनीति से आगे बढ़ते हुए उन्होंने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का भरोसा हासिल किया। उन्होंने पहली बार फरवरी 2005 में दरभंगा विधानसभा सीट से चुनाव जीता। उसी साल अक्टूबर में हुए दोबारा चुनाव में भी उन्होंने जीत दर्ज की और अपनी राजनीतिक स्थिति को और मजबूत किया।
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कितने पढ़े लिखे हैं संजय सरावगी? (Sanjay Saraogi Education)
चुनावी हलफनामे के अनुसार संजय सरावगी पोस्ट ग्रेजुएट हैं। उन्होंने 1993 में एलएन मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा से एमबीए किया। 1991 में उसी विश्वविद्यालय से एमकॉम की डिग्री ली। 1989 में बीकॉम की पढ़ाई पूरी की।
लगातार चुनावी जीत से बना कद
साल 2010 के विधानसभा चुनाव में संजय सरावगी ने आरजेडी उम्मीदवार को करीब 26 हजार वोटों से हराया। यह जीत उनके राजनीतिक करियर का बड़ा मोड़ मानी जाती है। 2015 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने महागठबंधन के उम्मीदवार और पूर्व मेयर ओम प्रकाश खेरिया को लगभग 7 हजार वोटों से मात दी। इसके बाद 2020 के चुनाव में भी उन्होंने आरजेडी के अमरनाथ गामी को 10 हजार से अधिक वोटों से हराकर एक बार फिर अपनी मजबूत पकड़ साबित की।
क्यों खास है संजय सरावगी की ताजपोशी
संजय सरावगी लंबे समय से भाजपा संगठन और चुनावी राजनीति से जुड़े रहे हैं। पार्टी के भीतर उन्हें एक अनुभवी और भरोसेमंद नेता माना जाता है। यही वजह है कि पिछली एनडीए सरकार में मंत्री होने के बावजूद उन्हें हाल के समय में मंत्रालय में शामिल नहीं किया गया, ताकि संगठन में बड़ी भूमिका निभा सकें। पार्टी सूत्रों के अनुसार, बिहार में आगामी चुनावी तैयारियों और संगठन को मजबूत करने के लिए संजय सरावगी को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है।
वैश्य समाज में मजबूत पकड़
संजय सरावगी की पहचान बिहार में वैश्य समाज के एक प्रमुख नेता के रूप में है। दरभंगा शहरी विधानसभा सीट पर उनकी पकड़ बेहद मजबूत मानी जाती है। भाजपा के भीतर भी उन्हें वैश्य समाज का प्रभावशाली चेहरा माना जाता है। ऐसे में उनका प्रदेश अध्यक्ष बनना सामाजिक संतुलन और चुनावी रणनीति दोनों के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
नितिन नबीन की नई भूमिका
यह बदलाव ऐसे समय हुआ है जब भाजपा ने नितिन नबीन को राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी है। माना जा रहा है कि इन दोनों नियुक्तियों से बिहार भाजपा संगठन में नई ऊर्जा आएगी और कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ेगा।
संगठन में निभाई अहम जिम्मेदारियां
संजय सरावगी केवल चुनाव जीतने तक सीमित नहीं रहे, बल्कि संगठन के भीतर भी उनकी भूमिका अहम रही है। अप्रैल 2018 में उन्हें विधानसभा की प्राक्कलन समिति का अध्यक्ष बनाया गया था। इस पद पर रहते हुए उन्होंने सदन में सक्रिय भूमिका निभाई और सरकार व संगठन के बीच बेहतर तालमेल बनाया।
कितनी है संजय सरावगी की संपत्ति
चुनावी हलफनामों के अनुसार संजय सरावगी की कुल संपत्ति करीब 7 करोड़ रुपये है।
- उन पर लगभग 88 लाख रुपये का लोन है।
- उनके पास करीब एक लाख रुपये नकद हैं।
- बैंक खातों में लगभग 33 लाख रुपये जमा हैं।
इसके अलावा उनके नाम पर करीब 2 करोड़ रुपये की नॉन एग्रीकल्चर जमीन भी है।
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