रोहतासः परिजनों ने छुपाई कोरोना रिपोर्ट और श्राद्ध में खाने पहुंचे गांव के 600 लोग
रोहतास। बिहार के रोहतास जिले के नोखा ब्लॉक के भरावन गांव में एक हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है, जहां कोरोना संक्रमित महिला की मौत के श्राद्ध कार्यक्रम में 600 लोगों ने भोज किया। द प्रिंट के मुताबिक बीते सोमवार को उर्मिला देवी नाम की बुजुर्ग महिला की मौत के बाद घरवालों ने भोज का कार्यक्रम रखा था, जिसमें 600 लोगों ने खाना खाया। मृतक उर्मिला देवी के छोटे बेटे ने कहा कि कोरोना का पता चलने पर सामाजिक दूरियां बढ़ जाती हैं। द प्रिंट से बात करते हुए छोटे बेटे शंकर को यह विश्वास था कि इस आयोजन में अधिक संख्या में लोग नहीं आएंगे।

उर्मिला देवी के परिवार ने उनकी बीमारी को गुप्त रखने की पूरी कोशिश की थी। उनके सबसे छोटे बेटे 59 वर्षीय अमरेंद्र सिंह ने कहा, "जब मेरी मां में खांसी, सीने में दर्द और बुखार जैसे लक्षण दिखाई दिए तो मैं चिंतित हो गया।" रोहतास जिले के नोखा प्रखंड के बारांव गांव की रहने वाली उर्मिला देवी ने 18 दिनों तक इस वायरस के खिलाफ लड़ाई लड़ी। परिवार ने स्वीकार किया कि उन्होंने उसके लिए एक कोविड टेस्टिंग में देरी की क्योंकि उन्हें डर था कि अगर रिपोर्ट पॉजिटिव आई तो बीमार मां को आइसोलेट करना पड़ेगा और वह उनकी देखभाल भी नहीं कर पाएंगे। साथ ही उन्हें इस बात का भी डर था कि मित्रों और पड़ोसियों की प्रतिक्रिया और संभावित सामाजिक बहिष्कार हो जाएगा।
किसी को नहीं बताई रिपोर्ट
यहां तक कि जब टेस्ट के बाद कोरोना की रिपोर्ट पॉजिटिव आई तो भी उन्होंने किसी को नहीं बताया। न ही वे उर्मिला देवी को अस्पताल ले गए। गांव के रहने वाले अजय कुमार ने दि प्रिंट को बताया, "आजकल अगर कोई बीमार पड़ जाता है, तो लोग तुरंत उसे कोविड समझते हैं। इसलिए वे उस व्यक्ति के घर जाने से बचते हैं। और उनमें (उर्मिला देवी) बीमारी के सभी लक्षण थे।
अंतिम भोज में खर्च किये दो लाख रुपये
21 मई को उनके अंतिम संस्कार में एक दर्जन करीबी रिश्तेदार शामिल हुए थे। लेकिन गांव वालों ने कहा कि कोविड से पहले के दिनों में भी सामान्य प्रथा थी। भोज पूरी तरह से एक दूसरा मामला है। इसमें आमतौर पर पूरा गांव शामिल होता है। उर्मिला देवी के परिवार के सदस्यों और पड़ोसियों ने कहा कि उनके भोज के लिए 600 उपस्थित लोग भी एक मामूली संख्या थी। पूर्व-कोविड समय में, 1,000 से अधिक मेहमान होते। उर्मिला देवी की मौत के 13 दिन बाद सोमवार को परिवार ने भोज में शामिल हुए पड़ोसियों और रिश्तेदारों को खाना खिलाने में करीब 2 लाख रुपये खर्च किए। जबकि उर्मिला देवी के इलाज पर केवल 12,000 रुपये खर्च किए थे।
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