Bihar Politics: नीतीश को भी था महागठबंधन से नाता टूटने का अफसोस, NDA में क्यों असहज थे मुख्यमंत्री ?
बिहार में नीतीश कुमार की जदयू एनडीए गठबंधन का हिस्सा थी, उस वक़्त मंत्रिमंडल के विस्तार में जदयू के मुताबिक सीटों का बंटवारा नहीं हुआ। उस बात से भी नीतीश कुमार नाराज़ थे।
पटना, 10 अगस्त 2022। बिहार में नीतीश कुमार ने एनडीए से नाता तोड़कर फिर महागठबंधन से हाथ मिला लिया है। नीतीश कुमार ने कल तेजस्वी यादव से मुलाक़ात की इस दौरान उन्होंने महागठबंधन से नाता टूटने पर अफसोस ज़ाहिर किया। कुछ परिस्थितियों की वजह से गठबंधन से रिश्ता टूट गया। लेकिन अब फिर नीतीश कुमार महागठबंधन के साथ हैं। बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व में ही महागठबंधन की सरकार चलने जा रही है। प्रदेश में यह सियासी तूफान क्यों आया, आखिर क्या वजह हो गई की नीतीश कुमार मुख्यमंत्री होते हुए भी एनडीए में ख़ुद को असहज महसूस कर रहे थे। सियासी गलियारों में यह चर्चा का विषय बना हुआ है। आईए विस्तार से जानते हैं कि क्यों एनडीए गठबंधन से नाता तोड़कर नीतीश कुमार ने भाजपा को झटका दिया।

जदयू एनडीए गठबंधन का हिस्सा थी
बिहार में नीतीश कुमार की जदयू एनडीए गठबंधन का हिस्सा थी, उस वक़्त मंत्रिमंडल के विस्तार में जदयू के मुताबिक सीटों का बंटवारा नहीं हुआ। उस बात से भी नीतीश कुमार नाराज़ थे। वहीं मुख्यमंत्री होने के बावजूद प्रदेश के हक़ के लिए नीतीश कुमार स्वतंत्र फ़ैसला नहीं ले पाते थे। कई मुद्दों पर नीतीश कुमार के नहीं चाहते हुए भी भाजपा अपने मुताबिक चीज़ों को लागू करना चाहती थी। इस वजह से अकसर भाजपा औऱ जदयू नेताओं के बीच ज़ुबानी जंग होता रहता था।

NDA गठबंधन में मुख्यमंत्री होते हुए भी नीतीश असहज
एनडीए गठबंधन में मुख्यमंत्री होते हुए भी नीतीश कुमार के असहज होने की एक वजह सांसदों की तादाद ज़्यादा होने के बाद भी जदयू नेताओं को मंत्री पद कम मिलना था। नीतीश कुमार चाहते थे कि केंद्रीय मंत्रिमंडल में उनके सांसदों को समान अनुपात में प्रतिनिधित्व मिले लेकिन वैसा नहीं हुआ। नीतीश कुमार चाहते थे कि बिहार भाजपा से जितने केंद्र में मत्री बने, उतने मंत्री जदयू से भी बनाया जाए। 2019 के बाद NDA सरकार में जदयू को सिर्फ एक मंत्री पद दिया गया। वहीं नीतीश कुमार की विजय कुमार सिन्हा से हुए तकरार से भी नाखुश थे।

भाजपा नेताओं ने साधा था JDU निशाना
अग्निपथ योजना के बाद संजय जायसवाल ने जनता दल यूनाइटेड पर निशाना साधते हुए कहा था कि सिर्फ भाजपा को निशाना बनाया जा रहा है। अगर इसे जल्द नहीं रोका गया तो किसी के लिए भी ठीक नहीं होगा। संजय जायसवाल के इस बयान के बाद जदयू और भाजपा नेता आमने-सामने आ गए। जिस वजह से भाजपा और जदयू में दूरियां बढ़ती चली गई। वहीं भाजपा-जदयू के बीच पॉलिसी को लेकर भी मतभेद रहा। भाजपा की कुछ पॉलिसी से जदयू को एतराज़ था। वन नेशन वन इलेक्शन जैसी पॉलिसी थी। अग्निपथ योजना पर भी बिहार में बवाल पर नीतीश कुमार ने चुप्पी साध ली थी

नीतीश ने दिया भाजपा को झटा
बिहार में भाजपा कोटे से मंत्री नीतीश कुमार को तरजीह ही नहीं देते थे। प्रदेश के मुखिया को मंत्री तरजीह नहीं देंगे तो वह खुद को असहज महसूस करेगा ही। वहीं जब मंत्रिमंडल में किसी मंत्री को शामिल किया जाता था तो नीतीश कुमार की राय नहीं पूछी जाती थी। अमित शाह बिना नीतीश कुमार से राय लिए ही अपने पसंदीदा लोगों मंत्रिमंडल में शामिल कर देते थे। एक शब्दों में कहा जाए तो नीतीश कुमार मुख्यमंत्री तो थे लेकिन प्रदेश का कंट्रोल भाजपा के हाथों में जिसकी वजह से वह स्वतंत्र फ़ैसला नहीं ले पा रहे थे। इन्हीं सब कारणों से वह खुद को असहज महसूस कर रहे थे। नतीजा यह हुआ कि उन्होंने एनडीए गठबंधन से अलविदा कह दिया।
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