यहां बन रहा दुनिया का सबसे पहला रामायण महाविद्यालय, जानिए खास बातें

इस महाविद्यालय में चार विषयों की पढ़ाई कराई जाएगी। पांच साल का एक बैच चलेगा। वैशाली जिले में 25 एकड़ की जमीन पर यह महाविद्यालय बनाया जा रहा है।

पटना। देवों की धरती कहे जाने वाले बिहार के वैशाली जिले में दुनिया का सबसे पहला और अनोखा रामायण विश्वविद्यालय की स्थापना की जा रही है। इस विश्वविद्यालय में रामायण, कर्मकांड , प्रवचन के साथ साथ आयुर्वेद की पढ़ाई कराई जाएगी। इसे पटना की हनुमान मंदिर न्यास समिति संचालित करेगी। न्यास समिति का कहना है कि इस विश्वविद्यालय में मूलभूत सुविधाओं के साथ-साथ शिक्षा और रिसर्च की सुविधा दी जाएगी जो किसी अन्य आधुनिक विश्वविद्यालय से कहीं अलग होगा।

यहां बन रहा दुनिया का सबसे पहला रामायण महाविद्यालय,खास बातें

आइए जानते हैं इस विश्वविद्यालय के बारे में कुछ खास बातें
सबसे पहले आपको बताते चलें कि दुनिया का सबसे पहला रामायण महाविद्यालय बिहार के वैशाली जिले ने बनाया जा रहा है। इसे पूरा करने के लिए वैशाली जिले के कोनहरा घाट के पास 25 एकड़ जमीन ली गई है। इसे बनाने का काम जोर-शोर पर चल रहा है। अभी इस विश्वविद्यालय के 56 कमरे तैयार हो चुके हैं जिसमें अलग-अलग पढ़ाई होगी। इस विश्वविद्यालय में कर्मकांड पर विशेष जोर दिया जाएगा।

यहां बन रहा दुनिया का सबसे पहला रामायण महाविद्यालय,खास बातें

रामायण विश्वविद्यालय बनाने वाले समिति के सचिव आचार्य किशोर कुणाल से जब इस विश्वविद्यालय के बारे में बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि इस विश्वविद्यालय में 4 विषयों की पढ़ाई होगी। इसमें कर्मकांड, वाल्मीकि रामायण, प्रवचन और आयुर्वेद शामिल है। साथ ही यहां वाल्मीकि रामायण, रामचरितमानस, वेद-उपनिषद और महाभास के साथ-साथ खगोल भौतिकी और खगोल विद्या की भी पढ़ाई होगी। इन सभी विषयों की पढ़ाई के लिए 5 साल का एक बैच चलाया जाएगा।

समिति के सचिव किशोर कुणाल ने बताया इस विश्वविद्यालय में संस्कृत, हिंदी और स्थानीय भाषाओं के साथ-साथ दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों की भाषाओं में रामायण का संग्रह, संरक्षण व प्रचार-प्रसार कराया जाएगा। वाल्मीकि रचित रामायण की पढ़ाई यहां का मूल आधार होगा तो रामायण के आधार पर रचित अन्य साहित्यिक कृतियों का भी पढ़ाई कराया जाएगा। इस पाठ्यक्रम में अध्यात्म, आनंद, कालिदास कृत 'रघुवंश' को भी शामिल किया जाएगा । पर कर्मकांड की पढ़ाई पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। क्योंकि न्यास समिति के सचिव आचार्य किशोर कुणाल का कहना है कि कर्मकांड हमारे जीवन का एक महत्वपूर्ण अंग है और उसको बढ़ावा देना हमारा सबसे पहला कर्तव्य है।तो वैदिक ज्ञान हमारी धरोहर हैं। पटना स्थित हनुमान मंदिर हमेशा से ही कर्मकांड को बढ़ावा देने की कोशिश करती आ रही है। इसी के लिए महाविद्यालय खोला जा रहा है जिसमें हमेशा प्रयास किया जाएगा कि यहां वैदिक नियमों के अनुसार लोगों को कर्मकांड प्रवचन और आयुर्वेद की शिक्षा दी जाए।

आपको बताते चलें कि बिहार के वैशाली जिले में खुलने वाला दुनिया का पहला रामायण महाविद्यालय एक निजी विश्वविद्यालय होगा जहां इसी साल से ही पढ़ाई की शुरुआत की जाएगी। पर जब आचार्य कुणाल से पूछा गया कि कैसे कोई धार्मिक संस्था निजी विश्वविद्यालय खोल सकती है? तो उन्होंने बताया कि अधिनियम के अंतर्गत कोई भी धार्मिक संस्था निजी विश्वविद्यालय नहीं खोल सकती है। लेकिन महावीर मंदिर न्यास समिति के द्वारा शिक्षा विभाग से अधिनियम में संशोधन करने का आग्रह किया गया है। राज्य सरकार जल्द ही शिक्षा विभाग के अधिनियम का संशोधन कर देगी क्योंकि शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव ने विचार करने और संशोधन करने का आश्वासन दिया है। अब जैसे ही शिक्षा विभाग के द्वारा आदेश मिलेगा विश्वविद्यालय में पढ़ाई की शुरुआत कर दी जाएगी।

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