40% हिंदू, 20% मुसलमान साथ आगए तो—प्रशांत किशोर ने बताया कैसे जीतेंगे बिहार चुनाव? महागठबंधन की बढ़ी मुश्किलें

Bihar Election 2025 (Prashant Kishor): बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले जन सुराज पार्टी के संस्थापक और चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर (PK) ने अपने राजनीतिक पत्ते खोल दिए हैं। उन्होंने साफ कहा है कि अगर हिंदू और मुस्लिम समाज एकजुट हो जाएं, तो उनकी पार्टी न सिर्फ बिहार में नीतीश कुमार और बीजेपी को मात देगी, बल्कि दो साल बाद उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ को भी हराना संभव होगा।

मोतिहारी में आयोजित 'मुस्लिम एकता सम्मेलन' में प्रशांत किशोर ने कहा-"आज मैं अपने मुस्लिम भाइयों को आमंत्रित करने आया हूं। अगर मुसलमान हमारा साथ देते हैं तो हम बिहार में नीतीश और बीजेपी को ही नहीं, बल्कि यूपी में योगी आदित्यनाथ को भी हरा देंगे।" उन्होंने आगे कहा, ''अगर 40% हिंदू और 20% मुसलमान साथ आ जाएं तो जन सुराज की जीत तय है।'' उन्होंने आगे कहा कि जन सुराज हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक है।

Bihar Election 2025 Prashant Kishor

प्रशांत किशोर बोले- 'नीतीश कुमार बूढ़े हो चुके हैं'

प्रशांत किशोर ने नीतीश कुमार पर भी सीधा निशाना साधा। उन्होंने कहा, "नीतीश कुमार बूढ़े हो चुके हैं, अब बिहार को उनके आगे देखना होगा।" एक समय था जब PK नीतीश कुमार के सबसे भरोसेमंद रणनीतिकार माने जाते थे और 2015 में उनकी वापसी की स्क्रिप्ट लिखी थी। लेकिन अब वही प्रशांत किशो, जन सुराज पार्टी के जरिए नीतीश और बीजेपी दोनों को चुनौती दे रहे हैं।

बिहार चुनाव के लिए जन सुराज की रणनीति

प्रशांत किशोर 'बिहार बदलाव यात्रा' के जरिए जनता से सीधा जुड़ाव बना रहे हैं। उनकी रणनीति है-ग्रासरूट मोबिलाइजेशन यानी गांव-गांव जाकर लोगों को जोड़ना। हिंदू-मुस्लिम एकता को आधार बनाना ताकि बीजेपी के हिंदुत्व एजेंडे को काटा जा सके और महागठबंधन के मुस्लिम वोटबैंक को तोड़ा जा सके।

बिहार में जनता के बीच सीधी पैठ बनाकर खुद को तीसरे विकल्प के रूप में स्थापित करना।फिलहाल बिहार की राजनीति में एक तरफ है एनडीए (भाजपा + जेडीयू), और दूसरी तरफ महागठबंधन (राजद + कांग्रेस + लेफ्ट)। ऐसे में पीके की पार्टी 'जन सुराज' खुद को तीसरे मोर्चे के रूप में पेश कर रही है।

बिहार मुस्लिम वोटबैंक: क्या प्रशांत किशोर बढ़ाएंगे महागठबंधन की मुश्किलें?

प्रशांत किशोर ने बड़ा दांव खेला है। पीके का फॉर्मूला सीधा है-"हमें मुसलमानों के वोट नहीं, उनका साथ चाहिए। अगर 40% हिंदू और 20% मुसलमान एक साथ आएं तो जन सुराज की जीत तय है।" उन्होंने मुस्लिम समाज के पारंपरिक नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा समुदाय को ठगा है। यही नहीं, पीके पहले ही मुस्लिम आबादी के अनुपात में टिकट देने का वादा कर चुके हैं।

बिहार के मुस्लिम इस बार किसका देंगे साथ?

बिहार की राजनीति में करीब 18% मुस्लिम मतदाता अहम भूमिका निभाते हैं। राज्य की 243 सीटों में से लगभग 50 सीटों पर मुस्लिम वोट निर्णायक होते हैं। 2020 में 19 मुस्लिम विधायक जीते थे, जबकि 2015 में यह संख्या 24 थी। पारंपरिक तौर पर मुस्लिम वोटर RJD-कांग्रेस-लेफ्ट गठबंधन के साथ जाते रहे हैं। यही कारण है कि इस बार भी वोटों के बिखराव की संभावना कम मानी जा रही है।

हालांकि AIMIM प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी और अब प्रशांत किशोर इस वोट बैंक पर खास फोकस कर रहे हैं। उधर जेडीयू और चिराग पासवान जैसे NDA के सहयोगी भी मुस्लिम समर्थन पाने की कोशिश में हैं, लेकिन बीजेपी से गठबंधन के चलते उन्हें विरोध का सामना करना पड़ रहा है।

फिलहाल मुस्लिम समुदाय खामोशी अख्तियार किए हुए है। यह चुप्पी महागठबंधन और NDA दोनों को बेचैन कर रही है। विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस-आरजेडी-लेफ्ट का गठबंधन मुस्लिम वोटरों के लिए अब भी पहली पसंद है, लेकिन प्रशांत किशोर और ओवैसी के दांव महागठबंधन की मुश्किलें बढ़ा सकते हैं।

ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रशांत किशोर मुस्लिमों का भरोसा जीत पाएंगे, या फिर मुस्लिम वोट महागठबंधन के पास ही मजबूती से टिके रहेंगे।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+