Bihar Politics: 3 बड़ी मांगों पर Prashant Kishor का सियासी तेवर, Patna में लाठीचार्ज, FIR दर्ज
Prashant Kishor, Bihar Politics: बिहार में विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी पारा चढ़ा हुआ है। वहीं जन सुराज ने बुधवार को बिहार की राजनीति में बड़ा सियासी संदेश दे दिया। प्रशांत किशोर की अगुवाई में हजारों कार्यकर्ताओं ने राजधानी पटना में विधानसभा का घेराव करने की कोशिश की। जनता से जुड़े तीन अहम मुद्दों को लेकर हुए इस आंदोलन में एक करोड़ से अधिक हस्ताक्षर जुटाए गए थे।
शांतिपूर्ण ढंग से निकले इस मार्च को पटेल गोलंबर पर पुलिस ने रोकने की कोशिश की और हालात इतने बिगड़े कि लाठीचार्ज तक करना पड़ा। प्रशांत किशोर ने मौके से सरकार को सीधे ललकारते हुए कहा, "इन बच्चों पर लाठी क्यों चलाई? दम है तो मुझे मारो!" इस पूरे घटनाक्रम ने बिहार की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है तो वहीं अब खबर आ रही है कि बिहार विधानसभा का घेराव करने के मामले में प्रशांत किशोर समेत जन सुराज पार्टी के कई नेताओं पर FIR दर्ज हुई है।
आइए जानते हैं पूरा मामला...

आंदोलन की पृष्ठभूमि
जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर पहले ही एलान कर चुके थे कि 23 जुलाई को विधानसभा का घेराव किया जाएगा। यह आंदोलन तीन मांगों को लेकर था, जिन पर बिहार सरकार की चुप्पी को लेकर जन सुराज लगातार सवाल उठा रहा है।
प्रशांत किशोर दोपहर 12 बजे बेली रोड स्थित शेखपुरा हाउस से हजारों समर्थकों के साथ विधानसभा की ओर रवाना हुए। एयरपोर्ट रोड होते हुए जब यह जुलूस पटेल गोलंबर पहुंचा, तो वहां पुलिस ने बैरिकेड लगाकर उन्हें रोकने की कोशिश की।
पुलिस से टकराव, लाठीचार्ज और घायल समर्थक
जन सुराज कार्यकर्ताओं ने पहला बैरिकेड तोड़ते हुए आगे बढ़ने की कोशिश की। जब पुलिस ने दोबारा रोका, तो प्रशांत किशोर खुद सड़क पर बैठ गए और हजारों कार्यकर्ता वहीं धरने पर बैठ गए। इस दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज किया, जिसमें कई कार्यकर्ता घायल हो गए। कुछ के सिर फूटे, कई लोग धक्का-मुक्की में घायल हुए।
इस पर प्रशांत किशोर ने मौके पर ही प्रशासन को ललकारते हुए कहा: "बच्चों पर लाठी क्यों चलाई? हिम्मत है तो मुझपर चलाइए। फिर देखिए, बिहार भर में सरकार का निकलना मुश्किल कर देंगे।"
तीन मांगें जो आंदोलन की वजह बनीं
जन सुराज का कहना है कि उन्होंने बिहार की जनता से जुड़े तीन बेहद अहम मुद्दों को लेकर सरकार को जगाने की कोशिश की है। इन मांगों को लेकर उन्होंने एक करोड़ लोगों के हस्ताक्षर भी जुटाए हैं। ये तीन मांगें हैं:
94 लाख गरीब परिवारों को 2 लाख रुपये की सहायता कब मिलेगी, जैसा कि जातीय गणना 2023 के बाद सरकार ने वादा किया था?
50 लाख भूमिहीन दलित और अतिपिछड़ा परिवारों को 3 डिसमिल ज़मीन कब मिलेगी?
भूमि सर्वेक्षण के नाम पर वंशावली, दाखिल-खारिज और रसीद प्रक्रिया में हो रही लूट पर रोक कब लगेगी?
मुख्य सचिव से मुलाकात, ज्ञापन सौंपा गया
पटना प्रशासन की पहल पर जन सुराज के प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती के नेतृत्व में 6 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को मुख्य सचिव से मुलाकात के लिए ले जाया गया। प्रतिनिधिमंडल ने तीनों मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा और जल्द कार्रवाई की मांग की।
मुख्य सचिव ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि तीनों मांगों पर शीघ्र निर्णय लिया जाएगा। इसके बाद प्रशांत किशोर के नेतृत्व में आंदोलनकारी शांतिपूर्ण ढंग से लौट गए।
क्या आगे और बड़ा होगा आंदोलन?
प्रशांत किशोर ने चेतावनी दी कि यदि मुख्य सचिव लिखित रूप से जवाब नहीं देते या सरकार कोई ठोस कदम नहीं उठाती, तो अगला घेराव मुख्यमंत्री आवास का होगा - "एक लाख आदमी लाकर नीतीश कुमार का घर घेर लेंगे, निकलना मुश्किल हो जाएगा।"
मुख्य सचिव से मिलने गए जन सुराज के 6 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती, एनपी मंडल, किशोर कुमार, अरविंद सिंह, ललन यादव और जितेंद्र मिश्रा शामिल रहे। जन सुराज का यह प्रदर्शन भले ही आज शांतिपूर्ण रूप से समाप्त हुआ हो, लेकिन इसके सियासी निहितार्थ गहरे हैं। जनता के मुद्दों पर बने इस दबाव ने सरकार को चौकन्ना कर दिया है।












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