Bihar News: CM नीतीश कुमार से कार्यकाल से जनता ख़ुश या नाराज़, जानिए ग्राउंड पर क्या बोली पब्लिक
Bihar News: बिहार में आगामी चुनाव को लेकर सियासी पारा चढ़ा हुआ है। मतदाताओं को लुभाने के लिए राजनीतिक पार्टियां रणनीति बनाने में जुटीं हुईं हैं। वहीं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी चुनाव मौसम में ताबड़तोड़ फ़ैसले लेकर सियासी माइलेज लेने की तैयारी कर रहे हैं। इसी क्रम में वन इंडिया की टीम पटना ज़िले में ग्राउंड रिपोर्ट लेने पहुंची। जनता से सीएम नीतीश कुमार के कार्यकाल और फ़ैसले पर अपनी राय जानी।
वन इंडिया हिंदी से बातचीत में लोगों ने कहा कि सीएम नीतीश कुमार ने इतनी बार पलटी मारी है कि अब उन पर भरोसा करना मुश्किल है। कुर्सी की लालच में वह कभी भी पलटी मार सकते हैं। इसलिए ही उन्हें लोगों ने पलटू कुमार की संज्ञा दे दी है।

सीएम नीतीश कुमार की इस बार की पलटी, ना उनके लिए शुभ है, ना ही प्रदेश और ना राजनीति के लिए शुभ है। इस बार की पलटी नीतीश कुमार को भारी पड़ने वाली है। कुछ दिनों से यह प्रतीत होता है कि नीतीश कुमार मेंटली डेड हो चुके हैं। विधानसभा में अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करते हैं।
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राजनीति में आरोप प्रत्यारोप लगते हैं, लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि किसी को तू तड़ाक कर के जवाब दिया जाए। सीएम नीतीश कुमार की गतिविधि डिस्टर्ब लोगों की तरह होने लगी है। उनकी दिमाग़ी हालत ठीक नहीं है, उन्हें राजनीति से संन्यास ले लेना चाहिए।
जातीय आरक्षण करवाने के बाद नीतीश सरकार पीठ थपथपा रही है कि ऐतिहासिक काम किया है। ऐतिहासिक काम ये हुआ कि हिंदू समुदाय को जातियों में बांट कर वोट बैंक की सियासत शुरू हो गई। इसी का नतीजा है, हिंदुओं के पर्व पर छुट्टियां रद्द कर दी गईं और मुसलमानों के पर्व पर छुट्टियां बढ़ा दी गईं।
सीएम नीतीश कुमार भी भाजपा की तरह ही लोगों को धर्म और जात के नाम पर बांटना चाहते हैं। नीतीश सरकार के पास मैनेजमेंट के नाम पर कुछ है ही नहीं, पिछले कुछ सालों में सीएम नीतीश कुमार की ज़ेहनी हालत बिगड़ गई है। पढ़े लिखे होने के बाद भी अनपढ़ों जैसी हरकतें करने लगे हैं।
सीएम नीतीश कुमार मेंटली डेड हो चुके हैं, इनकी कोई पॉलिसी नहीं है। विधानसभा में ऐसी बेशर्मी वाली बात कही, जिसे दोहराना भी नहीं चाहते हैं। उनकी तरह ब्रांडेड बेशर्म इंसान आज तक नहीं देखा है, जिन्हें यह तक ढंग नहीं है कि महिलाओं के सामने किस तरह से बात की जाए। ग्राउंड पर जनता की प्रतिक्रिया यही रही कि ओवर ऑल बिहार के लोग नीतीश कुमार का नेतृत्व स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं।












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