Bihar Pension Scheme: बिहार में पेंशन की राशि ढाई गुना बढ़ी, 1.11 करोड़ लोगों को हर महीने मिलेंगे 1100 रुपये
Bihar Pension Scheme: पटना के पास बख्तियारपुर की रहने वाली 68 वर्षीय रामवती देवी की आंखें खुशी से भर आती हैं जब वो कहती हैं, अब हर महीने घर में 1100 रुपये आएंगे तो बेटे से पैसे मांगने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। मैं अपनी दवा खुद खरीदूंगी।
रामवती देवी उन करोड़ों लोगों में से एक हैं जिन्हें बिहार सरकार की सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के तहत अब हर महीने 400 रुपये की जगह 1100 रुपये की पेंशन मिलनी शुरू हो गई है। यह बदलाव ना सिर्फ़ एक वित्तीय घोषणा है, बल्कि लाखों बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगजनों के आत्मसम्मान की वापसी की कहानी भी है।

"पेंशन अब मदद नहीं, सम्मान है"
एक करोड़ 11 लाख से भी अधिक लोगों को इस योजना के तहत अब 1100 रुपये मिल रहे हैं। यह राशि कई परिवारों के लिए मामूली लग सकती है, लेकिन जिनके पास और कोई सहारा नहीं, उनके लिए यह ज़िंदगी की डोर है।
मधुबनी के एक छोटे गांव के दिव्यांग छात्र मनोज कहते हैं, "पहले 400 रुपये में व्हीलचेयर की मरम्मत या स्टेशनरी का खर्च निकालना मुश्किल था। अब मैं कम से कम मोबाइल रिचार्ज और किताबें खुद खरीद पाता हूं।"
बिहार बना मिसाल
बिहार इस फैसले के साथ उन चंद राज्यों में शामिल हो गया है जहां सबसे बड़ी संख्या में सामाजिक सुरक्षा पेंशनधारी हैं। कुल 6 प्रमुख योजनाओं के तहत अब लगभग 1.11 करोड़ लोगों को प्रतिमाह 1100 रुपये की राशि सीधे बैंक खातों में भेजी जा रही है। सरकार पर 9202.84 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार आएगा, लेकिन इसका सामाजिक प्रतिफल कहीं ज़्यादा गहरा है।
नीतीश सरकार का साहसिक फैसला
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में महिला संवाद कार्यक्रम के दौरान इस पेंशन वृद्धि का निर्णय लिया गया। यह महज एक बजटरी संशोधन नहीं था, बल्कि यह उस सामाजिक सोच का प्रतीक है जो 'सबका साथ-सबका विकास' के भाव को ज़मीन पर उतारता है।
पेंशन योजना की झलक:
मुख्यमंत्री वृद्धजन पेंशन योजना: 49.89 लाख लाभार्थी
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था योजना: 35.59 लाख लाभार्थी
लक्ष्मीबाई विधवा पेंशन योजना: 8.64 लाख लाभार्थी
बिहार दिव्यांग पेंशन योजना: 9.65 लाख लाभार्थी
इंदिरा गांधी विधवा/दिव्यांग योजनाएं: लाखों लाभार्थी
बदलती सोच का संकेत
समाजशास्त्री डॉ. माला श्रीवास्तव कहती हैं, "बुज़ुर्गों और दिव्यांगजनों के जीवन में वित्तीय सुरक्षा लाना एक राज्य की ज़िम्मेदारी होती है, लेकिन बिहार सरकार ने इसे संवेदना से जोड़ा है। यह एक नीतिगत बदलाव से अधिक एक सामाजिक क्रांति है।"












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