Opposition Parties Meeting: सूत्रों का दावा- नीतीश कुमार बनाए गए UPA के संयोजक, शिमला में होगी अगली बैठक
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पटना स्थिति आवास 1 अणे मार्ग पर विपक्षी दलों की मीटिंग चल रही है। इस बैठक में 15 राजनीतिक दलों के करीब 22 नेता हिस्सा ले रहे हैं। बैठक में 2024 लोकसभा चुनाव में भाजपा के खिलाफ लड़ने का रोडमैप पर चर्चा हो रही है।
सूत्रों के मुताबिक बैठक के बाद नीतीश कुमार को यूपीए का नया संयोजक बनाया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक विपक्षी दलों की अगली बैठक अगस्त में हो सकती है। विपक्षी एकता की दूसरी बैठक शिमला में होगी। वहां तमाम पार्टियों के बड़े नेता बैठकर मंथन करेंगे।

सीएम नीतीश कुमार को यूपीए का संयोजक बनाए जाने के बाद उनके सामने कई चुनौतियां होंगी। 15 दलों के एक साथ आने के बाद सीट शेयरिंग से लेकर दलों की विचाधारा और कई राज्यों में कांग्रेस के साथ चल रही प्रतिद्धंदता नीतीश के लिए बड़ी चुनौतियां होंगी।
सीट शेयरिंग को लेकर फंसेगा पेंच
माना जा रहा है कि, 450 सीटों पर विपक्ष 'वन इज टु वन' फार्मूले से बीजेपी को चुनौती देने की योजना बना रहा है। यानि बीजेपी के सामने इन पार्टियों का एक कैंडिडेट चुनावी मैदान में होगा। कर्नाटक चुनाव में कांग्रेस की जीत के बाद मई में ममता बनर्जी ने एक प्रपोजल दिया था। उन्होंने कहा था कि हम उन राज्यों में कांग्रेस का समर्थन करेंगे जहां पर वह मजबूत है। इसके बदले में कांग्रेस को क्षेत्रीय दलों को उनके गढ़ में समर्थन देना चाहिए।
इस फॉर्मूले के हिसाब से कांग्रेस के खाते में 227 के आसपास सीटें ही मिल पाएंगी। कांग्रेस राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और गुजरात सहित देश भर की लगभग 200 लोकसभा सीटों पर मजबूत है। इन 200 लोकसभा सीटों में से 91 सिर्फ राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और गुजरात में हैं। ये वे सीटें हैं, जिन पर 2019 में कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी या दूसरे नंबर पर रही थीं।
अगर ममता के फॉर्मूले पर अमल किया जाता है तो कांग्रेस को बंगाल में 2 सीटें, यूपी में 4 और बिहार में 3 लोकसभा सीटें ही मिलती दिख रही हैं। इन राज्यों में कांग्रेस शायद ही इतनी कम सीटों पर राजी हो। भले ही इन राज्यों में कांग्रेस अच्छा प्रदर्शन ना कर पाई हो लेकिन ये वह राज्य हैं जहां से देश की राजनीति तय होती है। कांग्रेस इन राज्यों से अपने बजूद को खत्म नहीं होने देना चाहेगी।
पंजाब और बंगाल में कांग्रेस का विपक्ष में होना
विपक्षी दलों की इस बैठक में टीएमसी और आप भी शामिल हुई हैं। बंगाल और पंजाब में कांग्रेस आम आदमी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस की मुख्य विपक्षी पार्टी है। पंजाब में आप कांग्रेस को सत्ता से हटाकर आई थी। ऐसे में पंजाब कांग्रेस के नेता आप के साथ गठबंधन का लगातार विरोध कर रहे हैं।
वहीं पश्चिम बंगाल में कांग्रेस ममता बनर्जी के खिलाफ जमकर विरोध प्रदर्शन करती रही है। वही कई मौकों पर ममता बनर्जी कांग्रेस और राहुल गांधी के खिलाफ बयान देती भी नजर आईं। ऐसे में विपक्ष को एकजुट रखना नीतीश कुमार के लिए बड़ी चुनौती होगी।
विपक्ष का प्रधानमंत्री उम्मीदवार कौन होगा?
माना जा रहा है कि, अगर नीतीश कुमार संयोजक बनते हैं तो उनके पीएम कैंडिडेट बनने की राह भी आसान हो सकती है। हालांकि, विपक्ष दलों की इस बैठक में इस बात की चर्चा होने की संभावना बेहद ही कम है कि, विपक्ष का प्रधानमंत्री उम्मीदवार कौन होगा ? लेकिन नीतीश के नाम पर मुहर लगना इतना आसान भी नहीं होगा। ममता बनर्जी भी पीएम कैंडिडेट के लिए अपना दावा ठोंक सकती हैं।












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