नीतीश की रिकॉर्ड तोड़ वापसी! 'सुशासन बाबू' 10वीं बार लेंगे CM पद की शपथ, किसके नाम सबसे लंबे शासन का रिकॉर्ड?
बिहार विधानसभा चुनावों के नतीजों में NDA की प्रचंड जीत ने एक बार फिर नीतीश कुमार को राज्य की सत्ता के शिखर पर ला खड़ा किया है। 'सुशासन बाबू' के नाम से चर्चित नीतीश कुमार, 20 नवंबर को दसवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं, सिर्फ सरकार में वापसी नहीं कर रहे हैं- बल्कि वह एक साथ कई ऐतिहासिक रिकॉर्ड भी तोड़ रहे हैं।
उनकी यह वापसी भारतीय राजनीति में एक नेता की बेजोड़ अनुकूलन क्षमता (Adaptability) और स्थायी प्रभाव की कहानी कहती है।

यह कार्यकाल नीतीश कुमार को बिहार के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले मुख्यमंत्री के रूप में मजबूती से स्थापित कर देगा। लगातार तीसरी बार सत्ता की कमान संभालने जा रहे जदयू सुप्रीमो, अपनी राजनीतिक यात्रा के सबसे निर्णायक मोड़ पर खड़े हैं। उनका यह सफर, जहां एक तरफ दशक भर के अटूट शासन को दर्शाता है, वहीं दूसरी तरफ बार-बार शपथ लेने की मजबूरी बिहार की गठबंधन की अस्थिर राजनीति की गवाही भी देता है।
नए शिखर पर 'नीतीश रिकॉर्ड': दो ऐतिहासिक कीर्तिमान
बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार ने अब दो ऐसे कीर्तिमान स्थापित कर दिए हैं, जिन्हें आने वाले समय में तोड़ना लगभग असंभव होगा।
सबसे लम्बे कार्यकाल का रिकॉर्ड
नीतीश कुमार अब कुल मिलाकर (या सभी कार्यकालों को जोड़कर) बिहार के इतिहास में सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री पद पर रहने वाले नेता बन गए हैं। उन्होंने आज़ादी के बाद के पहले मुख्यमंत्री श्री कृष्ण सिन्हा (श्री बाबू) के रिकॉर्ड को तोड़ दिया है, जिनका सभी कार्यकालों का कुल योग 17 साल से कुछ अधिक था। नीतीश कुमार का सभी कार्यकालों का कुल समय अब 18 साल को पार कर चुका है।'
'शपथ ग्रहण' का रिकॉर्ड शतक
राजनीतिक अस्थिरता के बावजूद सत्ता में बने रहने की कला में माहिर नीतीश कुमार ने अब तक नौ बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है। एनडीए की जीत के बाद वह दसवीं बार शपथ लेकर एक अनोखा रिकॉर्ड बनाने जा रहे हैं। बार-बार पाला बदलने, गठबंधन बदलने, इस्तीफा देने और फिर से मुख्यमंत्री बनने की इस प्रक्रिया ने उन्हें यह अनूठी राजनीतिक पहचान दी है।
श्री बाबू के शासन की कहानी
आज़ादी के बाद, बिहार के पहले मुख्यमंत्री श्री कृष्ण सिन्हा (श्री बाबू) ने एक ऐसा मानक स्थापित किया था जो दशकों तक अछूता रहा।
- अबाधित शासन: श्री कृष्ण सिन्हा ने लगातार 14 साल और 314 दिन तक बिना किसी बाधा के मुख्यमंत्री का पद संभाला था। यह बिहार के किसी भी सीएम का सबसे लंबा कार्यकाल था।
- कुल कार्यकाल: उनका कुल कार्यकाल 17 साल से अधिक का था। भले ही नीतीश कुमार ने उन्हें कुछ वर्षों में पीछे छोड़ दिया हो, लेकिन श्री बाबू का यह अखंड शासन आज भी एक ऐतिहासिक मील का पत्थर बना हुआ है।
लालू-राबड़ी युग
1990 के दशक में, लालू प्रसाद यादव बिहार की राजनीति के एक निर्णायक शक्ति बनकर उभरे। वह लगातार पांच साल से अधिक समय तक मुख्यमंत्री रहे और उनका कुल कार्यकाल सात साल से अधिक का रहा।
- राबड़ी देवी का शासन: लालू प्रसाद यादव के चारा घोटाले में फंसने के बाद उनकी पत्नी, राबड़ी देवी, ने कार्यभार संभाला। वह राज्य की सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाली महिला मुख्यमंत्री बनीं, जिन्होंने राजनीतिक उथल-पुथल भरे दौर में भी पांच साल तक लगातार और कुल सात साल से अधिक समय तक पद संभाला। उनके कार्यकाल को आलोचकों द्वारा 'जंगल राज' भी कहा जाता था।
बिहार के प्रमुख मुख्यमंत्रियों का कुल कार्यकाल
- नीतीश कुमार: 18 वर्ष से अधिक तक मुख्यमंत्री रहे (यह उन्हें बिहार के इतिहास में सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाला CM बनाता है)।
- श्री कृष्ण सिन्हा (श्री बाबू): 17 वर्ष से अधिक तक मुख्यमंत्री रहे (आज़ादी के बाद के पहले CM, जिनका सबसे लंबा अखंड कार्यकाल रहा)।
- लालू प्रसाद यादव: 7 वर्ष से अधिक तक मुख्यमंत्री रहे।
- श्रीमती राबड़ी देवी: 7 वर्ष से अधिक तक मुख्यमंत्री रहीं।
आगे की राह: क्या नीतीश बनाए रखेंगे निरंतरता?
नीतीश कुमार अब लगातार तीसरा कार्यकाल शुरू करने जा रहे हैं, जो 2015 से शुरू हुआ अखंड दशक पूरा करेगा। उनकी राजनीतिक यात्रा, जो 2005 में शुरू हुई थी। एक बार फिर एनडीए की स्पष्ट बहुमत के साथ, नीतीश कुमार बिहार के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले और सबसे प्रभावशाली राजनीतिक हस्ती के रूप में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए तैयार हैं।












Click it and Unblock the Notifications