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Muzaffarpur News: वकील के संकल्प से 'मृत दारोगा' हुआ ज़िंदा, जानिए क्या है पूरा मामला

Muzaffarpur News Hindi: बिहार में पुलिस की कार्यशैली पर सवाल तो उठते ही रहते हैं, अब एक मृत दारोगा के ज़िदा होने का मामला सामने आया है। दरअसल मुजफ्फरपुर जिले में रेप आरोपी ने कोर्ट में पेश नहीं होने की तरकीब निकाली और खुद को ही मृत घोषित करवा दिया।

पीड़ित पक्ष के वकील ने उस वक्त ही कसम खाई थी कि जब तक वह दारोगा की सच्चाई दुनिया का सामने नहीं ला देगा तब तक जनेऊ धारण नहीं करेगा। 12 साल बाद उसने इस राज़ से पर्दा उठाया और पीड़ित को इंसाफ दिलवाने के बाद जनेऊ धारण की।

Muzaffarpur News: Dead inspector came alive due to lawyer resolution, know the whole matter

कोर्ट परिसर के ही हनुमान मंदिर में वकील ने विधि-विधान के जनेऊ धारण किया। यह पूरा मामला जिला में सुर्खियां बटोर रहा है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक वकील एसके झा ने एक शिक्षक का केस लिया था। महिला ने अपने गांव के ही शिक्षक अनंतराम पर रेप का मामला दर्ज करवाया था।

रामचंद्र दारोगा ने अनंतराम (आरोपी, शिक्षक) को गिरफ्तार किया था। आरोप का कहना था कि उसने यह गंदा काम नहीं किया है। महिले के पतो को उधार 1.25 लाख रुपये दिए थे। उधार दिए पैसे मांगने पर परिजन के साथ पिटाई की और क्षूठे आरोप में केस दर्ज करवा दिया।

रेप मामले में कोर्ट में ट्रायल शुरू हुई, वकील एसके झा ने आरोपी अनंतराम तरफ़ से मुकदमा लड़ते हुए कहा कि केस निराधार है। महिला ने FIR में रेप की घटना के वक्त का ज़िक्र किया है, उस वक्त पुलिस के साथ आरोपी अनंतराम खुद मौजूद थे।

पुलिस ने खुद मारपीट में घायल हुए अनंतराम को अस्पताल में भर्ती करवाया था। अदालत ने इस मामले में दारोगा रामचंद्र सिंह (जांच अधिकारी) को कोर्ट में आरोपी के ख़िलाफ़ सबूत पेश करने के लिए बुलाया, लेकिन वह हाज़िर नहीं हुए।

दारोगा की पत्नी ने कोर्ट में बताया गया कि उसके पति दारोगा रामचंद्र सिंह के 3 साल पहले ही साल 2009 में ही मृत्यु हो चुकी है। फ़र्जी डेथ सर्टिफिरेच (मृ्त्यु प्रमाण पत्र) भी कोर्ट में पेश कर दिया। पीड़ित पक्ष के लोग इस बात से हैरान हो गए कि जिस शख्स की 3 साल पहले मौत हो चुकी है, वह मामले में जांच कैसे कर सकता है।

दारोगा शक के दायरे में आ गया, इसके बाग ही वकील एसके झा ने दारोगा को ज़िदा साबित करने की कसम खा ली। इसके साथ ही उन्हें यह भी ठान लिया कि दारोगा को जिंदा साबित करने के बाद ही जनेऊ । कोर्ट ने इस मामले में शिक्षक अनंतराम को दोषी मानते हुए 7 साल की सजा सुनाई। झूठे मुकदमें में करीब पौने 7 साल जेल की हवा खानी पड़ी।

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