Motivational Story: किसान के बेटे ने बदली बिहार की पहचान, शैलेश की ‘स्वर्ण छलांग’, 75 लाख देगी 'नीतीश सरकार'

Motivational Story: नई दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में आयोजित विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2025 का शनिवार का दिन भारत और बिहार दोनों के लिए यादगार बन गया। जमुई जिले के छोटे से गांव से निकले शैलेश कुमार ने पुरुषों की ऊँची कूद टी63/42 श्रेणी में 1.91 मीटर की शानदार छलांग लगाकर गोल्ड मेडल जीता।

इसके साथ ही नया चैंपियनशिप रिकॉर्ड भी अपने नाम किया। यह न सिर्फ़ शैलेश का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है, बल्कि भारत के लिए इस टूर्नामेंट का पहला पदक भी है।

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कठिन परिस्थितियों से निकली सफलता की कहानी
शैलेश का बचपन संघर्षों से भरा रहा। उनके पिता छोटे किसान हैं और घर की आमदनी सीमित थी। संसाधनों की कमी के बावजूद परिवार ने हिम्मत नहीं हारी। खेतों में काम करने वाले पिता और पूरे गांव के सहयोग ने शैलेश को कभी हारने नहीं दिया। आर्थिक तंगी के बीच रोज़ाना घंटों की प्रैक्टिस, साधारण जूते और पुराने ट्रैक पर दौड़-यही उनके सफर की असली पहचान रही।

शैलेश की मेहनत का नतीजा है कि आज उनका नाम विश्व रिकॉर्ड बुक में दर्ज हो गया है। उन्होंने साबित कर दिया कि सपने बड़े हों तो रास्ते खुद बन जाते हैं।

मुख्यमंत्री की ओर से सम्मान और गर्व
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ट्वीट कर शैलेश को बधाई देते हुए कहा, "यह जीत न केवल बिहार बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का क्षण है।" राज्य सरकार ने घोषणा की है कि शैलेश को खेल पुरस्कार योजना के तहत 75 लाख रुपये नकद और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाएगा। नीतीश कुमार ने कहा कि शैलेश की यह उपलब्धि बिहार में खेलों के बढ़ते स्तर और खिलाड़ियों की मेहनत का जीता-जागता प्रमाण है।

शैलेश का जुनून और लक्ष्य
गोल्ड जीतने के बाद शैलेश ने कहा, "घरेलू दर्शकों के सामने यह जीत मेरे लिए बेहद खास है। हमारी टीम 10 दिन पहले से दिल्ली में अभ्यास कर रही थी। लक्ष्य हमेशा बड़ा था और उसे हासिल करने की खुशी शब्दों में नहीं बता सकता।" उन्होंने अगली चैंपियनशिप में और बेहतर प्रदर्शन करने का वादा भी किया।

लगातार निखरता प्रदर्शन
यह पहला मौका नहीं है जब शैलेश ने अपनी प्रतिभा से सबका ध्यान खींचा हो।

2025: चेन्नई में राष्ट्रीय पैरा ओलंपिक खेलों में रजत पदक।

2024: पेरिस पैरा ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व, शानदार प्रदर्शन के बावजूद पदक से मामूली अंतर।

इन उपलब्धियों ने उन्हें देश के शीर्ष पैरा एथलीट्स में ला खड़ा किया।

प्रेरणा नई पीढ़ी के लिए
शैलेश की जीत सिर्फ़ एक खेल उपलब्धि नहीं, बल्कि उन सभी युवाओं के लिए संदेश है जो संसाधनों की कमी का बहाना बनाकर अपने सपने अधूरे छोड़ देते हैं। उन्होंने दिखा दिया कि परिस्थितियां कभी बड़ी नहीं होतीं, इरादे बड़े होने चाहिए।

बिहार के इस होनहार खिलाड़ी ने साबित किया कि मेहनत, समर्पण और आत्मविश्वास से कोई भी ऊंचाई छूना संभव है। आज पूरा देश शैलेश पर गर्व कर रहा है, और यह कहानी आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का दीपक बन चुकी है।

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