Lok Sabha Chunav: जुर्म के रास्ते सियासी मंज़िल पाने की चाह में अशोक महतो, कुख्यात कांडों का रहा है इतिहास

Lok Sabha Chunav 2024: बिहार के चुनाव में बाहुबलियों की एंट्री ना हो तो चुनावी दांव ही अधूरा सा लगता है। 2024 में लोकसभा चुनाव में बिहार के कुछ इसी तरह का नज़ारा है। राजनीतिक पार्टी के दर पर टिकट के लिए बाहुबलियों की कतार लग रही है।

सियासी गलियारों में बाहुबलियों की टिकट की रेस में एक और नाम अशोक महतो का जुड़ गया है। अब आप सोच रहे होंगे की यह अशोक महतो कौन है। यह वही कुख्यात बदमाश है, जिसके ऊपर आईपीएस अधिकारी अमित लोढ़ा की लिखी किताब के आधार पर खाकी द बिहार चैप्टर वेब सीरीज बनी थी।

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अशोक महतो जेल से निकले के बाद सियासी दांव खेलने की तैयारी में है। यह वजह है कि उसने शादी रचाने के बाद सीधे लालू प्रसाद यादव से मिलने पटना जा पहुंचा। सूत्रों की मानें तो उसकी पत्नी को महागठबंधन की तरफ़ उम्मीदवार बनाया जा सकता है।

आपको बता दें कि अशोक महतो के खौफ़ का आतंक बिहार के शेखपुरा, लखीसराय, नवादा और नालंदा सहित कई जिलो में था। अब उन्होंने जुर्म के रास्ते राजनीतिक मंज़िल पाने का मूड बना लिया है। इसलिए उन्हें उम्र ढल जाने के बाद शादी की, ताकि उसे नहीं तो उसकी पत्नी को ही सही लेकिन टिकट मिले।

अनीता नाम की महिला से शादी करने के बाद अब अशोक महतो उनके रास्ते सियासी मंज़िल पाने की चाह रख रहे हैं। ग़ौरतलब है कि अशोक महतो के ऊपर कुख्यात कांडों (जेल ब्रेक, नरसंहार और हत्या) आरोप है। इसी वजह से उसे जेल में करीब 17 साल गुज़ारना पड़ा था।

जेल से छूटने के बाद कुख्यात अपराधी अशोक महतो ने राजनीति के ज़रिए राज करने का मन बनाया। मुंगेर लोकसभा सहित कई अन्य लोकसभा सीटों पर अशोक महतो की बाहुबल और जातीय समीकरण पर पकड़ है।

अशोक महतो इसलिए ही पत्नी को मुंगेर लोकसभा सीट से महागठबंधन से टिकट दिलाने की जुगाड़ मे है। आइए अशोक महतो के बारे में विस्तार से जानते हैं। अशोक महतो को साधु जी के नाम से भी लोग जानते हैं। वह नवादा जिले के बढ़ौना गांव (कोनदंपुर पंचायत, पकरीबरावां प्रखंड) का रहने वाला है।

90 की दशक में अशोक महतो के ऊपर गरीबों को हक दिलाने के नाम पर कई मामले दर्ज हुए। इसके बाद से उसने जुर्म की दुनिया में क़दम रखा और खौफ का तांडव मचाता चला गया। उस दौर में नवादा के शेखुपरा और वारसलीगंज दो कुख्यात अपराधियों अखिलेश सिंह और अशोक महतो का गैंग हुआ करता था।

वर्चस्व की लड़ाई में दोनों गैंग के बीच कई मर्डर हुए। अशोक महतो गैंग में शामिल पिन्टू महतो राजो सिंह हत्याकांड के बाद चर्चा में आया। इस गैंग को ही राजो सिंह के हत्या का जिम्मेदार बताया जाता था। दोनो गैंग के बीच भुआलचक में पहले नरसंहार हुआ था।

साल 2000 के मई महीने में अपसढ़ में हुए नरसंहार 12 लोगों की हत्या हुई। लोग बताते हैं कि अशोक महतो गैंग ने अखिलेश सिंह के गैंग पर एके-47 से करीब दर्जन भर लोगों की एक हत्या कर थी। साल वर्ष 2003 में भी झौर मोड़ में हुए नरसंहार में एक जीप पर अंधाधुंध फायरिंग में 5 लोगों की जान गई थी।

इस कांड के बाद वारसलीगंज की अरुणा देवी (उस वक्त की विधायक) के पिता का भी मर्डर हुआ था। साल 2002 में नवादा जेल ब्रेक कांड हुआ, जिसके बादल अशोक महतो फरार होने में कामयाब रहा था। अमित लोढ़ा (शेखपुरा के तत्कालीन एसपी) ने झारखंड के देवघर स्थित सत्संग कालोनी से 9 जुलाई 2006 को अशोक महतो को गिरफ्तार किया था।

जेल ब्रेक कांड (नवादा), मनीपुर नरसंहार (शेखपुरा), विधायक पर बम से हमला, लूट, हत्या, रंगदारी और अपहरण जैसे कई मामले में अशोक महतो भागलपुर कारागार में बंद था। पूरे 17 साल जेल में गुजारने के बाद जेल से बाहर आया। अब सियासी पारी खेलने की तैयारी कर रहा है।

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