भाजपा भगाओ महारैली के जरिए लालू साधना चाहते हैं अपने ये मकसद

इस रैली में विपक्षी एकता पर जोर देते हुए देखा जाएगा जहां विपक्ष के कई नेता एक मंच पर शामिल होंगे और राजनीति का नए अध्याय की शुरुआत होगी।

पटना। 27 अगस्त रविवार को लालू प्रसाद यादव द्वारा पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में भाजपा भगाओ देश बचाओ रैली का आयोजन किया गया है। इस रैली में विपक्षी एकता पर जोर देते हुए देखा जाएगा जहां विपक्ष के कई नेता एक मंच पर शामिल होंगे और राजनीति के नए अध्याय की शुरुआत होगी। रैली की पूरी तैयारी की जा चुकी है और इस रैली में सत्ताधारी नेताओं से लेकर पूरे देश के लोगों की निगाहें टिकी हुई हैं कि आखिरकार लालू की यह रैली कैसी होगी? सत्ता से बेदखल होने के बाद पहली बार लालू यादव का शक्ति परीक्षण आज गांधी मैदान में देखने को मिलेगा जहां लाखों की संख्या में आये कार्यकर्ता के सामने वे नीतीश कुमार, नरेंद्र मोदी को आड़े हाथ लेते हुए हुंकार भरेंगे।

रैली को लेकर सियासी गलियारे में हलचल

रैली को लेकर सियासी गलियारे में हलचल

लालू प्रसाद यादव द्वारा किए जा रहे इस रैली पर सियासी गलियारों में कई मायने निकाले जा रहे हैं जिसमें ऐसा कहा जा रहा है कि इस रैली के जरिए लालू माय समीकरण को मजबूत करने और खोये हुए जनाधार को वापस पाने की कोशिश कर रहे है, तो दूसरी तरफ ऐसा कहा जा रहा है कि लालू यादव अपनी राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन कर पूरे देश में भाजपा विरोधी पार्टियों को गोलबंद करने की कोशिश करेंगे। इस रैली में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को भाजपा विरोधी चेहरे के रूप में सामने किया जाएगा। इस रैली की सबसे खास वजह यह है कि आज भी लालू यादव अपने विरोधी पार्टियों को यह दिखाना चाह रहे हैं कि हमारा वोट बैंक अभी भी बरकरार है और आने वाले दिनों में यह और भी बढ़ेगा।

लालू की रैली के बाद राजनीतिक उठापटक की संभावना

लालू की रैली के बाद राजनीतिक उठापटक की संभावना

आपको बताते चलें कि लालू यादव के द्वारा किया जाने वाला भाजपा भगाओ देश बचाओ रैली के बाद ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि देश की राजनीति में काफी बदलाव और उठापटक का माहौल कायम होगा। इस रैली में शामिल होने वाले जेडीयू के बागी नेता शरद यादव के अगले कदम का इंतजार किया जा रहा है तो भाजपा विरोधी अन्य पार्टियों को एक मंच पर एकत्रित करते हुए जदयू को कार्रवाई के लिए चुनौती देने की तैयारी की जा रही है। दूसरी तरफ इस रैली में समाजवादी पार्टी के विभाजन की भी पटकथा लिखी जाएगी। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव इस रैली में मौजूद रहेंगे ।

इस रैली से असमंजस की स्थिति में कांग्रेस

इस रैली से असमंजस की स्थिति में कांग्रेस

आपको बताते चलें कांग्रेस और राजद के साथ गठबंधन के बाद जदयू को भी शामिल किया गया था और इस गठबंधन को महागठबंधन का नाम दिया गया था। तीनों पार्टियों ने एक साथ मिलकर का चुनाव लड़ा और बिहार में सरकार बनाई लेकिन भ्रष्टाचार को लेकर यह सरकार 20 महीने के भीतर खत्म हो गई। वहीं 20 महीने के शासन के बाद राजनीतिक घटनाक्रम में हाथों से शासन की बागडोर जाते ही कांग्रेस दुविधा में आ गई है। हलांकि इस रैली में शामिल नहीं होने को लेकर सोनिया गांधी ने बीमारी की बात बताई तो राहुल गांधी ने विदेश यात्रा का हवाला देते हुए कार्यक्रम में आने से इनकार कर दिया। सोनिया गांधी और राहुल गांधी के इस फैसले को देखने के बाद बिहार कांग्रेस में असमंजस की स्थिति कायम हो गई है। हलांकि बिहार कांग्रेस के नेता अब तक यह समझ नहीं पाए हैं कि क्या लालू के साथ चलना है या नहीं? यह स्थिति इसलिए कायम हुई है कि राहुल-सोनिया की गैरमौजूदगी में पार्टी के सीनियर लीडर गुलाम नबी आजाद और बिहार प्रभार सीपी जोशी लालू प्रसाद की रैली में शामिल होंगे। वहीं बिहार के कुछ नेताओं का कहना है कि लालू यादव कभी भी कांग्रेस को आगे बढ़ते नहीं देखना चाहते हैं। कुछ नेताओं का ये भी कहना है कि लालू के साथ कांग्रेस आगे बढ़ सकती है।

'माय' समीकरण को मजबूत करने की कोशिश में लालू

'माय' समीकरण को मजबूत करने की कोशिश में लालू


आपको बताते चलें कि लालू प्रसाद यादव के छोटे बेटे बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी प्रसाद यादव पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप और बिहार में चल रहे महागठबंधन की सरकार के टूटने के बाद लालू यादव पूरे देश में भाजपा विरोधी नेताओं को एक मंच पर लाने की तैयारी में जुट गए। एक मंच पर सभी विरोधी नेताओं को लाते हुए अपनी ताकत दिखाते हुए खोई हुए जनाधार को वापिस पाने की कोशिश की जाएगी। हलांकि लालू की रैली से कई बड़े नेता अपने आपको किनारा कर लिए हैं लेकिन लालू की रैली में कोई फर्क नहीं पड़ा है। लालू यादव का इतिहास रहा है कि वह सियासी ताकत का प्रदर्शन करते हैं। 90 के दशक में बिहार में अपनी सरकार के दौरान कई महारैला के आयोजन के जरिए लालू प्रसाद कई बार ऐसा कर भी चुके हैं। आज राजधानी पटना में लालू यादव के कार्यकर्ताओं को देख इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता की बाढ़ की भयानक विनाश लीला के बीच लोग उनकी रैली में शामिल होने के लिए विभिन्न जिलों से आए हैं।

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