KBC में चमकी ई-रिक्शा चालक की किस्मत, पारस मणि सिंह ने जीती बड़ी रकम
Bihar E-Rickshaw Drive in KBC: पॉपुलर टीवी गेम शो 'कौन बनेगा करोड़पति' में एक ई-रिक्शा चालक की किस्मत रातों-रात बदल दी। बिहार के मुजफ्फरपुर के ई-रिक्शा चालक पारस मणि सिंह ने केबीसी में बड़ी जीत हासिल की है। जिसके बाद अब उनकी जमकर सोशल मीडिया पर चर्चा हो रही है।
मुजफ्फरपुर के मालीघाट के रहने वाले पारसमणि इंडिया चैलेंजर्स वीक में जुलाई के फास्टेस्ट-5 के विजेता बनकर हॉट सीट तक पहुंचे, जहां उन्होंने महानायक अमिताभ बच्चन के साथ गेम शो में हिस्सा लिया।

दरअसल, 'फास्टेस्ट-फाइव' सेगमेंट में देशभर से दस प्रतियोगी शामिल होते हैं, जिसमें विजेता वह होता है, जो लगातार पांच सवालों के सबसे तेज जवाब देता है। वहीं शो के दौरान अपने पिछले संघर्षों को याद करते हुए उन्होंने बताया कि कोविड-19 महामारी ने उनके जीवन को बुरी तरह प्रभावित किया।
लॉकडाउन के कारण उनकी मोबाइल रिचार्ज की दुकान बंद हो गई, जिसके कारण उन्हें अपने परिवार की मदद से ई-रिक्शा खरीदना पड़ा। वह रोजाना 500 से 700 रुपए कमाते, जिससे पूरे परिवार का गुजरा होता था।
केबीसी में आकर सपना हुआ पूरा
पारसमणि ने बताया कि केबीसी में भाग लेना उनके लिए एक सपना था और अमिताभ बच्चन के सामने हॉट सीट पर खुद को पाकर वह बहुत खुश थे। शुरुआती घबराहट के बावजूद अमिताभ बच्चन के मजाकिया अंदाज ने उनके तनाव को कम किया, जिससे वो ज्यादा आत्मविश्वास के साथ खेल सके।
हालांकि, महात्मा गांधी के बारे में एक चुनौतीपूर्ण सवाल का सामना करने के बाद सिंह ने खेल से बाहर निकलने का फैसला किया और केबीसी के मंच से 12.5 लाख रुपए की बड़ी रकम लेकर चले गए।
मैंने उन्हें हमेशा केबीसी देखते देखा- सिंह की पत्नी
वहीं सिंह की पत्नी अंशु सिंह ने एक इंटरव्यू में बहुत गर्व और खुशी व्यक्त करते हुए कहा, "मैंने कभी नहीं सोचा था कि मेरे पति शो में होंगे। जब से मेरी शादी हुई है, मैंने उन्हें हमेशा केबीसी देखते देखा है। हमारे टीवी पर कभी भी गाने या फिल्में नहीं चलती हैं। हमेशा सामान्य ज्ञान और करंट अफेयर्स ही चलते हैं।"
'मैं करंट अफेयर्स देखता रहा'
पारस मणि सिंह ने अपने सफर को याद करते हुए कहा, "मेरा सपना था कि मैं केबीसी में आऊं। मैं एक मध्यम-वर्गीय परिवार से आता हूं और मैं ऑनर्स ग्रेजुएट हूं। मेरी दुकान बंद हो गई थी और हम आर्थिक रूप से संघर्ष कर रहे थे। मेरी बहन ने मेरे लिए ई-रिक्शा खरीदकर मेरी मदद की, लेकिन केबीसी में आने का मेरा सपना कभी नहीं टूटा। मैंने अभ्यास जारी रखा और अपने मोबाइल पर लगातार सामान्य ज्ञान और करंट अफेयर्स देखता रहा।"












Click it and Unblock the Notifications