Bihar Politics: ‘इस बार HAM लड़ेंगे, जीतेंगे’, Jitan Manjhi की मांग ने बढ़ाई NDA की टेंशन, इतनी सीटों पर दावा
Bihar Politics: बिहार में इसी साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, जिसमें हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा पार्टी एनडीए का घटक है। मोदी की कैबिनेट में जीतन राम मांझी को केंद्रीय मंत्री हैं। HAM पार्टी के संरक्षक और केंद्र सरकार में मंत्री जीतन राम मांझी ने बिहार में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए एनडीए के साथ सीट बंटवारे पर बातचीत से पहले 25 सीटों पर दावा ठोका है।
इतना ही नहीं, पूर्णिया में कार्यकर्ता सम्मेलन में उन्होंने न सिर्फ इन सीटों पर दावा ठोका बल्कि कसबा विधानसभा क्षेत्र से अपने उम्मीदवार का भी ऐलान कर दिया। पूर्णिया के गढ़बनैली में आयोजित जिला कार्यकर्ता सम्मेलन में केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी और उनके बेटे के साथ पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष संतोष कुमार सुमन भी शामिल हुए।

जीतन राम मांझी ने घोषणा की कि 2025 के बिहार चुनाव में उनकी पार्टी कम से कम 25 सीटों पर उम्मीदवार उतारने का इरादा रखती है। मांझी ने अपना दृष्टिकोण स्पष्ट करते हुए कहा, अपने अधिकारों को सुरक्षित करने के लिए हमें राजनीतिक शक्ति की आवश्यकता है।
हमारा लक्ष्य है कि हमारी पार्टी के 20 विधायक चुने जाएं ताकि हम गरीबों का मजबूती से प्रतिनिधित्व कर सकें। इसलिए हमारी पार्टी 25 से 30 सीटों पर दावा करेगी। मांझी ने यह भी घोषणा भी कर दी कि राजेंद्र यादव कस्बा से पार्टी के उम्मीदवार होंगे।
पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष संतोष कुमार सुमन ने कहा कि 2020 के चुनावों में उनकी पार्टी को कस्बा में हार का सामना करना पड़ा था। इस बार 'हम यहां से फिर चुनाव लड़ेंगे और जीतेंगे। उन्होंने कहा कि राजेंद्र यादव गरीबों और उनके अधिकारों के लिए आवाज़ बुलंद करते रहते हैं।
बिहार में राजनीतिक परिदृश्य गर्म हो रहा है क्योंकि हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM पार्टी) आगामी विधानसभा चुनावों में महत्वपूर्ण संख्या में सीटों पर अपनी नज़रें गड़ाए हुए है। विशिष्ट निर्वाचन क्षेत्रों के लिए पहले से ही घोषणाएँ की जा चुकी हैं और उनका प्रतिनिधित्व बढ़ाने की स्पष्ट महत्वाकांक्षा के साथ, HAM पार्टी एक मज़बूत अभियान के लिए कमर कस रही है।
इस कदम ने निश्चित रूप से एनडीए के भीतर चिंताएँ बढ़ा दी हैं, क्योंकि सीट-बंटवारे की बातचीत पहले से कहीं ज़्यादा विवादास्पद होने की संभावना है। पार्टी का ध्यान गरीबों के सशक्तिकरण और अधिकारों पर है, क्योंकि यह चुनावों की प्रत्याशा में अपनी चुनावी रणनीति को मजबूत कर रही है।












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