क्या संकट में है नीतीश सरकार, बिहार में जीतन राम मांझी के HAM की धमकी के मायने ?
नई दिल्ली, 28 दिसंबर: बिहार में नीतीश कुमार की अगुवाई वाली एनडीए सरकार के दो सहयोगी दलों भाजपा और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के बीच खूब बयानबाजी हो रही है। सोमवार को तो जीतन राम मांझी की पार्टी ने सरकार से समर्थन वापसी तक की धमकी दे डाली। राज्य विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी और मुख्य विपक्षी दल आरजेडी तो पिछले एक साल से इसी इंतजार में बैठी है कि कब सत्ता में बैठने की मौका मिल जाए। लेकिन,राजनीतिक बयानबाजियों से अलग हटकर हम यहां आपको बिहार में सत्ताधारी गठबंधन की जमीनी स्थिति बताने की कोशिश कर रहे हैं। क्या जीतन राम मांझी की पार्टी की धमकी किसी बड़ी गंभीर राजनीतिक स्थिति की ओर इशारा कर रहा है या ये सिर्फ सियासी नूरा-कुश्ती भर है।

क्या संकट में है नीतीश सरकार ?
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने ब्राह्मणों और भगवान राम को लेकर जो आपत्तिजनक टिप्पणियां की वह नीतीश कुमार की अगुवाई वाले एनडीए सरकार के लिए बेवजह संकट का कारण बना हुआ है। हालांकि, मांझी ने अपनी गलती का एहसास करने में देर नहीं की और उन्होंने फौरन माफी भी मांग ली। लेकिन,इसकी वजह से बीजेपी के एक खेमे में स्पष्ट तौर पर उनके खिलाफ असंतोष पैदा हुआ है। ऊपर से राजद सुप्रीमो लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य जले पर नमक छिड़ चुकी हैं। वो मांझी संकट पर ट्विटर के जरिए पहले ही भाजपा पर तंज कस चुकी हैं, "बीजेपी वालों इतना नाटक क्यों? मांझी का साथ भी चाहिए और बयान पर रोना भी है? बिना मांझी के सरकार क्यों नहीं चलाते? स्वाभिमान मर गया क्या भाजपा वालों? हिम्मत है तो बिना माझी के सरकार चला के दिखाओ? "
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जीतन राम मांझी की पार्टी ने दी समर्थन वापसी की धमकी
लालू-राबड़ी की बेटी जानती हैं कि मांझी के समर्थन के बिना नीतीश सरकार संकट में आ सकती है। यही वजह है कि सोमवार को उनकी पार्टी हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) ने बिहार की एनडीए सरकार से समर्थन वापसी की धमकी दे डाली है। पार्टी प्रवक्ता दानिश रिजवान ने कहा है, 'अगर 'हम' के 4 विधायक राज्य में एनडीए सरकार से समर्थन वापस ले लेते हैं, तो यह अपने-आप गिर जाएगी।' दरअसल, मांझी की पार्टी के प्रवक्ता प्रदेश भाजपा नेता और राज्य के पर्यावरण और वन मंत्री नीरज कुमार सिंह बबलू की उस टिप्पणी से नाराज हैं, जिनमें उन्होंने कहा है कि 'मांझी पर उनकी बढ़ती उम्र का प्रभाव दिख रहा है।' उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री को यह सलाह भी दी है कि, '(मांझी को) अपने बेटे संतोष कुमार सुमन के बेहतर भविष्य के लिए अपना बाकी का जीवन राम-राम कर के गुजारना चाहिए, जो कि प्रदेश की एनडीए सरकार में मंत्री हैं। '

'मांझी हमारे गठबंधन में हैं और गठबंधन में ही रहेंगे'
इस मामले में वन इंडिया ने बिहार भाजपा के पूर्व प्रवक्ता और पार्टी के वरिष्ठ नेता आनंद कुमार झा से खास बात कही है। जब हमने उनसे दानिश रिजवान की ओर से समर्थन वापसी की धमकी पर प्रतिक्रिया मांगी तो वे बोले, "ऐसी कोई बात नहीं है, यह उनकी पार्टी के प्रवक्ता का अपना ओपिनियन हो सकता है और अभी जीतन राम मांझी सरकार में हैं और रहेंगे।" जहां तक मांझी के आपत्तिजनक बयान की वजह से पैदा हुए मतभेद की बात है तो उन्होंने स्पष्ट किया है कि "जहां राष्ट्र को कमजोर करने की स्थिति होगी, समाज को कमजोर करने की स्थिति होगी, वहां बीजेपी सदैव खड़ी रहेगी। यह बयान तो निश्चित रूप से समाज में मतभेद पैदा करने वाला है.....लेकिन, उन्होंने माफी मांग ली है.....जो भी भारत में भारतीयता, भारत में सनातन, भारत में अपने संस्कार के विरुद्ध कोई भी कार्य करेगा, उसके खिलाफ तो पार्टी स्टैंड लेगी ही.....लेकिन, वे (मांझी) हमारे गठबंधन में हैं और गठबंधन में ही रहेंगे"

क्या कहते हैं बिहार में विधायकों के आंकड़े ?
दरअसल, जीतन राम मांझी वही नेता हैं, जिन्हें एक बार नीतीश कुमार ने अपना उत्तराधिकारी बनाकर सीएम की कुर्सी सौंप दी थी। लेकिन, चंद महीनो में ही वे जदयू सुप्रीमो को भी गच्चा देने लग गए। इसलिए हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के नेता के दिमाग में कैसी सियासी खिचड़ी पक रही है, यह जरा मुश्किल सवाल है। लेकिन, जहां तक नीतीश कुमार की सरकार की स्थिरता का सवाल है तो 243 सदस्यीय बिहार विधानसभा में फिलहाल कम से कम उसे 127 विधायकों का समर्थन हासिल है, जबकि उसे सामान्य बहुमत के लिए 122 एमएलए ही चाहिए। यह आंकड़ा इस तरह से है- भाजपा-74, जदयू-43, एलजेपी-1(जदयू में शामिल), एचएएम (एस)-4, वीआईपी-4 और निर्दलीय-1. हालांकि, एनडीए के नेता ऑफ द रिकॉर्ड 130 से ज्यादा विधायकों के समर्थन का दावा करते हैं।

बिहार में जीतन राम मांझी की पार्टी की धमकी के मायने ?
मतलब, सत्ता के आंकड़े फिलहाल नीतीश कुमार की सरकार के साथ हैं और जीतन राम मांझी की पार्टी अकेले समर्थन वापस लेकर इसे फिलहाल गिराने की स्थिति में नहीं दिख रही है। लेकिन, वह सरकार को दबाव में रखने में जरूर कामयाब हो सकती है। शायद यही वजह है कि भाजपा नेता आनंद झा ने दावे के साथ कहा है, "गठबंधन इंटैक्ट है और इंटैक्ट रहेगा......और जनता ने लालू-कांग्रेस गठबंधन के लूट का राज देखा है....लालू का लूट और कांग्रेस का करप्शन, जनता उसमें फिर नहीं जाना चाहती है। यह बिहार की पूरी लीडरशिप को भी ज्ञात है......इसलिए विकास सबको चाहिए...एनडीए में विकास हो रहा है और यह यथावत रहेगा।"
गठबंधन इंटैक्ट है और इंटैक्ट रहेगा......और जनता ने लालू-कांग्रेस गठबंधन के लूट का राज देखा है....लालू का लूट और कांग्रेस का करप्शन, जनता उसमें फिर नहीं जाना चाहती है- आनंद झा, बीजेपी नेता, बिहार












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