आनंद मोहन की रिहाई के फैसले को आईएएस पत्नी उमा कृष्णैया ने दी SC में चुनौती, दोबारा जेल भेजने की उठाई मांग

भीड़ को उकसा कर आईएएस की हत्या के मामले दोषी रहे आनंद मोहन की रिहाई के फैसले को आईएएस जी कृष्णैया की पत्नी उमा कृष्णैया ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।

Anand Mohan

बिहार में बाहुबली आनंद मोहन की रिहाई पर जहां सत्ताधारी सरकार कानूनी नियमों का पालन होने की बात कह रही है। वहीं, आईएएस जी कृष्णैया की पत्नी उमा कृष्णैया ने समय से पहले रिहाई करने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी है। साथ ही उन्होंने आनंद मोहन को दोबारा जेल भेजने की मांग की है।

बिहार में आनंद मोहन की रिहाई पर आईएएस जी कृष्णैया की पत्नी उमा ने अफसोस जताया था। उन्होंने कहा था कि ईमानदार अधिकारी को मारने वाला छूट गया, ये बहुत ही गलत फैसला लिया गया है। वो इस फैसले से बिल्कुल खुश नहीं हैं।

IAS जी कृष्णैया की पत्नी ने कहा कि हमारे साथ अन्याय हुआ है। पहले उसकी फांसी की सजा उम्रकैद में तब्दील की गई, इसके बाद उसे पॉलिटिक्टस में लाया जा रहा है। हम इस फैसले से खुश नहीं हैं।

इस बयान के बाद उन्होंने न्याय की गुहार लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट में फैसले को चुनौती दी है। साथ ही बाहुबली को दोबारा जेल में भेजने की मांग की है। उन्होंने कहा कि ईमानदार अफसर की हत्या के बाद सजा को कम करके रिहा कर देना नाइंसाफी है।

वहीं, इस मामले पर एक टीवी चैनल को इंटरव्यू देते हुए आनंद मोहन कह चुके हैं कि जो लोग मेरी रिहाई का विरोध कर रहे हैं, वो कोर्ट की अवमानना कर रहे हैं। उन्हें 2007 में सजा मिली थी, इसके बाद 2012 में एक एक्ट के आधार पर उन्हें रिहाई मिली। वैसे भी आजीवन कारावास का मतलब जिंदगी भर नहीं होता है। इसका मतलब होता है 20 साल की सजा।

आगे बोलते हुए आनंद मोहन ने कहा कि अगर किसी कैदी का आचरण अच्छा होता है तो उसे 14 साल की सजा काटने के बाद रिहा किया जा सकता है। वहीं, वो इस केस में 15 साल की सजा काट चुके हैं।

वहीं, इस मामले में सीएम नीतीश कुमार भी अपना बचाव करते हुए दिखाई दिए वो बोले आनंद मोहन की रिहाई कानूनी नियमों के अनुसार हुई है। हर जगह लोगों को छोड़ा जाता है केंद्र सरकार के द्वारा भी लोगों को छोड़ा जाता है। नियम और प्रावधान के अनुसार लोगों को रिलीज किया जाता है।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल 5 दिसंबर 1994 को बिहार के एक गैंगस्टर के मारे जाने के बाद मुजफ्फरपुर की जनता भड़क उठी। इसी दौरान गोपालगंज डीएम जी. कृष्णैया अपनी सरकारी गाड़ी से जा रहे थे। जिन पर गुस्साई भीड़ ने हमला कर उनको गोली मार दी, जिसमें उनकी मौत हो गई। वहीं, आरोप ये लगाया गया था कि डीएम की हत्या के लिए भीड़ को उकसाने का काम आनंद मोहन ने ही किया था। इस पर साल 2007 में आनंद मोहन को दोषी करार देकर फांसी की सजा दी गई, जिसे एक साल बाद उम्रकैद में तब्दील कर दिया गया था।

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