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कभी टेलिफोन एक्सचेंज में करते थे काम, जीतने के साथ ही लग गई लॉटरी, हुआ कुछ ऐसा जो ख्वाबों में नहीं था सोचा

MSME Minister News: बिहार को इस बार 8 मंत्री मिले हैं, इनमें सबसे दिलचस्प किस्सा एक मंत्री का है, जिन्होंने ख्वाबों में नहीं सोचा था कि जीतने के साथ ही केंद्र में मंत्री बना दिए जाएंगे। क्योंकि बिहार में जब महागठबंधन की सरकार टूटी और नई सरकार बनी तो उन्होंने अपनी पार्टी के कोटे से दो मंत्री पद मांगा था।

4 विधायकों वाली पार्टी ने दो मंत्री पद मांगा लेकिन नीतीश कैबिनेट में एक ही से संतोष करना पड़ा। वहीं एनडीए के घटक दलों में शामिल होने के बाद लोकसभा चुनाव के मद्देनज़र 1 ही सीट पर टिकट मिला और जीत दर्ज करते ही लॉटरी लग गई।

HAM Leader MSME Minister Jitan Ram Manjhi Was Working In Telelphone Exchane Before Politics

जी हां, हम बात कर रहे हैं, बिहार के पूर्व सीएम मांझी की, जिन्होंने गया लोकसभा सीट से 3 बार चुनाव हारा और चौथी बार कामयाबी मिली। उन्होंने ख्वाबों में भी नहीं सोचा होगा कि जीत दर्ज करते ही मंत्री बन जाएंगे। आपको बता दें कि कांग्रेस की टिकट पर पहली बार गया से साल 1991 में जीतनराम मांझी ने चुनाव लड़ा था।

1991 में वह दूसरे नंबर पर रहे थे, साल 2014 में जदयू की टिकट पर फिर गया से ही चुनावी दांव खेला लेकिन तीसरे नंबर पर रहे। 2019 के चुनाव में जीतन मांझी की पार्टी HAM, महागठबंधन से सहयोगी दलों में शामिल हुई।

2019 में फिर उन्होंने गया सीट से चुनावी बिगुल फूंका लेकिन दूसरे स्थान पर ही संतोष करना पड़ा। जदयू उम्मीदवार विजय कुमार मांझी ने उन्हें हराया था। लेकिन इस बार मांझी की लॉटरी लग गई। चौथी बार बिहार के पूर्व सीएम जीतन राम मांझी ने चुनावी ताल ठोकी और जीत गए।

इस बार वह एनडीए के सहयोगी दलों में शामिल अपनी पार्टी हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा की टिकट पर चुनावी दांव खेला। मांझी का मुकाबला महागठबंधन के सहयोगी दलो में शामिल राजद नेता कुमरा सर्वजीत से था। जीतन मांझी को 4 लाख 94 हजार 960 वोट पड़े। 1 लाख 1812 के अंतर से महागठबंधन उम्मीदवार कुमार सर्वजीत को हराया।

हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के संरक्षक जीतनराम मांझी की पार्टी 1 सीट पर चुनाव लड़ी। सांसद बनते ही उन्हे लघु, कुटीर एवं मध्यम उपक्रम (MSME) मंत्रालय की ज़िम्मेदारी मिली। आपको बता दें कि महकार गांव (खिजरसराय प्रखंड, गया) में जन्मे जीतन राम मांझी का बचपन बहुत ही तंगी में गुज़रा

जीतन राम मांझी के पिता रामजीत राम मांझी खेतिहर मज़दूर थे। वहीं उनकी माता सुकरी देवी भी पति के साथ खेती में हाथ बटाती थी। मुसहर समुदाय से ताल्लुक रखने वाले मांझी का बचपन गांव मे ही बीता। गांव से ही प्रारंभिक शिक्षा भी हासिल की। इसके बाद गया कॉलेज (मगध विश्वविद्यालय) से स्नातक की डिग्री ली।

स्नातक की पढ़ाई मुकम्मल करने के बाद मांझी ने 13 साल तक टेलीफोन एक्सचेंज में काम किया। स्थानीय बुज़ुर्गों की मानें तो भाई की पुलिस में बहाली होने तक वह मांझी एक्सचेंज में काम करते रहे। उसके बाद उन्होंने सियासी सफर की शुरुआत की और आज की तारीख में केंद्रीय मंत्री भी बन गए।

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