Bihar Caste Census की क्या है ज़मीनी हकीकत, कामयाब हो रही या फ्लॉप है गणना?
Bihar Caste Census का दूसरा चरण शुरू हो गया है, जनगणना करने में कर्मियों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

Caste Census News Update: बिहार में जातीय जनगणना के दूसरे चरण की शुरुआत के बाद कर्मियों को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। लोग अपनी जाति बताने से तो परहेज़ नहीं कर रहे हैं, लेकिन आय और संपत्ति की जानकारी देने से कतरा रहे हैं।
जनगणना कर्मी की मानें तो लोग उन्हें आय और संपत्ति छोड़ कर सारी जानकारी आसानी से दे रहे हैं। जब आय और संपत्ति के बारे में पूछा जाता है तो ग़लत जानकारी दे रहे हैं। कर्मियों की मजबूरी यह है कि उनके पास सही जानकारी भी है, लेकिन उन्हें बाताई गई जानकारी ही दर्ज करनी है।
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कर्मियों का कहना है कि गांव के लोगों से पता चलता है कि संबंधित व्यक्ति की आय और संपत्ति काफी है, लेकिन वह खुद की सही जानकारी छिपा रहा है। उनका कहना है कि जाति समेत अन्य जानकारी तो सही देते हैं, लेकिन आर्थिक स्थिति छिपा रहे हैं।
गणना करने के लिए पहुंचने पर लोग उन्हें वक्त नहीं दे रहे हैं और ना ही सही जानकारी दे रहे हैं। लोगों के पक्के मकान होते हुए भी कच्चा मकान लि का रहे हैं। इसके अलावा कुछ लोग तो गणना को ही गलत बता रहे हैं। गणना में सहयोग देने के लिए अधिकारी लगातार अपील कर रहे हैं, लेकिन कर्मी को सही जानकारी नहीं मिल रही है।
इस पूरे मामले में एक्सपर्ट का कहना है कि सरकार प्रदेश के हालात को लेकर गणना करवा रही है। कर्मियों को लोग अपनी जमीन, जायदाद, मकान और दुकान समेत कई अन्य जानकारियां सही नहीं दे रहे हैं। ऐसे में सरकार के पास जो आंकड़े जाएंगे वह ग़लत ही होंगे।
जातीय जनगणा कराने का सरकार को जो मकसद है, वह पूरा नहीं हो पाएगा। जैसे अभी सरकार को प्रदेश के लोगों की सही जानकारी नहीं है। वैसे ही भविष्य में भी सरकार के पास जो आंकड़े संग्रहित होंगे वह ग़लत ही रहेंगे। नतीजा यह होगा कि ग़लत आंकड़ों के मुताबिक ही सरकार कोई योजना लाएगी। इससे आम जनता भी लाभ से वंचित रह जाएंगे।












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