अपने सुहाग की लंबी उम्र के लिए ये महिलाएं जीती हैं विधवा जैसी जिंदगी, जानिए अनोखी कहानी के बारे में

पटना। वैसे तो हम सभी आमतौर पर जानते हैं कि महिलाएं अपने सुहाग की निशानी के लिए सज-संवरकर रहती हैं। पूजा-अर्चना भी करती हैं तो सारे श्रृंगार कर तैयार होती हैं। लेकिन कभी आपने सुना है कि महिलाएं अपने सुहाग की रक्षा के लिए विधवा की तरह रहती हों। हो सकता है ये रिति रिवाज किसी को अच्छा ना लगे लेकिन ये सच है। एक ऐसी जगह है, जहां महिलाएं अपने सुहाग को बनाए रखने के लिए विधवाओं की तरह जीवन जीती हैं।

गछवाहा समुदाय की महिलाएं विधवा की तरह जीती हैं

गछवाहा समुदाय की महिलाएं विधवा की तरह जीती हैं

आमतौर पर हिंदू रीति-रिवाज में शादीशुदा महिलाएं बिंदी, सिंदूर और महावर जैसी चीजों से सजती-संवरती हैं। ये उनके सुहाग का प्रतीक होता है और माना जाता है कि इससे उनके पति की उम्र बढ़ती है। वहीं देश में गछवाहा समुदाय की महिलाएं एक अलग परंपरा का पालन करती हैं। गछवाहा समुदाय की महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए हर साल विधवा जैसी जिंदगी जीती हैं।

पति ताड़ी के पेड़ पर उतारते हैं ताड़ी

पति ताड़ी के पेड़ पर उतारते हैं ताड़ी

साल में पांच महीने के लिए ये महिलाएं विधवाओं की तरह रहती हैं। गछवाहा समुदाय की स्त्रियां इस अनोखी परंपरा का पालन पुराने समय से ही करती चली आ रही हैं। ये महिलाएं पांच महीने तक न तो कोई श्रृंगार करती हैं और न ही खुश रहती हैं। दरअसल, इन महिलाओं के पति पेड़ों से ताड़ी उतारने जाते हैं और तब तक महिलाएं को सादगीपूर्ण जीवन व्यतीत करना पड़ता है।

तरकुलहा देवी की करते हैं पूजा

तरकुलहा देवी की करते हैं पूजा

इस समुदाय के लोग तरकुलहा देवी को अपनी कुलदेवी के तौर पर पूजते हैं। पूर्वी उत्तर प्रदेश में रहने वाले इस समुदाय के लोगों की आजीविका का मुख्य काम पेड़ से ताड़ी उतारना माना जाता है। ताड़ के पेड़ काफी ज्यादा लंबे और सीधे होते हैं, ऐसे में उनके काम में खतरा भी ज्यादा होता है।

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