बिहार के पूर्व विधायक श्याम रजक ने आरजेडी से दिया इस्तीफा, लालू यादव से कह डाली यह बड़ी बात
बिहार में पूर्व विधायक श्याम रजक ने आरजेडी से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने पार्टी नेता लालू प्रसाद यादव को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। अपने पत्र में रजक ने पार्टी पर छल करने का आरोप लगाते हुए कहा कि मुझे शतरंज का शौक नहीं था। इसलिए मेरे साथ धोखा हुआ। उन्होंने मनोज झा को राज्यसभा और मुन्नी रजक को विधान परिषद भेजने के पार्टी के फैसले पर असंतोष जताया।
श्याम रजक की नाराजगी तब शुरू हुई जब उनकी जाति धोबी समाज से मुन्नी रजक को विधान परिषद भेजा गया। कयास लगाए जा रहे हैं कि वे फुलवारी सीट से चुनाव लड़ना चाहते हैं। अगर जेडीयू तय करती है तो अरुण मांझी की जगह उन्हें मौका दिया जा सकता है। हाल ही में श्याम रजक ने नीतीश कुमार से गुप्त मुलाकात की थी।

आपको बता दें कि 2020 में श्याम रजक विधानसभा चुनाव से पहले आरजेडी में शामिल हो गए थे। जब उन्हें जेडीयू से तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने निकाल दिया था। उन्हें विधानसभा टिकट की उम्मीद थी। लेकिन सीपीआई के उम्मीदवार गोपाल रविदास के फुलवारी शरीफ सीट जीतने पर उन्हें निराशा हाथ लगी। 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए समस्तीपुर सुरक्षित सीट पर नजर रखने के साथ ही उनकी ख्वाहिशें भी जारी रही।
हालांकि यह सीट महागठबंधन में कांग्रेस के खाते में चली गई और सनी हजारी ने चुनाव लड़ा। 2023 में पटना में धोबी महासभा का आयोजन कर समुदाय की ताकत दिखाने के बावजूद राजद ने उन्हें लोकसभा का टिकट नहीं दिया। इससे पार्टी के साथ उनके रिश्ते और खराब हो गए।
राबड़ी देवी के शासनकाल में श्याम रजक ऊर्जा मंत्री रहे। 2009 में वे जमुई सुरक्षित लोकसभा सीट से चुनाव लड़े। लेकिन जेडीयू के भूदेव चौधरी से हार गए। इस हार के बाद उन्होंने पार्टी नेताओं पर तोड़फोड़ का आरोप लगाते हुए आरजेडी छोड़ दी और जेडीयू में शामिल हो गए। बाद में नीतीश कुमार से मतभेद के बाद वे आरजेडी में वापस आ गए।
श्याम रजक को निजी चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा है। क्योंकि उनकी पत्नी अलका रजक की तबीयत खराब हो गई है। वह फिलहाल डायलिसिस पर हैं। इन समस्याओं के बावजूद वह हाल ही में आरजेडी की बैठकों में सक्रिय रहे। जब उनका धैर्य जवाब देने लगा।
अक्टूबर 2022 में दिल्ली में आरजेडी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के दौरान एक ऑडियो क्लिप सामने आई। जिसमें श्याम रजक ने कथित तौर पर लालू प्रसाद के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव के बारे में टिप्पणी की थी। इसके बाद तेज प्रताप बैठक से बाहर चले गए और श्याम पर अपशब्दों का आरोप लगाया। तेज प्रताप ने कहा कि वह श्याम को उसकी जगह दिखा देंगे।
घटना इतनी बढ़ गई कि श्याम बेहोश हो गए और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। तेजप्रताप के आरोपों का जवाब देते हुए श्याम ने कहा कि लालू यादव उनके नेता हैं और यह उन पर निर्भर है कि वह आरजेडी में रहें या छोड़ें।
2025 में विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही श्याम रजक की जेडीयू में संभावित वापसी की चर्चा तेज हो गई है। फुलवारी सीट सीपीआई के पास होने के बावजूद उनके लिए दिलचस्पी का केंद्र बिंदु बनी हुई है। अगर जेडीयू आगामी चुनावों में इस आरक्षित सीट के लिए अरुण मांझी की जगह श्याम रजक को उतारने का फैसला करती है तो यह बिहार के राजनीतिक परिदृश्य में एक और महत्वपूर्ण बदलाव हो सकता है।












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