Farmer Protest: क्या इस भारत वर्ष में अपने अधिकार के लिए मांग करना गुनाह है- सुशील कुमार
AAP Leader On Farmer Protest: लोकसभा चुनाव के मद्देनज़र भारतीय जनता पार्टी ने चुनावी ज़मीन मज़बूत करना शुरू कर दिया है। जनता से लोक लुभावन वादे किए जा रहे हैं, वहीं किसानों ने केंद्र की भाजपा सरकार से अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन शुरू कर दिया है। किसानों को रोकने के लिए हर मुमकिन कोशिश की जा रही है।
किसान प्रदर्शन को लेकर आम आदमी पार्टी बिहार इकाई के निवर्तमान अध्यक्ष सुशील कुमार सिंह ने वन इंडिया हिंदी से ख़ास बातचीत की। उन्होंने कहा कि क्या इस भारत वर्ष में अपने अधिकारों की मांग करना गुनाह है। बाबा साहब भी राव अंबेडकर ने आज़ादी के बाद जो इस देश को संविधान दिया।

संविधान में शांतिपूर्ण यात्रा निकालना या अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करना क्या गुनाह है। आज की तारीख में यह गुनाह ही है। क्योंकि देश में अन्नदाता जो सभी वर्ग के लोगों का पेट भरते हैं, आज कहीं न कहीं दुखी हैं। ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
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खेती में किसानों को जो लागत आती है, उस हिसाब से उन्हें आमदनी नहीं हो पाती है। जब इस चीज़ की मांग करने के लिए सड़कों पर उतरते हैं, तो सरकार उस पर रबड़ की गोलियां चलवाती है। ड्रोन के ज़रिए आंसू गैस छोड़े जाते हैं, रास्तों पर कील बिछा दी जाती है। बड़े बड़े बैरिकेट्स लगा दिए जाते हैं।
आखिर ये क्यों, एक तरफ सरकार देश की बड़ी-बड़ी उर्वरक कंपनियों को सब्सिडी देते हैं। दूसरी तरफ़ किसानों को सरकारी दामों से ज्यादा में खाद्य खरीदना पड़ता है। वहीं किसान अपने अनाज को लेकर जाता है तो व्यापारी कमियां निकालकर निर्धारित दाम से भी कम अनाज बेचने को मजबूर कर देता है।
उर्वरक कंपनियां, ट्रैक्टर बनाने वाली कंपनियों समेत अन्य पर तो सरकार नकेल नहीं कस पाती है। क्योंकि वह लोग कहीं न कहीं आपको चुनाव में आर्थिक मदद पहुंचाते हैं। लेकिन जो किसान पूरे देश की जनता के लिए खेतों में दिन रात मेहनत कर अन्न उपजाते हैं, अपनी मज़दूरी, कीमत और लागत की मांग के लिए आपके पास आते हैं, तो उन पर लाठी चार्ज करवाया जाता है।
किसानों के साथ आतंकवादियों जैसा बरताव किया जाता है। बिके हुए मीडिया हाउस किसानों को ही देश का दुश्मन बताते हैं। सरकार किसानों की मांग पर बात करे, क्योंकि किसानों के बिना धन्ने सेठ भी ज़मीन पर आ जाएंगे। आम आदमी पार्टी किसान आंदोलन के समर्थन में है, किसानों की जो भी मांग है, वह जायज़ है।












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