कांवड़ियों की सेवा करने आगे आया किन्नर समुदाय, जूठे बर्तन भी किए साफ

बिहार के सुल्तानगंज से बाबाधाम के बीच एक ऐसा सेवा शिविर है जहां इसके संचालन से लेकर खाना बनाने और भक्तों की सेवा करने वाले सभी किन्नर समुदाय के लोग हैं।

पटना। बिहार के सुल्तानगंज से बाबाधाम के बीच एक ऐसा सेवा शिविर है जहां इसके संचालन से लेकर खाना बनाने और भक्तों की सेवा करने वाले सभी किन्नर समुदाय के लोग हैं। आइए जानते हैं किन्नरों के द्वारा किए जा रहे बाबा के भक्तों की सेवा के बारे में कुछ ऐसी बातें जिससे सभी भक्त कर रहे हैं उनकी तारीफ...

कांवडियों के जूठे बर्तन भी करते हैं साफ

कांवडियों के जूठे बर्तन भी करते हैं साफ

आज 21वीं सदी में भी समाज के लोग किन्नरों को हीन भावना से देख रहे हैं। पर बीते कुछ समय में किन्नरों द्वारा कुछ ऐसा काम किया गया है जिससे समाज में एक अनोखा मिसाल कायम हुआ है। इसी तरह का एक मिसाल किन्नरों द्वारा कांवरियों की सेवा करके पेश किया जा रहा है। जहां भूखे कांवरियों को खाना खिलाने तथा उनका जूठा बर्तन धोने के साथ-साथ उनकी सेवा करने वाली सभी किन्नर है। जो कई वर्षों से सावन के महीने में भक्तों की सेवा करता है। ये सभी किन्नर छत्तीसगढ़ के दुर्ग के रहने वाले हैं।

भोलेनाथ के आशीर्वाद से काफी पैसा कमाया

भोलेनाथ के आशीर्वाद से काफी पैसा कमाया

सेवा आश्रम में भक्तों की सेवा कर रही एक किन्नर शिवानी यादव से जब इस विषय में बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि आज से नहीं बल्कि पिछले 22 सालों से मैं सावन के महीने में बाबा के दरबार जाया करती हूं। अब हम लोगों ने सावन के महीने में भक्तों की सेवा करने का फैसला किया है जो पिछले कई सालों से लगातार किया जा रहा है और लोगों के द्वारा काफी सराहा भी जा रहा है। हम लोगों का मानना यही है कि पैसा तो भोलेनाथ के आशीर्वाद से हम लोगों ने बहुत कमाया अब इसी पैसे को भक्तों के बीच खर्च कर हम लोगों को काफी खुशी मिलती है। वहीं इस शिविर में सेवा कर रही आप्ती वर्मा का कहना है कि इस सेवा से जो आत्मबल मिलता है वह और किसी से नहीं मिलता।

सेवा भाव देखकर कांवड़िए चकित

सेवा भाव देखकर कांवड़िए चकित

दूसरी तरफ किन्नरों के शिविर में ठहरे कांवड़िए भी इनके शिविर और सेवा करने के भाव को देख चकित है। कावंड़ लेकर बाबा के दरबार जा रहे कांवड़ियां अनिल गोयल और इला गोयल का कहना है कि कुदरत के द्वारा इनके साथ नाइंसाफी हुई है। लेकिन हम लोग इन्हें इंसान मानते हैं और इनकी इस आस्था को देख हम ही नहीं बल्कि अधिकांश कावड़िएं चकित है और सभी उनकी तारीफ कर रहे हैं।

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