दुलारचंद यादव हत्याकांड: अनंत सिंह अपने ही बयान से कैसे फंस गए? जेल में कैसे काट रहे हैं दिन
Anant Singh: मोकामा का बाहुबली चेहरा और पांच बार के विधायक रहे अनंत सिंह एक बार फिर सुर्खियों में हैं। वजह है जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार पीयूष प्रियदर्शी के लिए प्रचार कर रहे आरजेडी नेता दुलारचंद यादव की हत्या। इस सनसनीखेज वारदात के बाद अनंत सिंह को गिरफ्तार कर बेऊर जेल भेज दिया गया है।
दुलारचंद यादव आरजेडी से जुड़े थे लेकिन इस बार मोकामा सीट पर जन सुराज के पक्ष में खुलकर उतर आए थे। यही राजनीतिक समीकरण अब एक हत्या की वजह बन गया। मोकामा गोलीकांड के बाद लंबे समय तक अनंत सिंह की गिरफ्तारी नहीं हुई थी। लेकिन जब चुनाव आयोग ने दिल्ली से सीधे हस्तक्षेप किया, तो पूरा प्रशासन हरकत में आ गया।

पटना ग्रामीण एसपी, मोकामा के रिटर्निंग अफसर (बाढ़ के एसडीओ) समेत तीन अफसरों को हटा दिया गया, जबकि एक एसडीपीओ को सस्पेंड कर दिया गया। इसके बाद ही पुलिस ने दबिश बढ़ाई और 01 नवंबर की रात अनंत सिंह को दो सहयोगियों मणिकांत ठाकुर और रंजीत राम के साथ गिरफ्तार कर लिया।
अनंत सिंह का वही बयान बना मुसीबत की जड़
इस केस में सिर्फ गवाहों के बयान ही नहीं, बल्कि खुद अनंत सिंह के जल्दबाजी में दिए बयान ने भी उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं। घटना के कुछ घंटे बाद उन्होंने पत्रकारों से कहा था, "ये सूरजभान सिंह का खेला है। हमारी 30-40 गाड़ियां आगे निकल गई थीं, 10 पीछे रह गईं, जिन्हें तोड़ दिया गया। दुलारचंद ने पहले हाथ उठाया था।"
यानी अनंत ने खुद यह कबूल लिया कि घटना के वक्त वे मौके के आसपास मौजूद थे। यही बात पुलिस जांच की दिशा बदलने के लिए काफी थी। राजनीतिक दबाव और चुनावी माहौल में यह बयान प्रशासन के लिए तुरन्त कार्रवाई का आधार बन गया।
एसएसपी ने भी दी पुष्टि -अनंत सिंह मौके पर थे
पटना के एसएसपी कार्तिकेय शर्मा ने गिरफ्तारी के बाद मीडिया से कहा, "जांच में पाया गया कि अनंत सिंह घटना के वक्त वहीं थे और उनके सामने ही वारदात हुई।" उनके साथ पकड़े गए दोनों सहयोगियों से भी पुलिस रिमांड पर पूछताछ करेगी। यह बयान स्पष्ट करता है कि पुलिस के पास अनंत की मौजूदगी के ठोस सबूत हैं।
बेऊर जेल में 'साधारण कैदी'की तरह रह रहे हैं अनंत सिंह
अनंत सिंह को बेऊर सेंट्रल जेल में साधारण कैदी की तरह रखा गया है। जेल प्रशासन के मुताबिक, उन्हें किसी भी तरह की 'वीआईपी सुविधा' नहीं दी गई है। न तो कोई सेवादार दिया गया है और न ही कोई खास इंतजाम।
रविवार 02 नवंबर को जेल में उनकी पहली रात थी। उन्होंने जेल का सामान्य खाना खाया और बाकी कैदियों की तरह सोए। सोमवार सुबह उनका मेडिकल टेस्ट हुआ जिसमें ब्लड प्रेशर और शुगर सामान्य निकले। उन्हें जेल मैनुअल के मुताबिक सुबह चाय और दोपहर का खाना दिया गया।
सुरक्षा वार्ड में रखे गए, लेकिन आराम नहीं
हालांकि जेल प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से अनंत सिंह और उनके दोनों समर्थकों को स्पेशल सिक्योरिटी वार्ड में रखा है, लेकिन इसका मतलब कोई विशेष सुविधा नहीं है। यह सिर्फ सुरक्षा एहतियात है क्योंकि अनंत सिंह की आपराधिक पृष्ठभूमि और राजनीतिक पहचान दोनों ही संवेदनशील मानी जाती हैं।
अनंत के करीबी बताते हैं कि उनके दो सहयोगियों में से एक खाना बनाने का काम करता था और दूसरा बाल-दाढ़ी संवारने का। लेकिन जेल में अब दोनों भी कैदी हैं, लिहाजा यह सेवा बंद हो गई है।
जेल अधिकारियों ने बताया कि जेल नियमों के मुताबिक अब हफ्ते में एक दिन ही मुलाकात की अनुमति होगी। अभी तक किसी ने उनसे मुलाकात नहीं की है। पुलिस अब रिमांड पर लेकर उनसे पूछताछ की तैयारी कर रही है ताकि घटना के दिन के हालात को स्पष्ट किया जा सके।
एक समय में मोकामा के दबंग विधायक रहे अनंत सिंह के लिए यह चुनावी सीजन भारी पड़ गया है। अपने ही बयान से फंसने के बाद अब वे जेल की सलाखों के पीछे हैं बिना किसी खास सुविधा, बिना राजनीतिक ताकत के प्रभाव के। दुलारचंद यादव हत्याकांड अब सिर्फ एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि बिहार की सियासत में 'बयान से फंसे बाहुबली' की कहानी बन चुका है।












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