डेंगू पीड़ित बच्चों को दुर्लभ खून की जरूरत, 'Bombay Blood Group' सुन हैरत में लोग, जानें पूरा मामला
Bombay Blood Group के बारे में ज्यादातर लोग नहीं जानते हैं, डेंगू पीड़ित बच्चों को जब दुर्लभ बॉम्बे ब्लड की ज़रूत पड़ी को नाम सुनकर ही लोग चौंकने लगे। ज्यादातर लोग यही जानते हैं कि ओ निगेटिव ब्लड ग्रुप दुर्लभ होता है, लेकिन आप ग़लत हैं। सबसे ज्यादा दुर्लभ बॉम्बे ब्लड ग्रुप है।
'बॉम्बे ब्लड ग्रुप' और डेंगू को लेकर वन इंडिया हिंदी से ख़ास बातचीत में AIIMS के डॉक्टर गौरव कुमार ने बॉम्बे ब्लड ग्रुप और डेंगू के बारे में खुलकर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि Bombay Blood Group और 'O' Negative ब्लड ग्रुप बहुत ही दुर्लभ रक्त समूह है। लाखों लोगों में से 1 का यह ब्लड ग्रुप होता है।

इस ब्लड ग्रुप के लोग सिर्फ अपने ही समूह (Blood Group), एचएच ब्लड टाइप वालों से ही खून ले सकते हैं। इस ब्लड ग्रुप वाले ABO फेनोटाइप रिम में आने वाले लोगों को खून दे सकते हैं, लेकिन खुद के लिए खून मिलना मुश्किल हो जाता है।
बॉम्बे ब्लड ग्रुप को बहुत दुर्लभ (Rare of the Rarest Blood group) की श्रेणी में इसलिए रखा जाता है, क्योंकि दुनिया की कुल आबादी में सिर्फ़ 0.0004 फीसदी लोगों में ही बॉम्बे ब्लड मिलता है। साल 1952 में सबसे पहले इसे डॉ. वाई जी भिड़े ने खोजा था।
मादा एडीज एजिप्टी नामक मच्छर के काटने के बाद हुए संक्रमण की वजह से डेंगू बुखार होता है। इस मच्छर की अ लगभग 3500 प्रजातियां होती हैं। इनमें से से कुछ मादा मच्छर अंडे के विकास के लिए इंसान या फिर किसी जानवर का खून पीती है। इसी के काटने से डेंगू होता है, आम बोल चाल की भाषा में इसे हड्डी तोड़ बुखार भी कहते है।
डेंगू होने पर बुखार तेज लगभग 105 डिग्री तक पंहुच जाता है, जी मचलना, उल्टी, मांसपेसियों और हड्डियों के जोड़ों दर्द, थकान, आँखों और सिर के निचले भाग में दर्द और मसुड़ों और नाक से खून भी आ सकता है। डेंगू मच्छर हमेसा साफ पानी में ही पनपता है, इसलिए कभी भी खाली जगहों पर पानी जमा नहीं होने दें।
गमला और कूलर के पानी को हर सप्ताह बदलें, अगर कूलर के पानी को बदलना मुमकिन नहीं हो तो उसमे मिटटी के तेल डालें। घर के आस पास टायर या कोई भी ऐसी चीज़ नहीं रखें जिसमें बारिस के पानी का जमाव हो सके।












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