CM Nitish Oath Ceremony: नई सरकार बनते ही सत्ता परिवर्तन की तैयारी, बिहार कांग्रेस तैयार कर रही ब्लू प्रिंट!
CM Nitish Oath Ceremony: आज़ादी के बाद बिहार की सत्ता पर दशकों तक एकछत्र राज करने वाली कांग्रेस आज अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। 2020 में जहां उसके पास 19 सीटें थीं, वहीं 2025 के विधानसभा चुनाव में यह संख्या घटकर मात्र छह पर सिमट गई। यह गिरावट सिर्फ चुनावी पराजय नहीं, बल्कि संगठनात्मक कमजोरी और रणनीतिक असफलता का संकेत है।
इसी बीच, जब पटना के गांधी मैदान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में नीतीश कुमार नई सरकार की शपथ ले रहे हैं, कांग्रेस अंदरखाने नई सरकार को चुनौती देने की तैयारी में जुटी है। राहुल गांधी ने हार की समीक्षा के साथ एक ऐसा ब्लू प्रिंट भेजा है, जो आने वाले समय में बिहार की राजनीति में नए विवादों को जन्म दे सकता है।

चुनावी तैयारी के दौरान कांग्रेस की दिशा और रणनीतिक चूक
चुनाव अभियान के समय कांग्रेस ने जनता, महंगाई, बेरोज़गारी या स्थानीय मुद्दों की जगह अपने पूरे प्रचार का केंद्र चुनाव आयोग और मतदाता सूची पुनरीक्षण पर रखा। 'वोटर अधिकार यात्रा' को पार्टी ने मुख्य एजेंडा बना दिया, जबकि एनडीए अपने काम, योजनाओं और सरकार की उपलब्धियों को जनता तक पहुँचा रहा था।
कांग्रेस पूरे चुनाव प्रचार में यह दावा करती रही कि मतदाता सूची में भारी गड़बड़ी हुई है, लेकिन मतदान के दिन जनता ने इस मुद्दे पर कोई बड़ा विरोध नहीं दिखाया। चुनाव परिणामों ने साबित कर दिया कि पार्टी जनता की प्राथमिकताओं को समझने में नाकाम रही और महागठबंधन की हार में उसकी रणनीतिक गलतियाँ निर्णायक साबित हुईं।
नई सरकार गठन के दिन कांग्रेस को मिला 'ब्लू प्रिंट'
14 नवंबर को आए चुनाव परिणाम के बाद कांग्रेस लगातार हार की समीक्षा में जुटी थी, लेकिन नीतीश सरकार के शपथग्रहण के दिन ही राहुल गांधी की ओर से प्रदेश नेतृत्व को नया संदेश भेजा गया। इस संदेश में सभी 38 जिलाध्यक्षों को निर्देश दिया गया है कि वे अपनी-अपनी विधानसभा में हुए मतदान की संपूर्ण प्रक्रिया की जानकारी जुटाएँ।
इन्हें कहा गया है कि हर बूथ से Form 17C की कॉपी प्राप्त की जाए। कुछ जिलाध्यक्षों तक यह संदेश पहुँच चुका है, जबकि बाकी को भी जल्द निर्देश भेजे जा रहे हैं। यह कदम बताता है कि कांग्रेस अब चुनाव परिणामों की वैधता की गहराई से पड़ताल करने पर उतर आई है।
फॉर्म 17C क्या है और कांग्रेस उससे क्या साबित करना चाहती है
फॉर्म 17C वह आधिकारिक दस्तावेज है जो हर बूथ पर मतदान के बाद अंतिम वोट संख्या का रिकॉर्ड रखता है। इसमें EVM, बैलेट यूनिट और वीवीपैट मशीनों के सीरियल नंबर, मॉक पोल का विवरण, मतदान अभिकर्ताओं के हस्ताक्षर और पीठासीन पदाधिकारी का प्रमाण शामिल होता है।
मतदान पूरा होने पर ईवीएम सील करने से पहले मशीन में दर्ज अंतिम वोट संख्या इसी फॉर्म में लिखी जाती है। इसकी एक प्रति प्रत्येक उम्मीदवार के एजेंट को भी दी जाती है। कांग्रेस की योजना है कि इन सभी फॉर्मों का आंकड़ा जुटाकर वह चुनाव आयोग द्वारा घोषित संख्या से उसकी तुलना करे और यदि कोई अंतर मिलता है तो यह मुद्दा बड़ा राजनीतिक हथियार बन सकता है।
कांग्रेस की पूरी योजना और इसकी संभावित प्रभावशीलता
कांग्रेस का उद्देश्य सीधे-सीधे चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाना है। पार्टी मानती है कि यदि बूथों के 17C फॉर्म और आधिकारिक परिणाम में अंतर सामने आता है, तो वह कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर नीतीश सरकार को घेर सकती है। हालांकि यह काम बेहद चुनौतीपूर्ण है।
क्योंकि हर बूथ से फॉर्म जुटाना लंबी और कठिन प्रक्रिया है, और कई जगह एजेंटों के पास फॉर्म मौजूद भी नहीं होते। इसके अलावा EVM आधारित मतदान और मतगणना पूरी तरह रिकॉर्डेड और मॉनिटर वाली प्रक्रिया है, इसलिए किसी बड़े अंतर के सबूत मिलना भी आसान नहीं होगा। फिर भी कांग्रेस अपनी हार के बाद इस रणनीति को 'डैमेज कंट्रोल' के रूप में देख रही है।
बिहार की राजनीति में नया तनाव और कांग्रेस का संघर्ष
बिहार की राजनीति में उतार-चढ़ाव हमेशा तेज़ और अप्रत्याशित रहे हैं, और कांग्रेस ने 2025 की हार के बाद चुनावी प्रक्रिया की जाँच को अपना नया एजेंडा बनाया है। राहुल गांधी का ब्लू प्रिंट पार्टी को संगठनात्मक रूप से सक्रिय कर सकता है, लेकिन सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि जिलों में संगठन कितना मजबूत होकर यह कार्य पूरा कर पाता है। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि कांग्रेस 6 सीटों की पराजय के बावजूद संघर्ष छोड़ने को तैयार नहीं, बल्कि नए विवाद की पृष्ठभूमि तैयार कर रही है।












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